प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु तेग बहादुर की विरासत को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सम्मान में विशेष स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु तेग बहादुर की विरासत को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सम्मान में विशेष स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु तेग बहादुर की विरासत को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सम्मान में विशेष स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया

भारत के इतिहास और आध्यात्मिक विरासत में अमिट स्थान रखने वाले श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगांठ पर राष्ट्र ने एक स्वर में उन्हें नमन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक स्मारक डाक टिकट, विशेष सिक्का और कॉफ़ी-टेबल बुक जारी कर गुरुतेग बहादुर जी के अतुलनीय बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धांजलि दी। यह आयोजन हरियाणा के ऐतिहासिक और पवित्र स्थल ज्योतिसर, कुरुक्षेत्र में आयोजित किया गया, जहाँ प्रधानमंत्री का दौरा आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को और प्रबल कर गया।

ज्योतिसर—जहाँ अध्यात्म और इतिहास का संगम होता है

कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर को महाभारत और गीता ज्ञान की जन्मभूमि माना जाता है। इसी पवित्र स्थल पर आयोजित यह भव्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति का साक्षी बना। हरियाणा सरकार द्वारा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में आयोजित इस समारोह में देशभर से श्रद्धालु पहुँचे।

हालाँकि यह राज्य स्तरीय कार्यक्रम था, लेकिन इसकी गूंज राष्ट्रीय स्तर पर महसूस की गई क्योंकि गुरु तेग बहादुर का बलिदान केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना का प्रतीक है। मुगल काल में धार्मिक उत्पीड़न के विरुद्ध खड़े होकर गुरु तेग बहादुर ने दुनिया को सहिष्णुता, साहस और धार्मिक स्वतंत्रता का संदेश दिया, जिससे उन्हें “हिंद दी चादर” की उपाधि मिली।

350 छात्रों द्वारा गुरबानी — अंतरधार्मिक एकता का अनोखा उदाहरण

कार्यक्रम का सबसे प्रेरक और हृदयस्पर्शी दृश्य था पटियाला से आए 350 छात्रों द्वारा किया गया गुरबानी पाठ। इन छात्रों में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों के बच्चे शामिल थे। यह दृश्य गुरु तेग बहादुर के संदेश—धर्म की रक्षा, भाईचारा और सर्वधर्म समानता—को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रहा था।
गुरबानी के इस सामूहिक पाठ ने वातावरण को आध्यात्मिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर ऊर्जा से भर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन — गुरुतेग बहादुर को नमन

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु तेग बहादुर को “हिंद दी चादर” कहकर उनके अद्वितीय साहस और बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि गुरु जी ने धर्म परिवर्तन के दबाव को स्वीकार नहीं किया और सत्य की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
मोदी ने गुरु के निष्ठावान शिष्य भाई जैता (भाई जीवण सिंह) को भी विशेष रूप से स्मरण किया, जिन्होंने गुरु का शीश साहसपूर्वक आनंदपुर साहिब तक पहुँचाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बलिदान और भक्ति का ऐसा उदाहरण है जो सदियों तक प्रेरणा देता रहेगा।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने सिख विरासत को सम्मान देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा की गई पहलों का भी उल्लेख किया, जैसे—

  • करतारपुर साहिब कॉरिडोर,

  • हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना,

  • विरासत-ए-खालसा संग्रहालय का विस्तार,

  • और विभिन्न प्रकाश गुरुपर्व आयोजनों का भव्यता से संपादन।

पंचजन्य स्मारक का उद्घाटन — महाभारत की विरासत को नई पहचान

ज्योतिसर दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने महाभारत एक्सपीरियंस सेंटर में बने पंचजन्य स्मारक का भी उद्घाटन किया। स्मारक की कुछ प्रमुख विशेषताएँ थीं—

  • भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य शंख पंचजन्य का स्वर्णिम प्रतिरूप,

  • भगवद्गीता के प्रमुख श्लोकों की अंकित प्रस्तुति,

  • और गीता ज्ञान के विभिन्न प्रसंगों की कलात्मक व्याख्या।

यह स्मारक आधुनिक तकनीक और आध्यात्मिक परंपरा का सम्मिश्रण है, जो आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।

ब्रह्मसरोवर में महाआरती और गीता महोत्सव 2025

प्रधानमंत्री मोदी ने इसके बाद ब्रह्मसरोवर में आयोजित महाआरती में भाग लिया। यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 का हिस्सा था।
प्रधानमंत्री ने विद्वानों से भी संवाद किया, महाभारत-थीम आधारित दीर्घाओं को देखा और आधुनिक तकनीक से विकसित प्रदर्शनी क्षेत्रों का अवलोकन किया। यह पूरा कार्यक्रम भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण था।

गुरु तेग बहादुर का बलिदान — आज भी उतना ही प्रासंगिक

गुरु तेग बहादुर का बलिदान केवल ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता की प्रतीकात्मक घोषणा है। उन्होंने अपनी शहादत से यह संदेश दिया कि किसी भी व्यक्ति को अपनी इच्छा के विरुद्ध धर्म अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
यह विचार आज भी लोकतंत्र, मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता की नींव को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जारी स्मारक टिकट, सिक्का और पुस्तक इसी विरासत के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक हैं।

परीक्षा-उन्मुख प्रमुख तथ्य — एक नज़र में

बिंदु विवरण
अवसर गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहीदी वर्षगांठ
स्थान ज्योतिसर, कुरुक्षेत्र, हरियाणा
आयोजक हरियाणा सरकार (CM नायब सिंह सैनी)
PM द्वारा जारी स्मारक डाक टिकट, विशेष सिक्का, कॉफ़ी-टेबल बुक
गुरु जी की उपाधि “हिंद दी चादर”
महत्वपूर्ण व्यक्तित्व भाई जैता (भाई जीवण सिंह)
केंद्र सरकार की पहलें करतारपुर कॉरिडोर, हेमकुंड साहिब रोपवे, विरासत-ए-खालसा
अन्य कार्यक्रम पंचजन्य स्मारक उद्घाटन, ब्रह्मसरोवर महाआरती, अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025

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