हर वर्ष 11 दिसंबर को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस (International Mountain Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य पर्वतों के पारिस्थितिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उनके संरक्षण के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करना है। पर्वत न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक हैं, बल्कि वे पृथ्वी की जलवायु, नदियों, जैव विविधता और मानव जीवन को स्थिर रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आज का दौर जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पिघलने, प्राकृतिक संसाधनों की कमी और पर्वतीय समुदायों की कठिन चुनौतियों से भरा है। ऐसे में पर्वत दिवस हमें याद दिलाता है कि इन अनमोल प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा करना क्यों आवश्यक है।
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस 11 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2002 को अंतर्राष्ट्रीय पर्वत वर्ष घोषित किया था। इसके बाद, वैश्विक सहयोग और पर्वत संरक्षण के उद्देश्य से 2003 से हर साल 11 दिसंबर को पर्वत दिवस मनाया जाने लगा।
इस दिन को चुनने के पीछे प्रमुख उद्देश्य हैं:
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पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा
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पर्वतीय समुदायों की आजीविका और संस्कृति को संरक्षित करना
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जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर जागरूकता बढ़ाना
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सतत पर्यटन, जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस 2025 की थीम
थीम 2025: “ग्लेशियर पहाड़ों और उसके बाहर पानी, भोजन और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं।”
यह थीम संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2025 को अंतर्राष्ट्रीय ग्लेशियर संरक्षण वर्ष (International Year of Glaciers’ Preservation) घोषित किए जाने के अनुरूप है।
ग्लेशियरों का महत्व इसलिए भी अत्यधिक है क्योंकि:
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दुनिया की 10% आबादी सीधे तौर पर ग्लेशियरों से मिलने वाले पानी पर निर्भर है
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हिमालय, एंडीज़, आल्प्स जैसे पर्वत करोड़ों लोगों के जल स्रोत का आधार हैं
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ग्लेशियरों का पिघलना कृषि, खाद्य सुरक्षा और आजीविका पर व्यापक प्रभाव डालता है
थीम 2025 चेतावनी देती है कि यदि ग्लेशियरों की रक्षा नहीं की गई, तो भविष्य में जल संकट, बाढ़ और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याएँ और गंभीर हो जाएँगी।
पर्वतों का महत्व क्यों है?
पर्वत प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक स्तंभों में से एक हैं। इनके योगदान को कई व्यापक क्षेत्रों में देखा जा सकता है:
1. दुनिया के जल स्रोतों की नींव
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पर्वतों से निकलने वाली नदियाँ करोड़ों लोगों को पीने का पानी देती हैं।
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ग्लेशियर पानी के प्राकृतिक भंडार के रूप में काम करते हैं।
2. जलवायु नियंत्रण में मुख्य भूमिका
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पर्वत तापमान संतुलन बनाए रखते हैं।
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हवा और मानसून के पैटर्न को प्रभावित करते हैं।
3. जैव विविधता के केंद्र
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पहाड़ी क्षेत्रों में दुर्लभ जीव-जंतु और पौधों की हजारों प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
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हिमालय दुनिया के सबसे बड़े जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में शामिल है।
4. पर्यटन और अर्थव्यवस्था
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पर्वतीय पर्यटन कई देशों की आय का प्रमुख स्रोत है।
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एडवेंचर स्पोर्ट्स, इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन पर्वतीय समुदायों की आय बढ़ाता है।
5. पर्वतीय समुदायों का सांस्कृतिक महत्व
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पर्वत भारत सहित दुनिया भर में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक माने जाते हैं।
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कई जनजातियाँ अपनी अनूठी संस्कृति और परंपराएँ पर्वतों में ही संजोए हुए हैं।
पर्वतों के सामने बढ़ते खतरे
आज पर्वत गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं:
1. ग्लेशियरों का पिघलना
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तापमान बढ़ने से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं
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इससे बाढ़ और ग्लेशियल झील फटने की घटनाएँ बढ़ रही हैं
2. वनों की कटाई और खनन
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अवैज्ञानिक विकास और खनन गतिविधियाँ पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुँचा रही हैं
3. असुरक्षित सड़क और निर्माण कार्य
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बढ़ते निर्माण कार्य भूस्खलन जैसी आपदाओं को जन्म देते हैं
4. अत्यधिक पर्यटन
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प्लास्टिक कचरा
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प्राकृतिक पगडंडियों का क्षरण
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स्थानीय संसाधनों पर दबाव
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस का उद्देश्य
इस दिवस को मनाने का मुख्य लक्ष्य है:
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पर्वत संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना
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पर्वतीय समुदायों की आवश्यकताओं को समझना
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सतत और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना
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जलवायु परिवर्तन को रोकने के उपायों को प्रोत्साहित करना
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ग्लेशियरों और महत्वपूर्ण जल स्रोतों की रक्षा के लिए नीति निर्माण को प्रेरित करना
पर्वत दिवस का इतिहास
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2002: संयुक्त राष्ट्र ने “अंतर्राष्ट्रीय पर्वत वर्ष” घोषित किया
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2003: पहली बार अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस मनाया गया
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उद्देश्य: पर्वतों के सतत विकास, संरक्षण और पर्वतीय समुदायों की समस्याओं पर वैश्विक ध्यान केंद्रित करना
तब से हर वर्ष अलग थीम रखकर पर्वतों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का फोकस बढ़ाया जाता है।

