2024 में कितने भारतीय विदेश में बस गए? कारण, आंकड़े और व्यापक विवरण
1. भारत का वैश्विक डायस्पोरा: बढ़ती प्रवास की कहानी
संयुक्त राष्ट्र की World Migration Report 2024 के अनुसार, 2024 तक भारत की प्रवासी आबादी विश्व में सबसे बड़ी बन चुकी है, जिसमें 18.5 मिलियन भारतीय विदेश में बसे हुए हैं — यानी 6% वैश्विक अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों में से भारतीय हैं India Today।
और यदि भारतीय मूल के सभी लोगों (NRIs + PIOs) को एक साथ देखें, तो यह आंकड़ा और भी बढ़कर 35 मिलियन से ऊपर पहुंच जाता है The Indian ExpressThe Times of India।
2. प्रवास क्यों बढ़ रहा है? प्रमुख कारण
(i) रोज़गार एवं आर्थिक अवसर
गुल्फ़ देशों, विशेषकर UAE, सऊदी अरब, कुवैत, क़तर जैसी अर्थव्यवस्थाओं में भारतियों के लिए रोज़गार के अवसरों की भरमार है। 2020–2025 के बीच लगभग 1.6 मिलियन भारतीय ECR श्रेणी में ये देश गए, जिनमें से सबसे अधिक संख्या सऊदी अरब में (695,000) थी The Times of India।
(ii) उच्च शिक्षा और पेशेवर दर्जा
साइकोनोमिक अवसर, गुणवत्ता शिक्षा और बेहतर जीवनशैली खोजते हुए, बहुत से युवा अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, UK जैसे देशों में जा रहे हैं।
अमेरिका में अब 5.4 मिलियन भारतीय रहते हैं The Times of India, वहीँ यूएई में भारतीय डायस्पोरा की संख्या लगभग 4 मिलियन है, जो देश की कुल जनसंख्या का करीब 35% बनाती है Wikipedia।
(iii) पारिवारिक और सामाजिक कारण
परिवारों का एक साथ जुड़ना, विवाह से जुड़ी पारिवारिक यात्राएँ और स्थायी निवास भी बड़े कारण हैं।
(iv) ‘ब्रेन ड्रेन’– बेहतर अवसर की तलाश
गुणवत्ता शिक्षा, अनुसंधान सुविधाएँ, और पेशेवर उन्नति की वजह से विशेषज्ञ और मिलेनियर्स भारत छोड़कर जा रहें हैं Wikipedia।
3. प्रवास की दिशा: शीर्ष गंतव्य देश
| गंतव्य देश | भारतीय प्रवासियों की संख्या (approx) |
|---|---|
| अमेरिका | 5.4 मिलियन The Times of India |
| UAE | 3.57 – 4 मिलियन WikipediaThe Times of India |
| कनाडा | 2.88 मिलियन The Times of India |
| मलेशिया | 2.91 मिलियन The Times of India |
| सऊदी अरब | 2.46 मिलियन The Times of India |
| UK | 1.86 मिलियन The Times of India |
| दक्षिण अफ्रीका | 1.7 मिलियन The Times of India |
| श्रीलंका | 1.61 मिलियन The Times of India |
इन गंतव्यों में सौदी अरब और GCC देश मसल्स और नीजी क्षेत्र में काम करने वाले ब्लू कॉलर श्रमिकों के लिए प्रमुख स्थान बने हुए हैं।
4. प्रवास पर प्रभाव: आर्थिक और सांस्कृतिक
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विदेश में बसे भारतीयों द्वारा भारत को भेजी गई रेमिटेंस वार्षिक 125 बिलियन डॉलर के पार पहुंच चुकी है — यह भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है Wikipedia।
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भारतीयों ने विदेशी देशों में शिक्षा, व्यापार, टेक्नोलॉजी और संस्कृति का महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
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कई देशों में भारतीय मूल के लोग राजनीति, व्यवसाय और समाज में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं ।
5. चुनौतियाँ और सरकारी पहल
भारत सरकार ने प्रवासियों को समर्थन देने के लिए eMigrate पोर्टल को अपडेट किया है, जिससे श्रमिकों को न्यूनतम शुल्क पर सुरक्षित मार्ग मिलने में मदद मिली है Wikipedia।
लेकिन इसके बावजूद कुछ चुनौतियाँ बनी हैं:
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अनधिकृत प्रवास और संस्थागत डिज़ाइन की कमी
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नए देशों में सामाजिक-आर्थिक समायोजन की जद्दोजहद
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पारिवारिक अलगाव और कुछ मामलों में जो लोग पूरी तरह से अंगीकार नहीं किए गए
6. निष्कर्ष
वर्ष 2024 तक 18.5 मिलियन भारतीय विदेश में प्रवासित हो चुके हैं, जो वैश्विक रूप से सबसे बड़ी प्रवासी समूह का हिस्सा बनाते हैं। अगर PIOs और NRIs को जोड़ा जाए तो संख्या 35 मिलियन से भी अधिक हो जाती है।
इस प्रवास के पीछे रोजगार, शिक्षा, बेहतर जीवनशैली और वैश्विक जुड़ाव की चाह जैसे कारण हैं। और यह प्रवास भारत की न सिर्फ ‘मजबूत इकॉनॉमिक स्टेटस’ को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर उसकी ‘सॉफ्ट पावर’ और सांस्कृतिक प्रभाव को भी बढ़ाता है।

