NITI Aayog ने जारी किया ‘Trade Watch Quarterly’ का छठा संस्करण
NITI Aayog ने जारी किया ‘Trade Watch Quarterly’ का छठा संस्करण

NITI Aayog ने जारी किया ‘Trade Watch Quarterly’ का छठा संस्करण

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 की दूसरी तिमाही में भारत के कुल निर्यात (वस्तुएँ + सेवाएँ) में लगभग 8.5% की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि आयात की तुलना में तेज़ रही, जिससे देश का व्यापार विस्तार सकारात्मक बना रहा।

वैश्विक स्तर पर व्यापार वृद्धि की गति कुछ धीमी रही, लेकिन रुझान अब भी सकारात्मक रहा। खास बात यह रही कि सेवाओं का प्रदर्शन वस्तुओं से बेहतर रहा, जो भारत जैसे सेवा-प्रधान अर्थतंत्र के लिए उत्साहजनक संकेत है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि 2005 के बाद से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार लगभग चार गुना बढ़ चुका है, जो वैश्विक दक्षिण के साथ भारत के बढ़ते एकीकरण और सहयोग को दर्शाता है।


 थीमैटिक फोकस: इलेक्ट्रॉनिक्स बना निर्यात का नया सितारा

“Trade Watch Quarterly” के छठे संस्करण में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को भारत के निर्यात बास्केट का दूसरा सबसे बड़ा घटक बताया गया है। बीते एक दशक में इस क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।

प्रमुख आँकड़े जो कहानी बयां करते हैं:

  • 2015 से 2024 के बीच वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मांग में भारत की हिस्सेदारी 17.2% CAGR से बढ़ी

  • इसी अवधि में वैश्विक औसत वृद्धि दर केवल 4.4% रही

  • 2016 से 2024 के बीच भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग पाँच गुना बढ़कर 42.1 अरब डॉलर तक पहुँच गया

  • वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार का कुल आकार लगभग 4.6 ट्रिलियन डॉलर है

यह आँकड़े साफ़ संकेत देते हैं कि भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।


 भारत के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात गंतव्य

रिपोर्ट के अनुसार भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की सबसे अधिक मांग इन देशों में देखने को मिल रही है:

  • United States

  • United Kingdom

  • United Arab Emirates

इन बाज़ारों में भारत ने खासतौर पर मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार उपकरणों के क्षेत्र में मजबूत स्थिति बनाई है।


 नीतिगत समर्थन से मिल रही रफ्तार

सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को गति देने के लिए केंद्रीय बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना के तहत 40,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य है:

  • घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना

  • आयात पर निर्भरता कम करना

  • भारत में मूल्य संवर्धन को मजबूत करना

यह पहल “मेक इन इंडिया” के लक्ष्य को भी नई ऊर्जा देती है।


 भविष्य के हाई-ग्रोथ क्षेत्र

रिपोर्ट में कुछ ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है जहाँ भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकता है:

  • प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) डिजाइन

  • सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण

  • पावर इलेक्ट्रॉनिक्स

  • एम्बेडेड सिस्टम्स

ये क्षेत्र न केवल निर्यात बढ़ाएंगे, बल्कि उच्च कौशल वाले रोज़गार के अवसर भी पैदा करेंगे।


 ई-कॉमर्स: अगला बड़ा गेम चेंजर

भारत दुनिया के शीर्ष छह ई-कॉमर्स बाजारों में शामिल हो चुका है, जहाँ ऑनलाइन खुदरा व्यापार में इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी लगभग आधी है।

हालाँकि फिलहाल ई-कॉमर्स निर्यात सीमित हैं, लेकिन अनुमान है कि 2030 तक यह भारत के कुल वस्तु निर्यात में 20–30% तक योगदान दे सकते हैं। इसे गति मिलेगी:

  • लॉजिस्टिक्स सुधारों से

  • सरल नियामकीय प्रक्रियाओं से

  • एमएसएमई की बढ़ती भागीदारी से


 दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा के लिए क्या ज़रूरी?

रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि भारत की व्यापारिक सफलता केवल निर्यात बढ़ाने से नहीं आएगी, बल्कि इसके लिए कुछ संरचनात्मक सुधार बेहद अहम होंगे:

  • वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहरा एकीकरण

  • टैरिफ का तर्कसंगत ढाँचा

  • तेज़ और सस्ता लॉजिस्टिक्स नेटवर्क

  • उद्योग-अनुकूल कौशल विकास

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