प्रधानमंत्री मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ में ₹10,601 करोड़ की लागत से बने उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ में ₹10,601 करोड़ की लागत से बने उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ में ₹10,601 करोड़ की लागत से बने उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन किया

अमोनिया–यूरिया फर्टिलाइज़र प्लांट का शिलान्यास किया। यह महत्वाकांक्षी परियोजना Assam Valley Fertilizer and Chemical Company Limited (AVFCCL) के तहत विकसित की जा रही है और इसके पूर्ण रूप से चालू होने पर हर वर्ष 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होगा। सरकार के अनुसार, यह पहल उर्वरकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती देने के साथ-साथ किसानों के कल्याण और पूर्वोत्तर भारत के औद्योगिक विकास को नई गति देगी।

परियोजना का राष्ट्रीय महत्व

शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि कृषि भारत की रीढ़ है और उर्वरकों की समय पर, सस्ती तथा स्थिर आपूर्ति किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाती है। नामरूप परियोजना से न केवल घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि आयात पर निर्भरता घटाकर विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। इससे खाद की उपलब्धता में स्थिरता आएगी और कीमतों पर दबाव कम होगा—जो सीधे तौर पर किसानों के हित में है।

परियोजना विवरण

यह परियोजना ब्राउनफील्ड विस्तार के रूप में मौजूदा परिसर में विकसित की जा रही है, जिससे भूमि उपयोग और बुनियादी ढांचे की लागत में दक्षता आएगी।

  • निवेश: ₹10,601 करोड़

  • वार्षिक उत्पादन क्षमता: 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया

  • स्थान: नामरूप, डिब्रूगढ़ ज़िला, Assam

  • अपेक्षित कमीशनिंग: 2030 तक

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति: मार्च 2025

  • AVFCCL का गठन: जुलाई 2025

इन समय-सीमाओं के साथ सरकार का लक्ष्य परियोजना को चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से पूरा करना है, ताकि क्षेत्र को शीघ्र लाभ मिल सके।

संयुक्त उपक्रम (JV) की संरचना

AVFCCL एक मल्टी-PSU संयुक्त उपक्रम है, जिसमें केंद्र और राज्य की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ भागीदार हैं:

  • Government of Assam

  • Oil India Limited

  • National Fertilizers Limited

  • Hindustan Urvarak & Rasayan Limited (HURL)

  • Brahmaputra Valley Fertilizer Corporation Limited (BVFCL)

यह साझेदारी परियोजना की वित्तीय मजबूती, तकनीकी दक्षता और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करती है। विविध विशेषज्ञता के कारण उत्पादन, आपूर्ति-श्रृंखला और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में बेहतर परिणाम की उम्मीद है।

नामरूप उर्वरक परिसर का ऐतिहासिक महत्व

नामरूप दशकों से उर्वरक उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ स्थित BVFCL पूर्वोत्तर भारत की सबसे पुरानी उर्वरक इकाइयों में से एक है। समय के साथ बढ़ती मांग और पुरानी अवसंरचना के कारण आधुनिक, उच्च-क्षमता वाले संयंत्र की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। नई परियोजना इसी आवश्यकता का समाधान है—जो उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय मानकों और ऊर्जा दक्षता पर भी जोर देगी।

किसानों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को लाभ

इस परियोजना के पूरा होने से किसानों को यूरिया की निर्बाध आपूर्ति मिलेगी, जिससे बुआई और फसल चक्र में बाधाएँ कम होंगी। आयात पर निर्भरता घटने से आपूर्ति-श्रृंखला अधिक विश्वसनीय बनेगी। साथ ही, निर्माण और संचालन चरणों में स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा। परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों को भी लाभ होने की संभावना है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को साकार करना है। नामरूप परियोजना इस रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ है—जहाँ घरेलू उत्पादन, आधुनिक तकनीक और सार्वजनिक-निजी समन्वय के जरिए मांग-आपूर्ति संतुलन को मजबूत किया जाएगा। इससे किसानों की लागत घटेगी और कृषि उत्पादकता बढ़ेगी।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply