लोकसभा ने 3 दिसंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार करते हुए केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 और स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर (सेस) विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी है। ये दोनों विधेयक उन ‘सिन गुड्स’ पर नया कर ढांचा लागू करते हैं—जैसे सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला—जिन पर अभी तक जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता था।
चूंकि यह उपकर 31 मार्च 2026 के बाद समाप्त होने वाला है, इसलिए सरकार ने नए कर ढांचे के जरिए राजस्व की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य व राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित टैक्स नीति लागू करने का निर्णय लिया है।
नए विधेयकों का उद्देश्य
सरकार का मकसद केवल राजस्व जुटाना नहीं है, बल्कि यह कदम कई व्यापक नीति-लक्ष्यों पर आधारित है—
1. जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त होने के बाद राजस्व की निरंतरता बनाए रखना
महामारी के बाद राज्यों को क्षतिपूर्ति देने के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने हेतु इस उपकर को 2026 तक बढ़ाया गया था। इसके बाद राजस्व स्रोत प्रभावित न हों, इसके लिए नया ढांचा जरूरी था।
2. स्वास्थ्य के लिए हानिकारक (Demerit) उत्पादों पर उच्च कर जारी रखना
तंबाकू और पान मसाला जैसे उत्पादों पर अधिक कर लगाने से उपभोग में कमी आती है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम घटते हैं।
3. कर संग्रह का उपयोग सामान्य खर्च की जगह राष्ट्रीय स्वास्थ्य और सुरक्षा में करना
नया सेस केवल इन दो क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा।
4. महामारी के समय लिए गए कर्ज की अदायगी में सहयोग
उपकर का एक बड़ा हिस्सा उन्हीं देनदारियों को चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा।
जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर: पृष्ठभूमि
जब 2017 में जीएसटी लागू हुआ, राज्यों को वचन दिया गया था कि राजस्व नुकसान की भरपाई केंद्र करेगा। इसके लिए लक्ज़री और ‘सिन गुड्स’ पर क्षतिपूर्ति उपकर लगाया गया।
यह उपकर मूल रूप से पाँच वर्ष के लिए था, लेकिन कोविड-19 के आर्थिक प्रभाव के चलते इसे 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया।
सितंबर 2025 में कई लग्ज़री वस्तुओं से यह उपकर हटा लिया गया, लेकिन तंबाकू और पान मसाला पर इसे बनाए रखा गया। अब यही उपकर नए कर ढांचे से प्रतिस्थापित होगा।
केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025: क्या बदलेगा?
यह विधेयक तंबाकू उत्पादों पर नया केंद्रीय उत्पाद शुल्क लागू करता है, जिसमें शामिल हैं—
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सिगरेट
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सिगार
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चेरूट
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हुक्का
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ज़र्दा
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सुगंधित तंबाकू
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निकोटिन-आधारित उत्पाद
नई कर दरें (मुख्य बिंदु):
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₹5,000–₹11,000 प्रति 1,000 सिगरेट स्टिक (लंबाई पर निर्भर)
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बिना प्रसंस्कृत तंबाकू पर 60–70% कर
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निकोटिन उत्पादों पर 100% उत्पाद शुल्क
यह कर मौजूदा 40% जीएसटी दर के अतिरिक्त लगाया जाएगा।
स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर (सेस) विधेयक, 2025
यह बिल पान मसाला और अन्य अधिसूचित उत्पादों पर नया सेस लागू करता है। संग्रहित राजस्व का उपयोग विशेष रूप से निम्न क्षेत्रों में होगा—
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सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम
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राष्ट्रीय सुरक्षा
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स्वास्थ्य जोखिम कम करने वाली योजनाएँ
यह सेस राज्यों के साथ साझा नहीं होगा क्योंकि यह विभाज्य कर पूल का हिस्सा नहीं है।
नया कर ढांचा क्यों महत्वपूर्ण है?
जीएसटी उपकर खत्म होने के बाद भी कुल कर भार बना रहेगा
जनता पर भार नहीं बढ़ेगा, लेकिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं पर टैक्स कम भी नहीं होगा।
स्वास्थ्य जोखिम वाले उत्पादों के उपभोग पर नियंत्रण
अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, ऐसे उत्पादों पर उच्च कर उपभोग को कम करता है।
राज्यों को महामारी मुआवजा कर्ज चुकाने में मदद
सरकार सुनिश्चित करेगी कि राजस्व में कमी महसूस न हो।
वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा
टैक्स का लक्ष्य-आधारित उपयोग सार्वजनिक भरोसा बढ़ाने में मदद करेगा।
इन सुधारों का व्यापक प्रभाव
उपभोक्ताओं पर प्रभाव
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सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला महंगे रहेंगे।
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स्वास्थ्य लाभों की दृष्टि से यह कदम सकारात्मक माना जा रहा है।
उद्योग पर प्रभाव
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उत्पाद शुल्क संरचना स्पष्ट और स्थिर हो जाएगी।
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स्वास्थ्य-आधारित कर नीति उद्योग को जिम्मेदार उत्पादन की ओर बढ़ाएगी।
सरकार पर प्रभाव
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राजस्व स्थिर रहेगा।
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स्वास्थ्य फंडिंग और सुरक्षा खर्च को प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्य तथ्य (आसान भाषा में याद रखने योग्य)
| विषय | विवरण |
|---|---|
| विधेयक | केंद्रीय उत्पाद शुल्क संशोधन बिल 2025, स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर बिल 2025 |
| लागू उत्पाद | सिगरेट, तंबाकू, पान मसाला |
| नया उत्पाद शुल्क | ₹5,000–₹11,000 प्रति 1,000 सिगरेट, 60–70% कच्चे तंबाकू पर |
| निकोटिन उत्पाद | 100% उत्पाद शुल्क |
| नया सेस | स्वास्थ्य व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए |
| उद्देश्य | जीएसटी उपकर समाप्त होने के बाद राजस्व बनाए रखना |

