हर वर्ष 23 सितंबर को पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस (International Day of Sign Languages – IDSL) मनाया जाता है। यह दिन न केवल बधिर और श्रवण-बाधित समुदाय की आवाज़ को मजबूत करने का अवसर है, बल्कि यह भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव भी है। इसका उद्देश्य सभी के लिए समान संचार के अधिकार को मान्यता देना और सांकेतिक भाषा को मुख्यधारा में स्थान दिलाना है।
2025 की थीम
2025 में इस दिवस की थीम है — “Sign Language Unites Us” (सांकेतिक भाषा हमें एकजुट करती है)। यह विषय इस विचार को रेखांकित करता है कि सांकेतिक भाषा संवाद की दीवारों को तोड़कर समाज को जोड़ती है। यह केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि समावेशिता, अपनापन और समान अवसर का प्रतीक है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस का इतिहास अपेक्षाकृत नया है।
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2018 में पहली बार इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के बाद मनाया गया।
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यह दिवस अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह (International Week of the Deaf) के दौरान आता है।
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23 सितंबर को चुने जाने का कारण यह है कि 1951 में विश्व बधिर महासंघ (World Federation of the Deaf – WFD) की स्थापना इसी दिन हुई थी।
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WFD ने लंबे समय से यह मांग उठाई थी कि सांकेतिक भाषाओं को औपचारिक मान्यता दी जाए और बधिर समुदाय के अधिकारों की रक्षा हो।
इस तरह, यह दिन न केवल एक स्मरण है, बल्कि वैश्विक बधिर आंदोलन की उपलब्धियों को भी रेखांकित करता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह दिवस?
1. बधिर समुदाय को सशक्त बनाना
सांकेतिक भाषा बधिर और श्रवण-बाधित लोगों की पहचान और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। यह उन्हें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक भागीदारी में समान अवसर देती है।
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यह संवाद के मानव अधिकार को सुरक्षित करती है।
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यह सुनिश्चित करती है कि बधिर लोग समाज से अलग-थलग न हों।
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यह कार्यस्थलों, स्कूलों और नागरिक जीवन में समावेशिता को बढ़ावा देती है।
2. भाषाई विविधता का सम्मान
दुनिया में 300 से अधिक सांकेतिक भाषाएँ प्रचलित हैं। प्रत्येक भाषा की अपनी व्याकरण, वाक्य रचना और शब्दावली होती है।
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उदाहरण: अमेरिकन सांकेतिक भाषा (ASL), ब्रिटिश सांकेतिक भाषा (BSL) और भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL)।
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ये भाषाएँ बधिर समुदाय की सांस्कृतिक धरोहर और पहचान की प्रतीक हैं।
3. सामाजिक समानता और पहुँच
सांकेतिक भाषा केवल बधिर समुदाय तक सीमित नहीं है। यह सभी के लिए सहानुभूति, संवेदनशीलता और सहयोग का माध्यम है। यह हमें याद दिलाती है कि समान अवसरों वाला समाज तभी संभव है जब संचार में कोई बाधा न हो।
अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2025 कैसे मनाएँ?
विद्यालय और छात्रों के लिए गतिविधियाँ
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कार्यशालाओं में भाग लेकर बुनियादी सांकेतिक भाषा सीखना।
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अपने नाम या सामान्य अभिवादन (जैसे “नमस्ते”, “धन्यवाद”) सांकेतिक भाषा में कहना सीखें।
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किसी बधिर वक्ता या दुभाषिए को बुलाकर इंटरैक्टिव सत्र आयोजित करें।
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2025 की थीम “Sign Language Unites Us” पर पोस्टर, निबंध या वीडियो प्रतियोगिता कराएँ।
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बधिर कलाकारों द्वारा बनी फ़िल्में देखें और उनके संदेश पर चर्चा करें।
सोशल मीडिया और डिजिटल अभियान
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हैशटैग #SignLanguageUnitesUs का उपयोग करें।
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छोटे वीडियो, इन्फोग्राफिक्स या सीखने के अनुभव साझा करें।
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स्कूल और कॉलेज क्लब ऑनलाइन अभियान चला सकते हैं।
सामुदायिक स्तर पर
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स्वास्थ्य शिविरों और सरकारी सेवाओं में सांकेतिक भाषा दुभाषिए की व्यवस्था पर जोर।
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स्थानीय NGOs और बधिर संगठनों के साथ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सांकेतिक भाषा को शामिल करें।
रोचक तथ्य
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सांकेतिक भाषा में चेहरे के भाव और शारीरिक हावभाव अर्थ और भाव व्यक्त करने के लिए बेहद जरूरी हैं।
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अधिकांश बधिर लोग द्विभाषी होते हैं – वे सांकेतिक भाषा के साथ-साथ लिखित या बोली जाने वाली भाषा का भी उपयोग करते हैं।
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सांकेतिक भाषा सीखने से स्मरण शक्ति, दृश्य-स्थानिक कौशल और सहानुभूति में वृद्धि होती है।
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भारत में 2020 में भारतीय सांकेतिक भाषा शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र (ISLRTC) ने शिक्षा और सरकारी संचार में ISL को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए।
2025 का महत्व
2025 की थीम “Sign Language Unites Us” वैश्विक स्तर पर एकता और समावेशिता का संदेश देती है। यह दुनिया को यह याद दिलाती है कि संवाद केवल शब्दों से नहीं, बल्कि संकेतों, भावों और समझदारी से भी संभव है।
भारत जैसे देश में, जहाँ लाखों लोग श्रवण-बाधित हैं, इस दिवस का महत्व और बढ़ जाता है। यह सरकार, समाज और शिक्षा जगत को प्रेरित करता है कि वे सभी के लिए पहुँच सुनिश्चित करें और सांकेतिक भाषा को मुख्यधारा में शामिल करें।
मुख्य बिंदु (Quick Facts)
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तारीख: 23 सितंबर 2025
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थीम: Sign Language Unites Us (सांकेतिक भाषा हमें एकजुट करती है)
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आयोजक: संयुक्त राष्ट्र और विश्व बधिर महासंघ (WFD)
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उद्देश्य: भाषाई समानता, बधिर अधिकार और समावेशी संवाद को बढ़ावा देना
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महत्व: सहानुभूति, समावेशिता और मानवाधिकारों की रक्षा

