ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति और समुद्री रणनीति का दम दिखाने के लिए “सस्टेनेबल पावर 1404” नामक एक बड़े पैमाने का मिसाइल अभ्यास किया। यह दो दिवसीय ड्रिल गुरुवार से शुरू हुई, जो उत्तरी हिंद महासागर और ओमान की खाड़ी में आयोजित की गई। यह अभ्यास जून 2025 में हुए 12-दिवसीय संघर्ष के बाद ईरान का पहला बड़ा सैन्य अभ्यास है। विशेषज्ञ इसे क्षेत्रीय तनाव की बढ़ती स्थिति और तेहरान की समुद्री निवारक (maritime deterrence) क्षमता को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।
अभ्यास के उद्देश्य और घटक
1. अभ्यास का उद्देश्य
ईरानी नौसेना अधिकारियों के अनुसार इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य था –
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युद्धकालीन तैयारियों और कमांड कोऑर्डिनेशन में सुधार करना
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दुश्मन देशों को रोकने के लिए निवारक क्षमता को मजबूत करना
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युद्ध के बाद भी सैन्य लचीलापन (resilience) प्रदर्शित करना
2. तैनाती का विवरण
राज्य संचालित टीवी चैनल के मुताबिक, इस ड्रिल में शामिल थे –
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सतही (surface) और पनडुब्बी (subsurface) युद्धपोत
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वायु इकाइयाँ और मिसाइल रक्षा प्रणाली
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इलेक्ट्रॉनिक युद्ध ब्रिगेड
सबसे अहम बात यह रही कि ईरान ने इस दौरान नासिर और क़ादिर (Nasir & Qadir) जैसे लंबी दूरी तक मार करने वाले क्रूज़ मिसाइलों का परीक्षण किया। इन मिसाइलों की सटीक निशाना साधने की क्षमता को अभ्यास में प्रदर्शित किया गया, जिससे यह संकेत मिला कि ईरान अब दूरस्थ लक्ष्यों पर प्रहार करने की पूरी ताकत रखता है।
भू-राजनीतिक संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सैन्य अभ्यास हाल ही में इज़राइल द्वारा किए गए सैन्य सिमुलेशन का जवाब है। खबरों के अनुसार, इज़राइल ने हाल ही में ऐसे अभ्यास किए थे, जिनका मकसद ईरान की परमाणु संरचनाओं पर हमले की तैयारी था।
ईरान का यह मिसाइल अभ्यास दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश है कि –
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वह युद्ध के बाद भी पूरी तरह लचीला और तैयार है।
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उसके पास अब भी पर्याप्त सैन्य क्षमता है कि किसी भी हमले का जवाब दे सके।
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यदि ज़रूरत पड़ी, तो वह अपने विरोधियों को लंबी दूरी की मिसाइलों से निशाना बना सकता है।
हालिया संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह अभ्यास ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में तनाव पहले से ही चरम पर है। जून 2025 के संघर्ष के दौरान –
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इज़राइल ने ईरान की मिसाइल साइट्स को निशाना बनाया था।
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जवाब में ईरान ने इज़राइली शहरों पर रॉकेट दागे और क़तर स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर भी मिसाइल हमला करने की कोशिश की।
इन घटनाओं के बाद ईरान को सैन्य और राजनीतिक रूप से बड़ा झटका लगा था। इसलिए “सस्टेनेबल पावर 1404” को ईरान की ओर से एक शक्ति प्रदर्शन (show of strength) माना जा रहा है, ताकि यह साबित किया जा सके कि वह युद्ध के बावजूद कमजोर नहीं हुआ।
अंतरराष्ट्रीय संदेश और प्रभाव
यह अभ्यास सिर्फ एक सैन्य गतिविधि नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी है।
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अमेरिका और इज़राइल को चेतावनी – ईरान ने यह दिखाने की कोशिश की कि उसके पास अब भी रणनीतिक जवाब देने की क्षमता है।
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क्षेत्रीय देशों को संदेश – ओमान की खाड़ी और होरमुज जलडमरूमध्य जैसे इलाके, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल ट्रांज़िट होता है, वहां सैन्य उपस्थिति दिखाना सीधा संदेश है कि ईरान इन मार्गों की सुरक्षा और नियंत्रण में अहम भूमिका निभा सकता है।
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वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर असर – इस ड्रिल के कारण कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएँ बढ़ सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर दबाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष
“सस्टेनेबल पावर 1404” मिसाइल अभ्यास ईरान के लिए सिर्फ एक नियमित सैन्य ड्रिल नहीं है, बल्कि यह उसकी रणनीतिक पहचान और शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा है।
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इस अभ्यास से ईरान ने यह साबित किया है कि वह युद्धोत्तर परिस्थितियों में भी अपनी रक्षा क्षमताओं को लेकर आश्वस्त है।
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यह संदेश दिया गया है कि कोई भी दुश्मन उसकी सीमाओं और हितों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता।
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साथ ही, ईरान ने यह संकेत भी दिया कि वह क्षेत्रीय स्थिरता में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना रहेगा।
इस तरह यह अभ्यास न केवल ईरान की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि आने वाले महीनों में मध्य पूर्व की राजनीति, सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर डालने वाला कदम भी साबित हो सकता है।

