नीतीश कुमार भारतीय राजनीति के उन गिने-चुने नेताओं में से हैं, जिन्होंने अपनी सादगी, प्रशासकीय क्षमता और जनहितकारी नीतियों के दम पर एक लंबा और प्रभावशाली राजनीतिक करियर बनाया है। बिहार की राजनीति हो या राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की राजनीति — नीतिश कुमार हमेशा एक महत्वपूर्ण और निर्णायक चेहरा रहे हैं। वर्ष 2025 तक वे बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।
प्रारंभिक जीवन और परिवार
नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के पटना जिले के बख्तियारपुर में हुआ था। उनके पिता, कविराज राम लखन सिंह, स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ एक आयुर्वेदिक वैद्य भी थे। उनकी माता का नाम परमेश्वरी देवी था। बचपन में परिवार और जानने वाले उन्हें प्यार से मुन्ना बुलाते थे।
उनका विवाह 22 फरवरी 1973 को मंजू कुमारी सिन्हा से हुआ। मंजू देवी के निधन के बाद भी नीतिश कुमार ने सार्वजनिक जीवन में पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने कार्य जारी रखे। उनके एक पुत्र हैं — निशांत कुमार।
शिक्षा और शुरुआती करियर
नीतीश कुमार की प्रारंभिक शिक्षा बख्तियारपुर के गणेश हाई स्कूल में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (अब NIT पटना) से 1972 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद वे बिहार स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में तकनीकी पद पर कार्यरत रहे, लेकिन उनका मन सरकारी नौकरी में नहीं लगा। धीरे-धीरे उनमें जनसेवा और राजनीतिक बदलाव का झुकाव बढ़ता गया।
जेपी आंदोलन से राजनीतिक यात्रा की शुरुआत
उनका राजनीतिक सफर देश के सबसे ऐतिहासिक आंदोलनों में से एक — जेपी आंदोलन (1974–77) — से शुरू हुआ। यह आंदोलन भ्रष्टाचार, दमनकारी नीतियों और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ था।
1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें MISA के तहत गिरफ्तार भी किया गया। यही समय था जब उन्होंने कई प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं के साथ काम करते हुए राजनीति में अपनी पहचान मजबूत की।
आपातकाल के बाद वे समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए। उनकी छवि एक साफ-सुथरे, ईमानदार और विकासवादी नेता की बनती चली गई।
1980–90 का दशक: उभरता हुआ नेतृत्व
1980 का दशक आते-आते नीतिश कुमार बिहार की राजनीति में तेज़ी से उभरने लगे थे।
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1985: हरनौत विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने।
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1987: युवा लोकदल के बिहार प्रदेश अध्यक्ष बने।
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1989: जनता दल के महासचिव चुने गए।
इन पदों ने उन्हें संगठन और प्रशासन — दोनों को समझने का मौका दिया और वे धीरे-धीरे राज्य की राजनीति में एक मजबूत स्तंभ बन गए।
मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल
नीतीश कुमार ने बिहार का नेतृत्व कई बार किया है। उनकी मुख्यमंत्री यात्रा बेहद दिलचस्प और उतार-चढ़ाव भरी रही।
पहला कार्यकाल (मार्च 2000)
मार्च 2000 में वे पहली बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत न होने के चलते उनका कार्यकाल सिर्फ 7 दिनों में समाप्त हो गया।
दूसरा कार्यकाल (2005–2010)
2005 के विधानसभा चुनावों के बाद उन्होंने दोबारा सत्ता संभाली। यह अवधि बिहार की सड़कों, कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों के लिए याद की जाती है।
तीसरा कार्यकाल (2010–2014)
इस कार्यकाल में बिहार विकास दर के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होने लगा।
चौथा से आठवां कार्यकाल (2015–2022)
2015 में उन्होंने महागठबंधन के साथ चौथा कार्यकाल शुरू किया, फिर राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने के बाद 2017 में पाँचवां और छठा कार्यकाल शुरू हुआ।
2020 में कोविड महामारी के बीच वे सातवीं बार और 2022 में आठवीं बार मुख्यमंत्री बने।
विभिन्न गठबंधनों के साथ काम करने की उनकी क्षमता उन्हें “किंगमेकर” और “संतुलित राजनीतिज्ञ” जैसी पहचान दिलाती है।
बिहार में विकास कार्य और प्रमुख उपलब्धियाँ
नीतीश कुमार की छवि विकास-उन्मुख नेता की रही है। उनके कार्यकाल में कई अहम पहलें हुईं, जिनका राज्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा। कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ:
1. सड़क और पुलों का व्यापक विस्तार
उनके नेतृत्व में ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में सड़कों का जाल बिछा। बिहार के दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिली।
2. शिक्षा क्षेत्र में सुधार
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1 लाख से अधिक स्कूल शिक्षकों की नियुक्ति
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स्कूल ड्रॉपआउट को कम करने के लिए नई योजनाएँ
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छात्रों के लिए साइकिल और पोशाक योजनाएँ
उनकी साइकिल योजना विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसने बिहार में लड़कियों की स्कूल उपस्थिति और महिला साक्षरता में बड़ा सुधार किया।
3. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
उन्होंने सुनिश्चित किया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर नियमित रूप से मौजूद रहें। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ।
4. कानून-व्यवस्था में सुधार
उन्होंने अपराध नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाए, जिससे बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति में ध्यान देने योग्य सुधार हुआ।
5. आर्थिक विकास
रोज़गार, बुनियादी ढाँचा और सामाजिक योजनाओं ने राज्य की औसत आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
रोचक तथ्य
नीतीश कुमार की सादगी, साधारण जीवनशैली और जनहितकारी नीतियों के कारण उन्हें “सुशासन बाबू” के नाम से भी जाना जाता है।
उनकी लड़कियों को फ्री साइकिल देने की योजना आज भी सामाजिक परिवर्तन का उदाहरण मानी जाती है।
आयु और संपत्ति
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जन्म: 1 मार्च 1951
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आयु (2025): 74 वर्ष
सालों से राजनीति में होने के बावजूद उनकी जीवनशैली बेहद सरल है।
कुल संपत्ति: लगभग ₹1.65 करोड़, जिसमें कुछ अचल संपत्ति और बचत शामिल है। उनके ऊपर कोई बड़ी देनदारी नहीं है।

