मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इज़रायल (Israel) और ईरान (Iran) एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में हैं। दोनों देशों के बीच जारी टकराव का असर न केवल क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ रहा है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी देखने को मिल रहा है।
इस बीच लोगों के मन में एक सवाल बार-बार उठता है—इन दोनों देशों में कौन-सा धर्म प्रमुख है और क्या यहां हिंदू समुदाय भी मौजूद है? आइए विस्तार से समझते हैं।
इज़रायल की जनसंख्या और धार्मिक संरचना
मुख्य धार्मिक संरचना:
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73–75%: यहूदी
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लगभग 18%: मुस्लिम
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अन्य: ईसाई और द्रूज़ समुदाय
यहां यहूदी समुदाय बहुसंख्यक है, लेकिन समाज पूरी तरह एकरूप नहीं है। इज़रायल में धार्मिक और सेक्युलर (धर्मनिरपेक्ष) दोनों तरह के लोग रहते हैं।
संसद (केनेस्सेट) में भी अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टियां सक्रिय हैं—कुछ धार्मिक कानूनों का समर्थन करती हैं, जबकि कई उदार लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता देती हैं।
इसलिए पूरे इज़रायल को “कट्टर” कहना सही नहीं होगा, क्योंकि यहां विचारों की विविधता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
ईरान की जनसंख्या और धार्मिक पहचान
धार्मिक संरचना:
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लगभग 99%: मुस्लिम
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90–95%: शिया मुस्लिम
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5–10%: सुन्नी मुस्लिम
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अल्पसंख्यक: ईसाई, यहूदी, ज़ोरास्ट्रियन
ईरान एक इस्लामिक गणराज्य है, जहां शासन व्यवस्था धार्मिक सिद्धांतों पर आधारित है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद देश की राजनीतिक और सामाजिक संरचना में धर्म की भूमिका और मजबूत हो गई।
यहां सर्वोच्च धार्मिक नेता (Supreme Leader) का प्रभाव काफी बड़ा होता है, और कई सामाजिक नियम—जैसे ड्रेस कोड—धार्मिक आधार पर तय किए जाते हैं।
हालांकि, समाज के भीतर विचारों की विविधता मौजूद है, खासकर युवा पीढ़ी में।
क्या इज़रायल और ईरान में हिंदू रहते हैं?
दोनों देशों में हिंदू आबादी मौजूद है, लेकिन यह संख्या बेहद कम है।
इज़रायल में हिंदू आबादी
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मुख्यतः भारतीय मूल के लोग
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आईटी प्रोफेशनल, केयरगिवर्स और छोटे व्यवसायी
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अनुमानित संख्या: कुछ हजार
इज़रायल में भारतीय समुदाय काफी सक्रिय है, लेकिन कुल जनसंख्या के मुकाबले इसका प्रतिशत बहुत कम है।
ईरान में हिंदू आबादी
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बहुत सीमित उपस्थिति
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कुछ भारतीय व्यापारी या अस्थायी कामगार
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स्थायी धार्मिक समुदाय के रूप में बहुत कम संख्या
ईरान में हिंदू धर्म का प्रभाव लगभग नगण्य है, और वहां की धार्मिक संरचना पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ता।
धर्म और राज्य व्यवस्था: बड़ा अंतर
इज़रायल
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खुद को यहूदी राष्ट्र मानता है
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लोकतांत्रिक व्यवस्था
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धार्मिक और सेक्युलर दोनों विचारधाराओं का सह-अस्तित्व
ईरान
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आधिकारिक इस्लामिक गणराज्य
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धार्मिक नेतृत्व का राजनीतिक नियंत्रण
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कानून और सामाजिक व्यवस्था पर धर्म का गहरा प्रभाव
यह अंतर दोनों देशों के राजनीतिक और सामाजिक ढांचे को पूरी तरह अलग बनाता है।
कट्टरता पर संतुलित नजरिया
अक्सर इज़रायल और ईरान को “कट्टर” देशों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन वास्तविकता इससे अधिक जटिल है।
इज़रायल में:
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धार्मिक और उदारवादी समूहों के बीच बहस
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लोकतांत्रिक ढांचा
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समाज में विविधता
ईरान में:
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धार्मिक शासन का प्रभाव
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सार्वजनिक जीवन में नियम सख्त
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लेकिन समाज के भीतर विचारों की विविधता
इसलिए दोनों देशों को एक ही नजरिए से देखना सही नहीं होगा।

