भारत और मॉरीशस के बीच संबंध केवल कूटनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आधार पर भी गहरे हैं। प्रवासी भारतीय समुदाय ने इस रिश्ते को और मजबूत बनाया है। हाल ही में मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने भारत का राजकीय दौरा किया, जो द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊँचाई देने वाला साबित हुआ। इस यात्रा के दौरान सात समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए और कई अहम घोषणाएँ की गईं।
यह दौरा भारत के हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ते जुड़ाव और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) के साथ साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
यात्रा की मुख्य उपलब्धियाँ
1. विज्ञान और प्रौद्योगिकी
भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और मॉरीशस के तृतीयक शिक्षा, विज्ञान एवं अनुसंधान मंत्रालय के बीच समझौता हुआ। इसका उद्देश्य संयुक्त अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है। इससे दोनों देशों के वैज्ञानिकों को नई परियोजनाओं पर एक साथ काम करने का अवसर मिलेगा।
2. महासागरीय अध्ययन (Oceanography)
सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (भारत) और मॉरीशस ओशनोग्राफी संस्थान ने समुद्री संसाधनों और पर्यावरणीय निगरानी पर काम करने के लिए साझेदारी की। यह समझौता समुद्री जैव विविधता, मत्स्य पालन और जलवायु परिवर्तन से संबंधित शोध में उपयोगी होगा।
3. लोक सेवा सुधार
भारत के कर्मयोगी भारत कार्यक्रम और मॉरीशस के लोक सेवा एवं प्रशासनिक सुधार मंत्रालय ने ई-गवर्नेंस, सिविल सेवा प्रशिक्षण और सुशासन की श्रेष्ठ प्रथाओं को साझा करने के लिए समझौता किया। यह साझेदारी मॉरीशस की प्रशासनिक दक्षता को बेहतर बनाएगी।
4. ऊर्जा और विद्युत क्षेत्र
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर नया MoU साइन हुआ। इसमें विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण और बिजली प्रबंधन प्रणालियों का विकास शामिल है। भारत की तकनीकी विशेषज्ञता मॉरीशस के ऊर्जा ढाँचे को अधिक सतत और कुशल बनाएगी।
5. लघु विकास परियोजनाएँ
भारत ने मॉरीशस में लघु विकास परियोजनाओं के दूसरे चरण के लिए सामुदायिक बुनियादी ढाँचे में अनुदान सहायता प्रदान करने का वादा किया। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अवसंरचना में सुधार होगा।
6. हाइड्रोग्राफी सहयोग
मौजूदा हाइड्रोग्राफी समझौते का नवीनीकरण किया गया। इससे हिंद महासागर में नौवहन सुरक्षा, समुद्री मार्गों की निगरानी और समुद्री क्षेत्र जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा। यह समझौता भारत की SAGAR (Security and Growth for All in the Region) पहल के अनुरूप है।
7. अंतरिक्ष सहयोग
सबसे ऐतिहासिक समझौता अंतरिक्ष क्षेत्र में हुआ। मॉरीशस में टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और दूरसंचार केंद्र स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र भारत के उपग्रहों और प्रक्षेपण यान मिशनों को समर्थन देगा और अंतरिक्ष अनुसंधान में दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग को बढ़ाएगा।
प्रमुख घोषणाएँ
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शैक्षणिक सहयोग:
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आईआईटी मद्रास और यूनिवर्सिटी ऑफ मॉरीशस (Réduit) के बीच अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा पर साझेदारी।
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भारतीय बागान प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु ने भी कृषि और बागान विशेषज्ञता साझा करने हेतु समझौता किया।
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नवीकरणीय ऊर्जा पहल:
भारत, मॉरीशस में तामारिंड फॉल्स पर 17.5 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर पीवी परियोजना का समर्थन करेगा। एनटीपीसी लिमिटेड शीघ्र ही मॉरीशस जाकर स्थानीय विद्युत बोर्ड के साथ समझौते को अंतिम रूप देगा।
रणनीतिक और वैश्विक संदर्भ
इस यात्रा का महत्व केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत करता है।
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मॉरीशस भारत का करीबी समुद्री पड़ोसी है और SAGAR पहल में महत्वपूर्ण साझेदार है।
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नए समझौते सतत विकास, क्षमता निर्माण, और समुद्री सुरक्षा में भारत की भूमिका को मजबूत करते हैं।
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यह साझेदारी चीन सहित बाहरी शक्तियों के प्रभाव को संतुलित करने का भी एक रणनीतिक प्रयास है।
भारत–मॉरीशस रिश्तों का व्यापक महत्व
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आर्थिक सहयोग: निवेश, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा।
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सुरक्षा सहयोग: नौसेना और तटरक्षक बलों के बीच तालमेल।
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डिजिटल और तकनीकी साझेदारी: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ई-गवर्नेंस का विकास।
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सांस्कृतिक जुड़ाव: प्रवासी भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच जीवंत कड़ी है।
परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु
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दौरे की तिथि: 11 सितंबर 2025
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हस्ताक्षरित MoUs की संख्या: 7
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प्रमुख क्षेत्र: विज्ञान, समुद्र विज्ञान, लोक प्रशासन, ऊर्जा, हाइड्रोग्राफी, अंतरिक्ष
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प्रमुख परियोजना: तामारिंड फॉल्स पर 17.5 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर पीवी
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मॉरीशस के प्रधानमंत्री: नवीनचंद्र रामगुलाम
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राजधानी: पोर्ट लुई

