नीति आयोग ने जारी की दूसरी वार्षिक ‘फिस्कल हेल्थ इंडेक्स’ रिपोर्ट

नीति आयोग ने जारी की दूसरी वार्षिक ‘फिस्कल हेल्थ इंडेक्स’ रिपोर्ट

भारत में राज्यों की वित्तीय स्थिति का आकलन करने के लिए नीति आयोग (NITI Aayog) ने Fiscal Health Index 2026 का दूसरा वार्षिक संस्करण जारी किया है। यह रिपोर्ट भारतीय राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन (Fiscal Performance) और वित्तीय स्थिरता का व्यापक मूल्यांकन प्रस्तुत करती है।

रिपोर्ट को नई दिल्ली में नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी और सीईओ निधि छिब्बर ने लॉन्च किया। Fiscal Health Index एक डेटा-आधारित ढांचा प्रदान करता है, जो यह विश्लेषण करता है कि विभिन्न राज्य अपनी वित्तीय व्यवस्था और सार्वजनिक संसाधनों का प्रबंधन कितनी प्रभावी ढंग से कर रहे हैं।

यह सूचकांक केवल राज्यों की वित्तीय मजबूती को मापता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कौन-से राज्य राजस्व प्रबंधन, व्यय नियंत्रण और ऋण प्रबंधन के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और किन राज्यों को सुधार की आवश्यकता है।


फिसकल हेल्थ इंडेक्स का उद्देश्य

Fiscal Health Index 2026 का मुख्य उद्देश्य भारत के राज्यों की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली का व्यापक और तुलनात्मक मूल्यांकन करना है। यह सूचकांक राज्यों की वित्तीय नीतियों की ताकत और कमजोरियों की पहचान करता है तथा बेहतर बजट योजना, राजस्व प्रबंधन और व्यय दक्षता को प्रोत्साहित करता है।

आज के समय में वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक वित्त पर दबाव बढ़ रहा है। बढ़ते कर्ज, आर्थिक अनिश्चितता और विकास संबंधी आवश्यकताओं के कारण सरकारों के सामने वित्तीय अनुशासन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में राज्यों में मजबूत राजकोषीय शासन (Fiscal Governance) बनाए रखना भारत की मैक्रो-आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।


फिसकल हेल्थ इंडेक्स 2026 का विस्तारित दायरा

Fiscal Health Index 2026 ने अपने पिछले संस्करण की तुलना में अधिक व्यापक दायरा अपनाया है।

पहले संस्करण में केवल 18 बड़े राज्यों का आकलन किया गया था। लेकिन नए संस्करण में 10 उत्तर-पूर्वी (North-Eastern) और हिमालयी राज्यों को भी शामिल किया गया है।

हालांकि निष्पक्ष तुलना सुनिश्चित करने के लिए इन राज्यों का मूल्यांकन और रैंकिंग बड़े राज्यों से अलग श्रेणी में की गई है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उत्तर-पूर्व और हिमालयी राज्यों की भौगोलिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियाँ बड़े राज्यों से काफी भिन्न होती हैं।


फिसकल हेल्थ इंडेक्स के पाँच प्रमुख स्तंभ

Fiscal Health Index राज्यों की वित्तीय स्थिति का आकलन पाँच प्रमुख स्तंभों के आधार पर करता है।

1. व्यय की गुणवत्ता (Quality of Expenditure)

यह संकेतक यह मापता है कि राज्य सरकारें सार्वजनिक धन का उपयोग कितनी दक्षता और प्रभावशीलता से करती हैं। इसमें विकासात्मक व्यय और सामाजिक क्षेत्रों में निवेश का भी मूल्यांकन किया जाता है।

2. राजस्व संकलन (Revenue Mobilisation)

यह राज्यों की कर संग्रहण क्षमता और अन्य राजस्व स्रोतों से आय जुटाने की क्षमता को मापता है।

3. राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Prudence)

इसमें यह देखा जाता है कि राज्य अपने राजकोषीय घाटे, खर्च और बजट प्रबंधन को कितनी जिम्मेदारी से संभालते हैं।

4. ऋण सूचकांक (Debt Index)

यह संकेतक राज्य सरकारों के कुल ऋण के स्तर और उसकी संरचना का मूल्यांकन करता है।

5. ऋण स्थिरता (Debt Sustainability)

