भारत में तेज़ी से हो रहे शहरीकरण, बढ़ती श्रम गतिशीलता और राज्यों के बीच मौसमी प्रवासन के चलते प्रवासन (Migration) आज नीति निर्माण का एक केंद्रीय विषय बन चुका है। इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने जुलाई 2026 से जून 2027 तक एक देशव्यापी प्रवासन सर्वेक्षण कराने की घोषणा की है। सरकार का उद्देश्य इस पहल के माध्यम से भारत में प्रवासन के पैटर्न पर अद्यतन, व्यापक और विश्वसनीय डेटा तैयार करना है, जो आने वाले वर्षों में शहरी योजना, रोजगार, आवास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े फैसलों को दिशा देगा।
यह सर्वेक्षण न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि वर्तमान मामलों और UPSC, राज्य लोक सेवा आयोग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक माना जा रहा है।
NSO प्रवासन सर्वेक्षण क्या है?
NSO द्वारा प्रस्तावित यह प्रवासन सर्वेक्षण भारत में जनसंख्या की गतिशीलता को समझने के लिए एक समर्पित पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य देशभर में लोगों के स्थान परिवर्तन के पैटर्न पर ताज़ा और विस्तृत जानकारी एकत्र करना है।
यह सर्वेक्षण निम्न पहलुओं को कवर करेगा—
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ग्रामीण से शहरी प्रवासन
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एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवासन
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मौसमी और चक्रीय प्रवासन
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लौटकर (Return) प्रवासन
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प्रवासन के पीछे के प्रमुख कारण, जैसे रोजगार, शिक्षा, विवाह या अन्य सामाजिक कारण
सामान्य श्रम सर्वेक्षणों के विपरीत, यह पहल केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रवासन के सामाजिक, आर्थिक और आजीविका से जुड़े सभी आयामों को समग्र रूप से प्रस्तुत करेगी।
सर्वेक्षण के मुख्य फोकस क्षेत्र
इस देशव्यापी सर्वेक्षण के तहत NSO विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान देगा, जिन्हें अब तक कम रिपोर्ट किया गया है या जिन पर बिखरा हुआ डेटा उपलब्ध है।
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प्रवासन की मात्रा और प्रकार: कौन प्रवास करता है, कहाँ जाता है और किस उद्देश्य से जाता है।
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प्रवासी श्रमिकों की रोजगार प्रोफ़ाइल: यह समझना कि प्रवासन और नौकरी के अवसर किस तरह आपस में जुड़े हैं।
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अस्थायी और मौसमी प्रवासन: निर्माण, कृषि, ईंट-भट्ठों और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों का आवागमन।
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शहरी दबाव और ग्रामीण पलायन: शहरों पर बढ़ते जनसंख्या दबाव और ग्रामीण क्षेत्रों से हो रहे पलायन की प्रवृत्तियाँ।
इन सभी पहलुओं से भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
नीति निर्माण के लिए प्रवासन डेटा क्यों है अहम?
सरकार के अनुसार, इस सर्वेक्षण से प्राप्त डेटा प्रमाण-आधारित (Evidence-based) नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।
सटीक प्रवासन आंकड़ों के अभाव में शहरी बुनियादी ढांचे, आवास और परिवहन जैसी योजनाओं में अक्सर अनुमान के आधार पर फैसले लेने पड़ते हैं।
NSO का यह सर्वे—
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शहरी नियोजन और स्मार्ट सिटी योजनाओं को बेहतर बनाने
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किफायती आवास और सार्वजनिक परिवहन की मांग का आकलन करने
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रोजगार सृजन और कौशल विकास कार्यक्रमों को लक्षित बनाने
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प्रवासी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुंच बढ़ाने
में नीति-निर्माताओं की सहायता करेगा। जैसे-जैसे श्रम गतिशीलता बढ़ रही है, वैसे-वैसे सटीक प्रवासन डेटा क्षेत्रीय विकास और संतुलित वृद्धि के लिए अनिवार्य होता जा रहा है।
पहले किए गए सर्वेक्षण और उपलब्ध डेटा
भारत में प्रवासन से संबंधित डेटा पहले भी कुछ सर्वेक्षणों के माध्यम से सामने आया है। नवीनतम आंकड़े पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2020–21 और मल्टीपल इंडिकेटर सर्वे 2020–21 से प्राप्त हुए थे।
PLFS 2020–21 के अनुसार—
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भारत में कुल प्रवासन दर 28.9% थी
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यह आंकड़ा देश में आंतरिक प्रवासन की व्यापकता को दर्शाता है
हालांकि, ये आंकड़े महामारी-पूर्व या महामारी के शुरुआती दौर के हैं। कोविड-19 के बाद बदली आर्थिक परिस्थितियों, रिवर्स माइग्रेशन और नए रोजगार रुझानों को देखते हुए अब इन्हें अपडेट करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
भारत में प्रवासन में लिंग आधारित अंतर
पहले के सर्वेक्षणों से प्रवासन में स्पष्ट लिंग अंतर सामने आया है।
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पुरुषों में प्रवासन दर लगभग 10.7% रही
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महिलाओं में यह दर 47.9% तक दर्ज की गई
महिलाओं के प्रवासन का प्रमुख कारण विवाह रहा, जो कुल महिला प्रवासन का लगभग 86.8% हिस्सा बनता है।
वहीं पुरुषों में रोजगार और बेहतर नौकरी के अवसर मुख्य प्रेरक कारक रहे, जिनकी हिस्सेदारी करीब 22.8% थी।
आगामी NSO सर्वेक्षण से यह आकलन करने की उम्मीद है कि—
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क्या महिलाओं के प्रवासन के कारणों में बदलाव आया है?
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क्या शिक्षा और रोजगार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी प्रवासन पैटर्न को बदल रही है?
प्रतियोगी परीक्षाओं और वर्तमान मामलों के लिए प्रासंगिकता
NSO का यह देशव्यापी प्रवासन सर्वेक्षण UPSC, SSC, राज्य PSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रवासन, शहरीकरण, श्रम बाजार और सामाजिक न्याय जैसे विषय सामान्य अध्ययन, निबंध और साक्षात्कार—तीनों स्तरों पर पूछे जाते हैं।
साथ ही, यह सर्वेक्षण भारत की जनसांख्यिकीय और आर्थिक चुनौतियों को समझने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है।

