पीएम मोदी ने ‘ज्ञान भारतम पोर्टल’ लॉन्च किया: पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण की ऐतिहासिक पहल
पीएम मोदी ने ‘ज्ञान भारतम पोर्टल’ लॉन्च किया: पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण की ऐतिहासिक पहल

पीएम मोदी ने ‘ज्ञान भारतम पोर्टल’ लॉन्च किया: पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण की ऐतिहासिक पहल

भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं को संरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 सितम्बर 2025 को ‘ज्ञान भारतम पोर्टल’ का शुभारंभ किया। यह एक विशेष डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जिसका उद्देश्य देशभर में बिखरी हुई पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण, संरक्षण और सार्वजनिक उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इस पोर्टल का उद्घाटन नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ज्ञान भारतम के दौरान हुआ। इस अवसर ने भारत सरकार की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जिसमें सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर को आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुनः प्राप्त करने और भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का लक्ष्य रखा गया है।


ज्ञान भारतम पोर्टल: विशेषताएँ और उद्देश्य

भारत को विश्व की सबसे बड़ी पांडुलिपि धरोहर का स्वामी माना जाता है। लाखों पांडुलिपियाँ वेद, उपनिषद, दर्शन, आयुर्वेद, गणित, खगोलशास्त्र, साहित्य और शासन से जुड़े अनमोल ज्ञान को संजोए हुए हैं। लेकिन समय, जलवायु और संरक्षण की कमी के कारण इनमें से कई धरोहरें नष्ट होने के कगार पर हैं। ऐसे में ज्ञान भारतम पोर्टल समय की मांग के अनुरूप समाधान प्रदान करता है।

प्रमुख उद्देश्य और विशेषताएँ:

  • डिजिटलीकरण एवं संरक्षण: देशभर की पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेज़ीकरण और उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल प्रारूप में संरक्षित करना।

  • राष्ट्रीय डिजिटल भंडार: एक केंद्रीकृत डिजिटल लाइब्रेरी, जो शोधार्थियों, विद्वानों और आम जनता के लिए सुलभ होगी।

  • एआई-सक्षम पहुँच: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित खोज, अनुवाद और टीकाकरण की सुविधा, जिससे दुर्लभ लिपियों और भाषाओं को समझना आसान होगा।

  • अनुसंधान एवं प्रकाशन: प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन, अनुवाद और वैश्विक स्तर पर प्रकाशन को बढ़ावा।

  • क्षमता निर्माण: संरक्षण तकनीकों में शोधकर्ताओं, संरक्षकों और संस्थानों को प्रशिक्षण।

  • जन सहभागिता: लोगों को पांडुलिपि धरोहर संरक्षण से जोड़ना और जागरूक बनाना।

  • वैश्विक सहयोग: विदेशी संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ साझेदारी, जिससे ज्ञान आदान-प्रदान और तकनीकी सहयोग संभव हो।


अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘ज्ञान भारतम’

इस पोर्टल का शुभारंभ जिस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हुआ, वह भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

  • आयोजन अवधि: 11 से 13 सितम्बर 2025

  • थीम: “पांडुलिपि धरोहर के माध्यम से भारत की ज्ञान परंपरा की पुनः प्राप्ति”

  • प्रतिभागी: 1,100 से अधिक विद्वान, विशेषज्ञ, संस्थान और सांस्कृतिक साधक

  • विशेष आकर्षण: सम्मेलन में एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें दुर्लभ पांडुलिपियों का प्रदर्शन किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

यह सम्मेलन न केवल भारत की पांडुलिपि धरोहर को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करता है, बल्कि शोधकर्ताओं और नीतिनिर्माताओं को इस दिशा में ठोस रणनीति बनाने का अवसर भी देता है।


भारत की पांडुलिपि धरोहर का महत्व

भारत में लगभग 50 लाख से अधिक पांडुलिपियाँ विभिन्न भाषाओं और लिपियों में उपलब्ध हैं। इनमें संस्कृत, पाली, प्राकृत, तमिल, तेलुगु, अरबी, फारसी और उर्दू जैसी भाषाएँ शामिल हैं। देवनागरी, ग्रंथ, बंगला, शारदा और मोडी जैसी लिपियों में लिखी गई ये पांडुलिपियाँ भारत की विविधता और ज्ञान परंपरा का प्रमाण हैं।

इन ग्रंथों में न केवल धार्मिक या दार्शनिक विचार हैं, बल्कि चिकित्सा विज्ञान, खगोलशास्त्र, गणित, वास्तुकला, पर्यावरण और समाजशास्त्र जैसे विषयों पर भी अमूल्य जानकारी दर्ज है। यह धरोहर न केवल भारतीय संस्कृति के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है।


क्यों है यह पहल अहम?

पिछले कई दशकों से विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे थे कि यदि पांडुलिपियों का शीघ्र संरक्षण नहीं हुआ तो यह अमूल्य धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक नहीं पहुँच पाएगी।

  • संरक्षण का संकट: कागज, ताड़पत्र और भोजपत्र पर लिखी पांडुलिपियाँ समय और पर्यावरण के प्रभाव से धीरे-धीरे नष्ट हो रही हैं।

  • भाषाई बाधा: पुरानी लिपियों और भाषाओं को समझना मुश्किल है, जिससे शोध कार्य सीमित रह जाता है।

  • सार्वजनिक पहुँच की कमी: आम जनता और युवाओं तक यह ज्ञान नहीं पहुँच पाता।

‘ज्ञान भारतम पोर्टल’ इन सभी समस्याओं का समाधान है। यह पहल पांडुलिपियों को न केवल सुरक्षित करेगी, बल्कि उन्हें जन-जन तक पहुँचाने का भी माध्यम बनेगी।


प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि

लॉन्चिंग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पोर्टल “भारत की प्राचीन आत्मा और आधुनिक तकनीक का संगम है।” उन्होंने इसे “डिजिटल तक्षशिला” की संज्ञा दी और बताया कि पांडुलिपियाँ केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता और पहचान हैं।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस पोर्टल का उपयोग कर प्राचीन ज्ञान को आधुनिक संदर्भों में समझें और शोध के नए आयाम खोलें।


नई शिक्षा नीति और विकसित भारत 2047 से जुड़ाव

‘ज्ञान भारतम पोर्टल’ को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) से भी जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाना है। यह पहल विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण से भी मेल खाती है, जिसमें सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्र की प्रगति का आधार बनाया गया है।


विज़न और आगे की राह

सरकार का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में कम से कम 10 लाख पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करना है। इसके अलावा:

  • एआई आधारित अनुवाद और लिप्यंतरण टूल्स विकसित किए जाएंगे।

  • वैश्विक विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से साझेदारी बढ़ाई जाएगी।

  • पांडुलिपियों को स्कूल-कॉलेज के पाठ्यक्रम और जन-शिक्षा अभियानों से जोड़ा जाएगा।

इस तरह यह पोर्टल केवल संरक्षण का साधन नहीं रहेगा, बल्कि अतीत और भविष्य के बीच ज्ञान का सेतु बनेगा।


महत्वपूर्ण तथ्य (परीक्षा हेतु)

  • कार्यक्रम: ज्ञान भारतम पोर्टल लॉन्च

  • लॉन्च करने वाले: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

  • तिथि: 12 सितम्बर 2025

  • स्थान: विज्ञान भवन, नई दिल्ली

  • आयोजक: संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार

  • सम्मेलन थीम: “पांडुलिपि धरोहर

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