केरल ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से वैज्ञानिकों को चौंका दिया है। राज्य के पश्चिमी घाट क्षेत्र से शोधकर्ताओं ने लिरियोथेमिस केरलेंसिस (Liriothemis keralensis) नामक नई ड्रैगनफ्लाई प्रजाति का औपचारिक वर्णन किया है। यह खोज न केवल केरल की जैव विविधता की समृद्धता को दर्शाती है, बल्कि यह बागानों और मानव-परिवर्तित परिदृश्यों में संरक्षण संबंधी चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है। वैज्ञानिक साहित्य में इसे आधिकारिक रूप से दर्ज कर लिया गया है, जिससे भारत की स्थानिक (एंडेमिक) कीट प्रजातियों की सूची में एक और महत्वपूर्ण सदस्य जुड़ गया है।
लिरियोथेमिस केरलेंसिस: एक संक्षिप्त परिचय
Liriothemis keralensis ड्रैगनफ्लाई (व्याध पतंग) की एक नई पहचानी गई प्रजाति है, जो ओडोनाटा (Odonata) गण से संबंधित है। इसके नाम में “केरलेंसिस” शब्द इसके मूल स्थान, यानी केरल राज्य, को दर्शाता है। यह प्रजाति एंडेमिक मानी जाती है, अर्थात यह केवल इसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में पाई जाती है।
ड्रैगनफ्लाई को पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेतक माना जाता है। ये कीट मीठे पानी के आवास, जैसे तालाब, नहर और जंगल के जलकुंडों की गुणवत्ता का पता लगाने में मदद करते हैं। L. keralensis की खोज न केवल भारत की कीट विविधता में इजाफा करती है, बल्कि केरल की जैविक संपन्नता और पारिस्थितिक स्थिरता को भी उजागर करती है।
आवास और वितरण
यह नई प्रजाति केरल के एर्नाकुलम जिले के कोठामंगलम के पास वरापेट्टी क्षेत्र में पाई गई है। रोचक बात यह है कि यह ड्रैगनफ्लाई छायादार रबर और अनानास के बागानों जैसे मानव-परिवर्तित परिदृश्यों में भी जीवित रह सकती है।
वयस्क (एडल्ट) ड्रैगनफ्लाई केवल दक्षिण-पश्चिम मानसून (मई–अगस्त) के दौरान दिखाई देती है, जबकि वर्ष के शेष समय में यह मीठे पानी के आवासों में जलीय लार्वा (नर एवं मादा शिशु अवस्था) के रूप में रहती है। इसका मौसमी व्यवहार इसे लंबे समय तक वैज्ञानिकों की नज़र से छिपा हुआ रखता था।
शारीरिक और लैंगिक विशेषताएँ
Liriothemis keralensis में स्पष्ट लैंगिक द्विरूपता (Sexual Dimorphism) पाई जाती है। नर और मादा का रंग और शरीर का बनावट एक-दूसरे से अलग होता है:
नर (Males)
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चमकीला रक्त-लाल शरीर, जिस पर काले निशान
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पतला और लंबा उदर
मादा (Females)
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पीले रंग का शरीर, जिस पर काले चिह्न
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अपेक्षाकृत भारी और मजबूत बनावट
इस प्रजाति को इससे मिलती-जुलती प्रजाति Lyriothemis acigastra से अलग करने के लिए सूक्ष्म शारीरिक अंतर देखे गए। इनमें शामिल हैं:
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पतली उदर संरचना
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विशिष्ट आकार के गुदा उपांग (Anal appendages)
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अलग बनावट वाले जननांग
ये अंतर इसे स्वतंत्र और नई प्रजाति के रूप में मान्यता दिलाने में निर्णायक रहे।
खोज का महत्व
Liriothemis keralensis की खोज कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है:
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ओडोनेट विविधता में वृद्धि – यह पश्चिमी घाट में ड्रैगनफ्लाई की ज्ञात प्रजातियों की संख्या बढ़ाता है। पश्चिमी घाट विश्व के प्रमुख जैवविविधता हॉटस्पॉट्स में से एक है।
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मानव-परिवर्तित परिदृश्यों में जैवविविधता – बागानों में पाए जाने से पता चलता है कि मानव द्वारा परिवर्तित कृषि क्षेत्र भी दुर्लभ प्रजातियों के लिए आश्रय बन सकते हैं।
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संरक्षण संबंधी चिंता – इसकी अधिकांश आबादी संरक्षित वन क्षेत्रों के बाहर पाए जाने के कारण आवास परिवर्तन, कीटनाशकों का उपयोग और जल स्रोतों के प्रदूषण से खतरे में है।
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जैवविविधता दस्तावेज़ीकरण का महत्व – यह खोज स्पष्ट करती है कि कम ज्ञात कीट प्रजातियों के अध्ययन और संरक्षण की आवश्यकता है, जो दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
पश्चिमी घाट: जैव विविधता का केंद्र
पश्चिमी घाट को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है और इसे विश्व के आठ सबसे समृद्ध जैव-विविधता हॉटस्पॉट्स में शामिल किया गया है। यह क्षेत्र अनेक स्थानिक वनस्पतियों और जीवों, जैसे उभयचर, सरीसृप, पक्षी और कीटों का आवास है।
Liriothemis keralensis जैसी खोजें यह दिखाती हैं कि अपेक्षाकृत अधिक अध्ययन किए गए क्षेत्रों में भी अब भी छिपी हुई जैव-विविधता मौजूद है।
संरक्षण और भविष्य की दिशा
ड्रैगनफ्लाई जैसे कीट केवल सुंदर प्राणी नहीं हैं; ये पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेतक भी हैं। Liriothemis keralensis की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम:
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जल स्रोतों का संरक्षण – तालाब, नहर और जलकुंडों को प्रदूषण से बचाना।
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कृषि रसायनों का नियंत्रित उपयोग – रासायनिक कीटनाशकों से जलवायु और कीटों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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स्थानीय जागरूकता – ग्रामीण और शैक्षणिक संस्थानों में जैवविविधता के महत्व को बढ़ावा देना।
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अनुसंधान और निगरानी – प्रजाति के वितरण, जीवनचक्र और प्रजनन पर नियमित अध्ययन।
इस प्रजाति का संरक्षण केरल की जैविक विरासत और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
