माता-पिता की छत्रछाया से वंचित बच्चों के जीवन में संवेदना और सुरक्षा लाने के उद्देश्य से तमिलनाडु सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने 16 सितंबर 2025 को ‘अंबू करंगल’ (अर्थात प्यार के हाथ) योजना की शुरुआत की। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार ऐसे बच्चों को वित्तीय और शैक्षिक सहायता प्रदान करेगी, जिनके माता-पिता दोनों का निधन हो चुका है या जिनके एकमात्र अभिभावक उनकी देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं।
यह कदम न केवल राज्य के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को और मजबूत बनाता है, बल्कि तमिलनाडु की समावेशी और बाल-केंद्रित शासन व्यवस्था को भी दर्शाता है।
‘अंबू करंगल योजना’ का उद्देश्य
अनाथ या असहाय बच्चों का जीवन अक्सर शिक्षा और बुनियादी ज़रूरतों की कमी से प्रभावित होता है। माता-पिता की अनुपस्थिति बच्चों को मानसिक और आर्थिक दोनों ही स्तरों पर कमजोर बना देती है। इस पृष्ठभूमि में ‘अंबू करंगल’ योजना का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे बच्चे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें और उनके भविष्य की नींव मजबूत हो।
कौन होंगे लाभार्थी?
-
जिन बच्चों ने अपने दोनों माता-पिता खो दिए हैं।
-
जिन बच्चों का केवल एक अभिभावक जीवित है, लेकिन वह उनकी देखभाल करने में सक्षम नहीं है।
योजना की प्रमुख विशेषताएँ
-
मासिक वित्तीय सहायता – प्रत्येक पात्र बच्चे को ₹2,000 की सहायता दी जाएगी।
-
समय सीमा – यह सहायता तब तक जारी रहेगी जब तक बच्चा 18 वर्ष का नहीं हो जाता या उसने अपनी स्कूल शिक्षा पूरी नहीं कर ली हो, जो भी पहले हो।
-
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) – राशि सीधे बच्चों या उनके संरक्षकों के बैंक खाते में जमा की जाएगी।
-
प्रारंभिक चरण – पहले चरण में लगभग 6,082 बच्चों को इस योजना से लाभ मिलने की उम्मीद है।
-
कानूनी आधार – यह योजना किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 पर आधारित है, जो राज्यों को ऐसे बच्चों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
शिक्षा और डिजिटल युग में अतिरिक्त सहायता
तमिलनाडु सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि माता-पिता को खो चुके बच्चों की शिक्षा तकनीकी साधनों की कमी से प्रभावित न हो।
-
राज्य ने 1,340 विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरित किए हैं।
-
ये लैपटॉप उन छात्रों को दिए गए जिन्होंने 12वीं कक्षा पास की है और कॉलेज में प्रवेश लिया है।
-
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल युग में वे पीछे न छूटें और अपनी शैक्षिक यात्रा को सहजता से आगे बढ़ा सकें।
मोबाइल ऐप: पारदर्शिता और निगरानी का साधन
योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए सरकार ने तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी के सहयोग से एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन भी लॉन्च किया है।
ऐप की विशेषताएँ
-
ऑनलाइन आवेदन जमा करने की सुविधा।
-
शिकायत निवारण तंत्र।
-
लाभार्थियों और सहायता की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग।
-
डिजिटल रिकॉर्ड बनाने और ब्यूरोक्रेटिक देरी को कम करने की क्षमता।
यह कदम खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
योजना का सामाजिक महत्व
‘अंबू करंगल योजना’ केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु सरकार की मानव-केंद्रित नीतियों का प्रतीक है। इसके माध्यम से:
-
बच्चों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
-
समाज में समान अवसर सुनिश्चित होंगे।
-
शिक्षा और उच्च शिक्षा की राह आसान होगी।
-
सरकारी योजनाओं पर जनता का विश्वास और संतुष्टि बढ़ेगी।
स्थिर तथ्य (Static Facts – परीक्षा और सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी)
-
योजना का नाम: अंबू करंगल (प्यार के हाथ)
-
लॉन्च की तारीख: 16 सितंबर, 2025
-
लॉन्च करने वाले: मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, तमिलनाडु
-
मासिक सहायता: ₹2,000
-
लाभार्थी: अनाथ बच्चे या ऐसे बच्चे जिनके एकमात्र अभिभावक देखभाल करने में अक्षम हैं
-
पहले चरण के लाभार्थी: 6,082 बच्चे
-
विशेष पहल: 1,340 विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरण
-
डिजिटल साधन: मोबाइल ऐप – आवेदन, ट्रैकिंग और शिकायत निवारण हेतु