यह मापता है कि राज्य सरकारें अपने कर्ज को दीर्घकाल में कितनी प्रभावी तरीके से प्रबंधित और चुकाने में सक्षम हैं।


प्रमुख राज्यों के लिए Fiscal Health Index 2026 की मुख्य बातें

Fiscal Health Index 2026 राज्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत करता है—

  • Achievers (उपलब्धि हासिल करने वाले राज्य)

  • Front-Runner (अग्रणी राज्य)

  • Performer (बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्य)

  • Aspirational (आकांक्षी राज्य)

इस वर्ष की रैंकिंग में ओडिशा शीर्ष प्रदर्शन करने वाला राज्य बनकर उभरा है। इसने पिछले वर्ष की तुलना में अपने वित्तीय प्रदर्शन में महत्वपूर्ण सुधार किया है।

गोवा और झारखंड भी Achiever श्रेणी में शामिल हैं, जो मजबूत राजकोषीय अनुशासन और बेहतर वित्तीय प्रबंधन का संकेत देता है।


फ्रंट-रनर और परफॉर्मर राज्य

Front-Runner श्रेणी में शामिल राज्य हैं—

  • गुजरात

  • महाराष्ट्र

  • छत्तीसगढ़

  • तेलंगाना

  • उत्तर प्रदेश

  • कर्नाटक

इन राज्यों का राजकोषीय प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर है, हालांकि उनका स्कोर Achiever राज्यों से थोड़ा कम है।

वहीं Performer श्रेणी में शामिल राज्य हैं—

  • मध्य प्रदेश

  • हरियाणा

  • बिहार

  • तमिलनाडु

  • राजस्थान

इन राज्यों की वित्तीय संरचना संतुलित है, लेकिन इन्हें मध्यम राजकोषीय घाटे और सीमित वित्तीय लचीलापन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।


राजकोषीय दबाव का सामना कर रहे Aspirational राज्य

Fiscal Health Index 2026 के अनुसार निम्नलिखित राज्य Aspirational श्रेणी में रखे गए हैं—

  • पश्चिम बंगाल

  • केरल

  • आंध्र प्रदेश

  • पंजाब

इन राज्यों को बढ़ते कर्ज और उच्च राजकोषीय घाटे जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्य चुनौतियाँ

  • राजकोषीय घाटा कई मामलों में FRBM सीमा से अधिक

  • कुल ऋण स्तर लगभग 35–45% GSDP

  • राजस्व प्राप्तियों का लगभग 50–60% अनिवार्य खर्चों में चला जाना

इन कारणों से इन राज्यों के लिए वित्तीय स्थिरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बन गया है।


उत्तर-पूर्व और हिमालयी राज्यों की रैंकिंग

उत्तर-पूर्व और हिमालयी राज्यों के समूह में अरुणाचल प्रदेश पहले स्थान पर रहा। इसके बाद उत्तराखंड और त्रिपुरा का स्थान रहा।

इन राज्यों ने व्यय की गुणवत्ता, राजस्व जुटाने और ऋण प्रबंधन जैसे संकेतकों पर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है।

Performer श्रेणी (NE और हिमालयी राज्य)

  • असम

  • मेघालय

  • मिजोरम

  • सिक्किम

  • त्रिपुरा

इन राज्यों का प्रदर्शन मध्यम स्तर का रहा और विभिन्न संकेतकों में मिश्रित परिणाम देखने को मिले।

Aspirational श्रेणी

  • हिमाचल प्रदेश

  • मणिपुर

  • नगालैंड

इन राज्यों को कमजोर राजस्व आधार और अधिक व्यय प्रतिबद्धताओं के कारण वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है।


भारत में राज्य वित्त का महत्व

भारत की वित्तीय व्यवस्था में राज्य सरकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, सामाजिक कल्याण और बुनियादी ढांचे जैसी अधिकांश सार्वजनिक सेवाएँ राज्यों के जिम्मे होती हैं।

राज्यों का वित्तीय प्रदर्शन सीधे तौर पर देश की समग्र आर्थिक स्थिरता और विकास को प्रभावित करता है। वर्तमान में भारत के कुल सरकारी ऋण का लगभग एक-तिहाई हिस्सा राज्य सरकारों के पास है।

इसी कारण राज्यों की मजबूत वित्तीय प्रबंधन क्षमता और संतुलित राजकोषीय नीतियाँ भारत में टिकाऊ सार्वजनिक वित्त और दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

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