प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” ने 3 अक्टूबर 2025 को अपनी 11वीं वर्षगांठ पूरी की। इसका पहला प्रसारण 3 अक्टूबर 2014 को विजयदशमी के दिन हुआ था। एक दशक से भी अधिक समय में, यह कार्यक्रम केवल रेडियो प्रसारण नहीं रहा, बल्कि जन आकांक्षाओं, प्रेरक कहानियों और नागरिक–सरकार संवाद का जीवंत प्रतीक बन गया है।
शुरुआत और उद्देश्य
जब अक्टूबर 2014 में “मन की बात” की शुरुआत हुई, तो इसका उद्देश्य सीधा और स्पष्ट था — प्रधानमंत्री और जनता के बीच एक ऐसा संवाद स्थापित करना, जिसमें हर नागरिक अपनी भूमिका और जिम्मेदारी को महसूस कर सके।
शुरुआत में यह कार्यक्रम केवल ऑल इंडिया रेडियो (AIR) पर प्रसारित होता था। धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि दूरदर्शन नेशनल, डीडी न्यूज़ और अन्य टीवी चैनलों ने भी इसे प्रसारित करना शुरू कर दिया। आज यह केवल एक रेडियो या टीवी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है जिसने प्रधानमंत्री और नागरिकों के बीच संवाद की खाई को पाट दिया है।
कार्यक्रम अब हर महीने के अंतिम रविवार को प्रसारित होता है। सितंबर 2025 तक इसके 126 एपिसोड पूरे हो चुके हैं।
11 वर्षों की यात्रा: संवाद से सहभागिता तक
“मन की बात” ने 11 वर्षों की यात्रा में समाज के हर पहलू को छुआ है। यह कार्यक्रम सामाजिक सरोकारों से लेकर सांस्कृतिक धरोहर तक, पर्यावरण से लेकर स्वास्थ्य अभियानों तक और नागरिक जिम्मेदारियों से लेकर छोटे-छोटे बदलावों तक, हर उस विषय पर केंद्रित रहा है जो भारत की आत्मा को छूता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं कई बार कहा है कि “मन की बात के असली एंकर देश के नागरिक हैं”। वास्तव में, यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। यह कार्यक्रम आम नागरिकों की कहानियों, पहलों और प्रेरक योगदान को सामने लाता है और उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाता है।
विषय, प्रभाव और पहुँच
11 वर्षों के दौरान “मन की बात” ने न केवल प्रेरणादायक कहानियाँ साझा कीं, बल्कि कई राष्ट्रीय अभियानों और योजनाओं को जन आंदोलन का स्वरूप देने में भी मदद की।
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ
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अनसुने नायकों की कहानियाँ सामने लाना — जैसे पर्यावरण बचाने वाले किसान, शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने वाले शिक्षक, या स्वच्छता अभियान में जुटे युवा।
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जन-जागरूकता अभियानों को प्रोत्साहन देना — स्वच्छ भारत मिशन, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, जल संरक्षण और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों को जन-जन तक पहुँचाना।
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नागरिकों को राष्ट्र निर्माण में भागीदारी के लिए प्रेरित करना — यह कार्यक्रम हर नागरिक को बताता है कि उसका छोटा-सा योगदान भी भारत को बदलने की ताकत रखता है।
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संस्कृति और परंपरा का सम्मान — त्योहारों, परंपराओं और लोककला के महत्व को रेखांकित करना, ताकि समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहे।
सरकार की प्राथमिकताओं का मंच
“मन की बात” ने समय के साथ सरकार की प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट रूप से सामने रखा है। यह केवल एकतरफा संदेश नहीं, बल्कि जन-सहभागिता को जोड़ने वाला सेतु है।
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स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत को जन-जन तक पहुँचाने में यह कार्यक्रम बेहद प्रभावी साबित हुआ।
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COVID-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री ने इसी मंच से नागरिकों से सुरक्षा उपायों का पालन करने और “थाली बजाने” या “दीया जलाने” जैसे प्रतीकात्मक कार्यों के माध्यम से एकता दिखाने का आह्वान किया।
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स्टार्टअप इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल जैसे अभियानों को भी “मन की बात” से व्यापक जन समर्थन मिला।
मुख्य तथ्य
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| पहला प्रसारण | 3 अक्टूबर 2014 (विजयदशमी) |
| उद्देश्य | प्रधानमंत्री द्वारा नागरिकों से मासिक संवाद |
| प्रसारण माध्यम | ऑल इंडिया रेडियो, डीडी नेशनल, डीडी न्यूज़ |
| कुल एपिसोड (सितंबर 2025 तक) | 126 |
| कार्यक्रम की आवृत्ति | हर महीने के अंतिम रविवार को |
| प्रमुख विषय | समाज, संस्कृति, पर्यावरण, प्रेरक कहानियाँ |
| महत्व | नागरिक सहभागिता को सशक्त बनाना और राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन देना |
मन की बात का महत्व
“मन की बात” ने यह साबित किया है कि यदि सरकार नागरिकों से सीधे संवाद करे, तो न केवल योजनाएँ और नीतियाँ अधिक प्रभावी बनती हैं, बल्कि उनमें जनभागीदारी भी बढ़ती है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने नागरिकों को केवल दर्शक नहीं, बल्कि सहभागी बनाया है।
यह मंच ग्रामीण भारत से लेकर शहरी भारत तक, युवा से लेकर बुज़ुर्ग तक और महिला से लेकर किसान तक, हर वर्ग की कहानियों और आकांक्षाओं को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाता है।

