भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के संबंध हाल के वर्षों में तेज़ी से गहराते गए हैं। जनवरी 2026 में UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा ने इस साझेदारी को एक नए रणनीतिक स्तर पर पहुँचा दिया है। इस यात्रा के दौरान निवेश, रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते, लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) और बड़ी घोषणाएँ की गईं।
ये पहल यह दर्शाती हैं कि भारत–UAE संबंध अब केवल व्यापारिक सहयोग तक सीमित नहीं रहे, बल्कि एक व्यापक, बहुआयामी और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हो चुके हैं।
क्यों चर्चा में?
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UAE के राष्ट्रपति ने जनवरी 2026 में भारत की आधिकारिक यात्रा की।
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इस दौरान दोनों देशों ने
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कई MoU,
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लेटर ऑफ इंटेंट (LoI)
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और रणनीतिक घोषणाओं पर हस्ताक्षर किए।
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उद्देश्य था भारत–UAE समग्र रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना।
निवेश और अवसंरचना में सहयोग: धोलेरा SIR परियोजना
इस यात्रा का एक बड़ा नतीजा रहा धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (Dholera SIR) में UAE की भागीदारी।
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गुजरात सरकार और UAE के निवेश मंत्रालय के बीच LoI पर हस्ताक्षर हुए।
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इस परियोजना में शामिल हैं:
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अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा,
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पायलट प्रशिक्षण स्कूल,
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MRO सुविधा,
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ग्रीनफील्ड बंदरगाह,
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स्मार्ट शहरी टाउनशिप,
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रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा अवसंरचना।
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यह पहल भारत के औद्योगिक गलियारों और
मेक इन इंडिया नीति को बड़ा समर्थन देती है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक साझेदारी
भारत और UAE के बीच अंतरिक्ष सहयोग एक नए चरण में प्रवेश कर गया है।
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IN-SPACe (भारत) और UAE अंतरिक्ष एजेंसी के बीच LoI पर हस्ताक्षर हुए।
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लक्ष्य:
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संयुक्त प्रक्षेपण अवसंरचना,
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उपग्रह विनिर्माण क्षेत्र,
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इनक्यूबेशन केंद्र,
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प्रशिक्षण संस्थान और
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वैज्ञानिक आदान-प्रदान कार्यक्रम।
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यह सहयोग भारत के उभरते निजी अंतरिक्ष उद्योग और
UAE की स्पेस इकॉनमी रणनीति को नई गति देगा।
रक्षा और सुरक्षा साझेदारी का विस्तार
रणनीतिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण समझौता रहा
भारत–UAE रणनीतिक रक्षा साझेदारी पर LoI।
इसके तहत:
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रक्षा उद्योग में सहयोग,
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उन्नत प्रौद्योगिकी विकास,
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संयुक्त प्रशिक्षण,
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साइबर सुरक्षा,
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विशेष अभियान,
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और आतंकवाद-रोधी सहयोग
को संस्थागत ढाँचे में विकसित किया जाएगा।
यह हिंद महासागर क्षेत्र में
समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी अहम माना जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा: LNG और परमाणु सहयोग
ऊर्जा क्षेत्र में दो बड़े निर्णय सामने आए:
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HPCL और ADNOC Gas के बीच SPA
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2028 से 10 वर्षों तक
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0.5 MMPTA LNG की दीर्घकालिक आपूर्ति।
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इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
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नागरिक परमाणु सहयोग को बढ़ावा
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बड़े रिएक्टर,
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स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR),
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परमाणु सुरक्षा और
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संचालन–रखरखाव में सहयोग।
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यह सहयोग भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और
UAE की कार्बन न्यूट्रैलिटी नीति के अनुरूप है।
कृषि और खाद्य सुरक्षा में साझेदारी
APEDA (भारत) और
UAE के पर्यावरण व जलवायु मंत्रालय के बीच MoU के तहत:
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कृषि उत्पादों के व्यापार को सरल बनाया जाएगा।
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विशेष रूप से
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चावल,
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खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद
के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
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इससे:
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भारतीय किसानों को नए बाजार मिलेंगे,
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और UAE की खाद्य सुरक्षा रणनीति मजबूत होगी।
डिजिटल, AI और सुपरकंप्यूटिंग में सहयोग
डिजिटल क्षेत्र में भी ऐतिहासिक घोषणा हुई:
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C-DAC (भारत) और G-42 (UAE) मिलकर
भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करेंगे। -
यह पहल AI इंडिया मिशन के तहत:
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अनुसंधान,
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अनुप्रयोग विकास,
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और वाणिज्यिक उपयोग
को समर्थन देगी।
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यह भारत–UAE को
वैश्विक AI और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
व्यापार लक्ष्य: 2032 तक 200 अरब डॉलर
दोनों देशों ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है कि:
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2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को
200 अरब अमेरिकी डॉलर तक दोगुना किया जाएगा।
इसके लिए:
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भारत मार्ट,
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वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर,
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भारत–अफ्रीका सेतु
जैसी पहलों को बढ़ावा दिया जाएगा।
यह CEPA की सफलता को
एक नए स्तर पर ले जाएगा।
गिफ्ट सिटी और डिजिटल दूतावास
वित्तीय और डिजिटल क्षेत्र में दो नई पहल:
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FAB बैंक द्वारा गिफ्ट सिटी में शाखा खोलना।
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DP World द्वारा जहाज लीजिंग संचालन शुरू करना।
इसके साथ ही:
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डिजिटल / डेटा दूतावासों की स्थापना की संभावनाओं का अध्ययन।
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यह साइबर संप्रभुता और
सुरक्षित डेटा साझाकरण के लिए एक नई अवधारणा है।
सांस्कृतिक और जन-जन के बीच संपर्क
लोगों के बीच संबंध मजबूत करने के लिए:
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अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ की स्थापना।
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कला,
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विरासत,
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और पुरातत्व संग्रहालय।
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युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम
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शिक्षा,
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अनुसंधान,
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और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देगा।
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UAE में लगभग 35 लाख भारतीय रहते हैं,
जो इस साझेदारी की सबसे मजबूत कड़ी हैं।

