लखनऊ बना यूपी का पहला ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर
लखनऊ बना यूपी का पहला ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर

लखनऊ बना यूपी का पहला ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ देश के सबसे तेजी से विकसित होते महानगरों में शामिल हो चुका है। लगभग 40 लाख की आबादी और करीब 7.5 लाख दुकानें, कार्यालय एवं अन्य प्रतिष्ठान होने के कारण यहां रोज़ाना निकलने वाले कचरे का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती रहा है। बढ़ते शहरीकरण, उपभोक्तावाद और जनसंख्या दबाव के बीच स्वच्छता बनाए रखना किसी भी नगर निगम के लिए आसान काम नहीं होता।

इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लखनऊ नगर निगम (LMC) ने एक आधुनिक, वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को अपनाया है। इसका परिणाम यह हुआ कि आज लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर बन गया है, जहां अब ताज़ा कचरा खुले में डंप नहीं किया जाता।

शिवरी में तीसरे कचरा प्रसंस्करण संयंत्र की शुरुआत

लखनऊ के इस ऐतिहासिक बदलाव में शिवरी साइट पर शुरू किया गया तीसरा ताज़ा कचरा प्रसंस्करण संयंत्र मील का पत्थर साबित हुआ है। इस संयंत्र के उद्घाटन के साथ ही शहर में उत्पन्न होने वाले 100 प्रतिशत ताज़े नगर निगम कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण संभव हो गया है।

इस उपलब्धि के बाद लखनऊ को आधिकारिक तौर पर ‘ज़ीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर का दर्जा मिला है। इसका अर्थ है कि अब शहर से निकलने वाला नया कचरा न तो खुले में फेंका जाएगा और न ही बिना उपचार के लैंडफिल साइट पर डंप किया जाएगा।

शहर की बढ़ी कचरा प्रसंस्करण क्षमता

शिवरी में स्थापित नया संयंत्र प्रतिदिन 700 मीट्रिक टन कचरा प्रसंस्करित करने में सक्षम है। पहले से संचालित दो अन्य संयंत्रों के साथ मिलकर अब लखनऊ की कुल कचरा प्रसंस्करण क्षमता 2,100 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गई है।

यह क्षमता शहर में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे के लगभग बराबर है, जिससे यह सुनिश्चित हो गया है कि हर दिन निकलने वाला पूरा कचरा पर्यावरण-सुरक्षित तरीके से प्रोसेस किया जाएगा

लखनऊ में रोज़ाना कचरे का प्रबंधन कैसे होता है?

लखनऊ में प्रतिदिन लगभग 2,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है। इसके कुशल प्रबंधन के लिए LMC ने भूमि ग्रीन एनर्जी के साथ साझेदारी की है, जो शहर के तीनों आधुनिक कचरा प्रसंस्करण संयंत्रों का संचालन करती है।

कचरे को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है—

  • जैविक (गीला) कचरा – 55%

  • अजैविक (सूखा) कचरा – 45%

जैविक कचरे से खाद और बायोगैस का उत्पादन किया जाता है, जबकि अजैविक कचरे को पुनर्चक्रण (Recycling) या RDF (Refuse Derived Fuel) में बदला जाता है। RDF का उपयोग सीमेंट और कागज उद्योगों में ईंधन के रूप में किया जाता है।

शहर में घर-घर कचरा संग्रहण की दक्षता 96.53% तक पहुंच चुकी है, जबकि 70% से अधिक कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण किया जा रहा है। यह नागरिक सहभागिता और जागरूकता का बड़ा प्रमाण है।

पुराने (लीगेसी) कचरे का वैज्ञानिक निपटान

लखनऊ में पहले लगभग 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराना (लीगेसी) कचरा जमा था, जो वर्षों से पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा बना हुआ था। नगर निगम द्वारा चलाए गए विशेष अभियानों के तहत अब तक 12.86 लाख मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक निपटान किया जा चुका है।

इस प्रक्रिया में कचरे से उपयोगी सामग्री निकालकर उसका पर्यावरण-अनुकूल पुन: उपयोग किया गया, जिससे खुले में कचरा डालने की आवश्यकता लगभग समाप्त हो गई है।

कचरे से बने उपयोगी उत्पाद

वैज्ञानिक प्रसंस्करण के जरिए कचरे से कई उपयोगी उत्पाद तैयार किए गए हैं—

  • 2.27 लाख मीट्रिक टन RDF, जिसे देशभर के उद्योगों में सह-प्रसंस्करण के लिए भेजा गया

  • 4.38 लाख मीट्रिक टन मोटा कचरा

  • 0.59 लाख मीट्रिक टन बायो-सॉयल

  • 2.35 लाख मीट्रिक टन निर्माण एवं विध्वंस कचरा

इन सभी सामग्रियों का उपयोग निचले क्षेत्रों को भरने, सड़क निर्माण और अवसंरचना विकास जैसे कार्यों में किया जा रहा है।

कचरा प्रबंधन से भूमि की पुनर्प्राप्ति

लगातार किए जा रहे कचरा प्रसंस्करण से अब तक 25 एकड़ से अधिक भूमि पुनः प्राप्त की जा चुकी है। इस भूमि पर एक आधुनिक अपशिष्ट उपचार परिसर विकसित किया गया है, जिसमें—

  • विंडरो पैड

  • आंतरिक सड़कें

  • शेड

  • वेट ब्रिज

  • अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं

उपलब्ध हैं।

शिवरी में प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र

कचरे के बेहतर और टिकाऊ उपयोग के लिए लखनऊ नगर निगम शिवरी में 15 मेगावाट का वेस्ट-टू-एनर्जी (WtE) संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रहा है। यह संयंत्र प्रतिदिन 1,000 से 1,200 मीट्रिक टन RDF का उपयोग कर बिजली उत्पादन करेगा।

इससे RDF को लगभग 500 किलोमीटर दूर स्थित सीमेंट संयंत्रों तक ले जाने की लागत और समय दोनों में कमी आएगी, साथ ही शहर को स्वच्छ ऊर्जा भी प्राप्त होगी।

सतत शहरी विकास का आदर्श मॉडल

लखनऊ का यह अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा पर आधारित है, जहां कचरे को बोझ नहीं बल्कि संसाधन माना जाता है। डंपिंग में कमी, पुनर्चक्रण में वृद्धि और ऊर्जा उत्पादन के जरिए शहर पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य सुधार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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