पीआईबी ने अरुणाचल प्रदेश में कमला हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी,
पीआईबी ने अरुणाचल प्रदेश में कमला हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी,

पीआईबी ने अरुणाचल प्रदेश में कमला हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी,

भारत तेज़ी से स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसी क्रम में अरुणाचल प्रदेश की कमला जलविद्युत परियोजना एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनकर उभरी है। हाल ही में सार्वजनिक निवेश बोर्ड (PIB) द्वारा स्वीकृत यह मेगा जलविद्युत परियोजना न केवल बड़े पैमाने पर हरित बिजली उत्पादन में सहायक होगी, बल्कि बाढ़ नियंत्रण, रोज़गार सृजन और भारत के 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत की अपार जलविद्युत क्षमता के सुनियोजित उपयोग का एक उदाहरण है, जो विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में उठाया गया ठोस कदम माना जा रहा है।


परियोजना का स्थान और संक्षिप्त परिचय

कमला जलविद्युत परियोजना, जिसे पहले सुबनसिरी मिडिल जलविद्युत परियोजना के नाम से जाना जाता था, अरुणाचल प्रदेश की कमला नदी पर स्थित है। यह परियोजना राज्य के कामले, क्रा दादी और कुरुंग कुमे जिलों में विकसित की जा रही है।

यह एक भंडारण आधारित (Storage-based) जलविद्युत परियोजना है, जिसमें बिजली उत्पादन के साथ-साथ बाढ़ शमन (Flood Moderation) की एकीकृत व्यवस्था भी शामिल है। अनुमान है कि परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 6,870 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा, जिससे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड को उल्लेखनीय मजबूती मिलेगी।


तकनीकी विशेषताएँ और निर्माण योजना

कमला जलविद्युत परियोजना की तकनीकी संरचना इसे देश की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल करती है। इसके तहत—

  • 216 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रैविटी बाँध

  • एक अत्याधुनिक भूमिगत पावरहाउस

  • और बड़े पैमाने की जल-भंडारण प्रणाली

का निर्माण किया जाएगा।

परियोजना को 96 महीनों (लगभग 8 वर्ष) में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी भंडारण क्षमता नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने में सहायक होगी, जिससे विशेष रूप से ब्रह्मपुत्र घाटी के निचले क्षेत्रों को हर वर्ष आने वाली विनाशकारी बाढ़ से राहत मिल सकेगी। यह पहल पूर्वोत्तर भारत की एक दीर्घकालिक समस्या के समाधान की दिशा में अहम मानी जा रही है।


निवेश, वित्तीय संरचना और भागीदारी

कमला जलविद्युत परियोजना को BOOT (Build–Own–Operate–Transfer) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। इसमें—

  • NHPC की 74% इक्विटी हिस्सेदारी

  • और अरुणाचल प्रदेश सरकार की 26% हिस्सेदारी

होगी।

वित्तीय विवरण:

  • कुल अनुमानित लागत: ₹26,070 करोड़

  • ऋण–इक्विटी अनुपात: 70:30

  • केंद्र सरकार की सहायता:

    • ₹1,340 करोड़ – अवसंरचना विकास के लिए

    • ₹4,744 करोड़ – बाढ़ शमन के लिए

  • राज्य सरकार: GST की प्रतिपूर्ति करेगी

  • स्तरीकृत (Levelised) टैरिफ: लगभग ₹5.97 प्रति यूनिट

यह वित्तीय ढांचा परियोजना को आर्थिक रूप से व्यवहार्य और दीर्घकालिक बनाता है।


रोज़गार सृजन और क्षेत्रीय विकास

कमला जलविद्युत परियोजना का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव भी व्यापक होगा। निर्माण चरण के दौरान—

  • लगभग 300 प्रत्यक्ष रोज़गार

  • और करीब 2,500 संविदा आधारित रोज़गार

सृजित होने की संभावना है।

इसके अतिरिक्त, परियोजना से—

  • दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, संचार और आधारभूत ढाँचे का विकास

  • स्थानीय व्यवसायों और सेवाओं को बढ़ावा

  • और पूर्वोत्तर भारत में विद्युत ग्रिड की स्थिरता

जैसे लाभ भी मिलेंगे। यह परियोजना क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।


भारत के नवीकरणीय और जलवायु लक्ष्यों में योगदान

परियोजना के पूर्ण होने के बाद कमला जलविद्युत परियोजना—

  • स्वच्छ और कार्बन-मुक्त बिजली का उत्पादन करेगी

  • जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करेगी

  • और भारत के 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देगी

जलविद्युत ऊर्जा को बेस-लोड पावर के रूप में देखा जाता है, जो सौर और पवन ऊर्जा के साथ मिलकर भारत के ऊर्जा मिश्रण (Energy Mix) को संतुलित बनाती है।


पर्यावरण और बाढ़ प्रबंधन का संतुलन

हालाँकि बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट्स को लेकर पर्यावरणीय चिंताएँ रहती हैं, लेकिन सरकार का दावा है कि कमला परियोजना में—

  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA)

  • जैव विविधता संरक्षण उपाय

  • और स्थानीय समुदायों के हित

को प्राथमिकता दी जाएगी। बाढ़ नियंत्रण की एकीकृत व्यवस्था इस परियोजना को केवल ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन उपकरण भी बनाती है।


परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य (Key Facts for Exams)

  • परियोजना: कमला जलविद्युत परियोजना (पूर्व नाम: सुबनसिरी मिडिल)

  • स्थापित क्षमता: 1,720 मेगावाट

  • प्रकार: भंडारण आधारित जलविद्युत परियोजना (बाढ़ नियंत्रण सहित)

  • स्थान: कामले, क्रा दादी और कुरुंग कुमे जिले, अरुणाचल प्रदेश

  • इक्विटी हिस्सेदारी: NHPC – 74%, अरुणाचल प्रदेश सरकार – 26%

  • अनुमानित लागत: ₹26,070 करोड़

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