केरल का सबसे प्रसिद्ध और प्रतीकात्मक उत्सव, ओणम, 2025 में त्रिपुनितुरा में अपने भव्य और रंगीन अंदाज़ में शुरू हुआ। इस अवसर की शुरुआत पारंपरिक आटचमायम शोभायात्रा के साथ हुई, जो राज्य के 10-दिवसीय फसल पर्व की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। सुबह की चमकदार धूप और जीवंत प्रस्तुतियों के बीच, हजारों स्थानीय लोग और पर्यटक इस उत्सव का आनंद लेने के लिए सड़कों पर एकत्रित हुए। ओणम 2025 ने परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम पेश करते हुए यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक विरासत और समकालीन रुझान हाथ में हाथ डालकर उत्सव को और भी जीवंत बना सकते हैं।
आटचमायम 2025: भव्यता और सांस्कृतिक धरोहर
त्रिपुनितुरा, जो कभी कोच्चि साम्राज्य की शाही राजधानी रही थी, आटचमायम के आयोजन का केंद्र रहा है। यह शोभायात्रा हमेशा से केरल की सांस्कृतिक एकता और शाही परंपराओं का प्रतीक रही है। 2025 का संस्करण विशेष रहा क्योंकि इस बार उद्घाटन कार्यक्रम सुहावने मौसम में हुआ, जिससे आयोजकों और दर्शकों दोनों के लिए अनुभव और भी यादगार बन गया।
शोभायात्रा के दौरान सड़कों के दोनों किनारों पर लगी भीड़ ने लोक परंपराओं, शास्त्रीय कलाओं और सामाजिक संदेशों के रंगारंग संगम का आनंद लिया। कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, संगीत और रंगमंच के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शोभायात्रा की खास झलकियां
60 फीट का पुष्प-सौंदर्य
वडकुन्नाथन मंदिर के पास थेक्किन्कड मैदान में लगाया गया 60 फीट लंबा विशाल आटापूक्कलम (फूलों से सजा सजावटी स्तंभ) इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। इसे “सायहना सौहृद कूटाय्मा” नामक टीम ने लगभग 1,500 किलो फूलों से सजाया। इस भव्य फूलों की सजावट ने ओणम की कला और परंपरा को नए अंदाज़ में पेश किया।
विविधता और रंगों की झांकी
शोभायात्रा में शामिल कलाकारों ने महाबली और वामन के वेशभूषा धारण की और उत्सव की भव्यता को और भी बढ़ाया। इसमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
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59 पारंपरिक कला रूप, जैसे थेय्यम, कुम्माट्टी, कथकली, कोलकली, मार्गमकली, पुलिकली और मार्शल आर्ट कलरिपयट्टु।
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50 से अधिक सांस्कृतिक दल, जिनमें छात्र और स्थानीय कलाकार पौराणिक पात्रों, पशुओं और राजनीतिक व्यंग्यकारों के रूप में सजे थे।
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19 विषयगत झांकियां, जिनमें नशा मुक्ति जैसे सामाजिक मुद्दों पर जोर दिया गया, जिससे उत्सव की प्रासंगिकता बढ़ी और युवाओं को संदेश भी मिला।
परंपरा और आधुनिक लोकप्रिय संस्कृति का संगम
ओणम केवल पारंपरिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा। इस बार शोभायात्रा में भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय पात्रों की झलकियां भी शामिल थीं। कलाकारों ने एम्पुरान और पुष्पा जैसे किरदारों का अभिनय किया। इसके अलावा सुपरस्टार्स रजनीकांत, कमल हासन और कलाभवन मणि के रूपांकन ने दर्शकों को खूब मनोरंजन दिया। इस तरह, शोभायात्रा ने परंपरा और पॉप संस्कृति के बीच एक सुंदर पुल का काम किया।
युवा दर्शक और पर्यटक इन झांकियों और प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध हो गए। सोशल मीडिया पर उत्सव की तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए, जिससे ओणम 2025 की भव्यता देश-विदेश में फैली।
लोक परंपराओं का संगम
ओणम के दौरान न केवल नृत्य और संगीत का प्रदर्शन हुआ, बल्कि लोक कथाओं, परंपराओं और सामाजिक संदेशों को भी बड़ी खूबसूरती से पेश किया गया। कलाकारों ने न केवल मनोरंजन किया बल्कि यह संदेश भी दिया कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और युवाओं में जागरूकता जरूरी है।
निष्कर्ष
त्रिपुनितुरा में ओणम 2025 की भव्य आटचमायम शोभायात्रा ने दर्शकों को एक यादगार अनुभव दिया। यह न केवल केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक थी, बल्कि आधुनिक रुझानों और युवा ऊर्जा के संगम का भी संदेश दे रही थी। परंपरा और आधुनिकता के इस मिलन ने ओणम को और भी जीवंत, रंगीन और प्रेरणादायक बना दिया।
ओणम 2025 ने यह साबित कर दिया कि यह उत्सव केवल एक फसल पर्व नहीं, बल्कि केरल की सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक धरोहर और सामाजिक जागरूकता का प्रतीक है।