संसद ने पारित किया खनिज एवं खनिज (संशोधन) विधेयक, 2025 – महत्वपूर्ण खनिज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा
संसद ने पारित किया खनिज एवं खनिज (संशोधन) विधेयक, 2025 – महत्वपूर्ण खनिज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा

संसद ने पारित किया खनिज एवं खनिज (संशोधन) विधेयक, 2025 – महत्वपूर्ण खनिज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा

भारत की संसद ने 19 अगस्त 2025 को खनिज एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2025 पारित कर दिया है। यह विधेयक 1957 के एमएमडीआर अधिनियम में बड़े बदलाव लाता है और भारत के खनिज क्षेत्र को नई दिशा देने वाला साबित होगा। विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की उपलब्धता, खोज की आधुनिक तकनीकें, सतत खनन और संसाधनों के कुशल प्रबंधन के लिए इसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

आज जब लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ जैसे खनिजों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है, यह संशोधन भारत को न केवल आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगा, बल्कि देश को वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।


विधेयक के प्रमुख संशोधन और प्रावधान

1. राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट का विस्तार

अब तक का राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (National Mineral Exploration Trust) केवल भारत में अन्वेषण गतिविधियों तक सीमित था। संशोधन के बाद इसका नाम बदलकर राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास ट्रस्ट कर दिया गया है।

  • यह ट्रस्ट अब विदेशी परियोजनाओं को भी समर्थन देगा।

  • इसकी वित्तीय क्षमता बढ़ाने के लिए रॉयल्टी योगदान को 2% से बढ़ाकर 3% कर दिया गया है।
    यह कदम न केवल घरेलू खनिज खोज को बढ़ावा देगा बल्कि भारत की वैश्विक खनिज साझेदारियों को भी मजबूत करेगा।

2. गहन-स्थित खनिजों हेतु पट्टे में लचीलापन

पहले पट्टा धारक अपने क्षेत्र को बढ़ाने में सीमित थे। अब नए संशोधन के तहत:

  • साधारण पट्टों में क्षेत्र को 10% तक बढ़ाया जा सकता है।

  • समग्र लाइसेंस धारकों को 30% तक विस्तार की अनुमति होगी।
    यह विशेष रूप से गहरे भू-स्तरों में पाए जाने वाले खनिजों—जैसे लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ—की खोज और उत्पादन को आसान बनाएगा।

3. कैप्टिव खनन का उदारीकरण

पहले कैप्टिव खनन (Captive Mining) के तहत उत्पादित खनिज का केवल 50% तक ही बिक्री की अनुमति थी। लेकिन अब:

  • यह सीमा पूरी तरह हटा दी गई है।

  • खनन पट्टा धारक अपनी आवश्यकता पूरी करने के बाद शेष खनिज खुले बाजार में स्वतंत्र रूप से बेच सकते हैं

  • इसके लिए केवल नाममात्र का अतिरिक्त शुल्क सरकार को देना होगा।
    यह बदलाव खनिज बाजार को प्रतिस्पर्धी और निवेशकों के लिए आकर्षक बनाएगा।

4. खनिज विनिमय मंचों की स्थापना

खनिजों के व्यापार में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए:

  • औपचारिक खनिज विनिमय (Mineral Exchanges) को अधिकृत किया गया है।

  • ये मंच खनिजों की सही कीमत तय करने और निवेशकों का विश्वास मजबूत करने में मदद करेंगे।
    यह प्रावधान खनिज क्षेत्र में एक तरह से ‘स्टॉक एक्सचेंज’ जैसा वातावरण बनाएगा।

5. सतत खनन और सामरिक संसाधन सुरक्षा

नए संशोधन में पर्यावरणीय पहलुओं को भी प्राथमिकता दी गई है।

  • शून्य-अपशिष्ट खनन (Zero-Waste Mining) को बढ़ावा मिलेगा।

  • जिम्मेदार खनन के जरिए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

  • यह बदलाव भारत के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के अनुरूप है और विद्युत वाहन, रक्षा उद्योग और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सामरिक क्षेत्रों को सुरक्षित खनिज आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।


व्यापक उद्देश्य और संभावित प्रभाव

भारत लंबे समय से महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आयात पर निर्भर रहा है। उदाहरण के लिए, लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरियों के लिए आवश्यक हैं, लेकिन इनका घरेलू उत्पादन बेहद सीमित है। ऐसे में यह विधेयक कई स्तरों पर सकारात्मक बदलाव लाने वाला है।

1. आयात निर्भरता में कमी

नई नीतियां घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करेंगी और भारत को खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएंगी।

2. निजी निवेश और विदेशी सहयोग

कैप्टिव खनन का उदारीकरण और खनिज विनिमय जैसे प्रावधान निजी कंपनियों और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करेंगे।

3. सामरिक क्षेत्रों को बढ़ावा

विद्युत वाहन निर्माण, रक्षा उद्योग और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को आवश्यक खनिजों की स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

4. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका

खनिज विनिमय और अन्वेषण क्षमता के विस्तार से भारत वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति मजबूत करेगा।

5. सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन

शून्य-अपशिष्ट खनन और जिम्मेदार खनन न केवल संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित करेंगे, बल्कि पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी पूरा करेंगे।


निष्कर्ष

खनिज एवं खनिज (संशोधन) विधेयक, 2025 केवल एक कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि भारत की आर्थिक और सामरिक सुरक्षा के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति है। इस विधेयक से भारत को महत्वपूर्ण खनिजों की स्थिर आपूर्ति मिलेगी, आयात पर निर्भरता घटेगी, और घरेलू व विदेशी निवेशकों के लिए खनिज क्षेत्र अधिक आकर्षक बनेगा।

लिथियम और रेयर अर्थ जैसे संसाधनों की बढ़ती मांग के बीच यह संशोधन भारत को वैश्विक खनिज मानचित्र पर एक सशक्त खिलाड़ी के रूप में उभारने की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम है।


 यह लेख आपके ब्लॉग पाठकों को खनिज क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक बदलाव की पूरी तस्वीर स्पष्ट और सरल भाषा में पेश करेगा।

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