18 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। ₹4,38,317 करोड़ के विशाल परिव्यय वाला यह बजट आकार और प्राथमिकताओं—दोनों के लिहाज से महत्त्वपूर्ण है। मोहन यादव सरकार का लगातार तीसरा बजट महिलाओं के कल्याण, ग्रामीण विकास, युवा रोजगार और बुनियादी ढांचे को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। साथ ही 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ कुंभ के लिए ₹3,600 करोड़ का प्रावधान इस बजट की बड़ी घोषणाओं में शामिल है।
हालांकि, सत्र के दौरान विपक्ष ने बढ़ते राज्य ऋण पर चिंता जताई और वित्तीय अनुशासन को लेकर सवाल उठाए। सरकार का दावा है कि यह बजट विकास और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाता है तथा “विकसित भारत” के लक्ष्य के अनुरूप है।
“GYANII” मॉडल: प्राथमिकताओं का ढांचा
इस बजट को “GYANII” मॉडल—गरीब कल्याण, युवा शक्ति, अन्नदाता, नारी शक्ति, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री—के तहत तैयार किया गया है। इन छह स्तंभों पर लगभग ₹3 लाख करोड़ का आवंटन दर्शाता है कि सरकार सामाजिक सुरक्षा और पूंजीगत निवेश दोनों को साथ लेकर चलना चाहती है।
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गरीब कल्याण: लक्षित सब्सिडी, पोषण और सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ।
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युवा शक्ति: भर्ती, कौशल और शिक्षा पर जोर।
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अन्नदाता: कृषि लागत घटाने और उत्पादकता बढ़ाने की पहल।
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नारी शक्ति: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और बुनियादी सुविधाएँ।
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इंफ्रास्ट्रक्चर व इंडस्ट्री: सड़क, जल, ऊर्जा और औद्योगिक निवेश।
महिला सशक्तिकरण: बजट का केंद्र
महिलाओं के कल्याण के लिए ₹1,27,555 करोड़ का प्रावधान इस बजट की सबसे बड़ी विशेषताओं में है। सरकार ने 5,700 कार्यरत महिला छात्रावासों के निर्माण की घोषणा की है, जिससे कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षित आवास उपलब्ध होगा।
लाड़ली बहना योजना को निरंतर समर्थन
बजट 2026-27 में लाड़ली बहना योजना के लिए ₹23,883 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रति माह ₹1,500 की सहायता दी जा रही है। 2023 में शुरुआत के बाद से अब तक ₹52,304 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं।
इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को समर्थन जारी रहेगा। इन कदमों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सिंहस्थ कुंभ 2028: धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
उज्जैन में 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ के लिए ₹3,600 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा अवसर है।
सड़क चौड़ीकरण, स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन, पेयजल और शहरी सुविधाओं के उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे का विकास संभव होगा।
ग्रामीण विकास और रोजगार: समावेशी विस्तार
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को ₹40,062 करोड़ आवंटित किए गए हैं। ग्रामीण रोजगार योजना के लिए ₹10,428 करोड़ और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए पीएम जनमन योजना के तहत ₹900 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने 15,000 शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही कक्षा 8 तक के सरकारी स्कूलों में मुफ्त टेट्रा पैक दूध वितरण से पोषण स्तर सुधारने का लक्ष्य है।
कृषि क्षेत्र में 1 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे सिंचाई लागत घटेगी, डीजल पर निर्भरता कम होगी और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण—दोनों दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
बुनियादी ढांचा और जल आपूर्ति
सड़क मरम्मत और निर्माण के लिए ₹12,690 करोड़ तथा जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण जल आपूर्ति के लिए ₹4,454 करोड़ का प्रावधान किया गया है। श्रम विभाग को ₹1,335 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने स्पष्ट किया कि इस बजट में कोई नया कर नहीं लगाया जाएगा। यह निर्णय आम नागरिकों और व्यापार समुदाय के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
ऋण और वित्तीय अनुशासन पर बहस
विपक्ष ने बजट सत्र से पहले ₹5,600 करोड़ के अतिरिक्त ऋण लेने का आरोप लगाते हुए राज्य के बढ़ते कर्ज पर चिंता जताई। उनका तर्क है कि सामाजिक योजनाओं और बड़े पूंजीगत खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा।
सरकार का कहना है कि पूंजीगत निवेश से दीर्घकालिक राजस्व और रोजगार सृजन होगा, जिससे वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। आने वाले वर्षों में राजस्व वृद्धि और व्यय प्रबंधन इस बहस का निर्णायक पहलू बनेंगे।

