प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 49वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की: विकास की नई दिशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 49वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की: विकास की नई दिशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 49वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की: विकास की नई दिशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 सितंबर 2025 को PRAGATI (Pro-Active Governance And Timely Implementation) की 49वीं बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक देश की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति और समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। PRAGATI एक आईसीटी-आधारित बहु-आयामी प्लेटफॉर्म है, जिसे सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा विकसित किया गया है। यह पहल केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद को बढ़ावा देती है, जिससे देश के विकास कार्यों में तेजी आती है।


PRAGATI: एक अभिनव डिजिटल पहल

PRAGATI का उद्देश्य देश के प्रमुख विकास परियोजनाओं की वास्तविक समय में निगरानी करना और किसी भी बाधा को तुरंत सुलझाना है। यह प्लेटफॉर्म केंद्र सरकार और राज्यों के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित करता है, जिससे नौकरशाही देरी और विभागीय मतभेद समाप्त होते हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के इस डिजिटल मंच से यह सुनिश्चित किया जाता है कि महत्वपूर्ण परियोजनाएं समय पर पूरी हों और नागरिकों तक उनके लाभ पहुंचें।


49वीं बैठक की मुख्य विशेषताएं और समीक्षा

प्रधानमंत्री मोदी ने इस सत्र में कुल आठ बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की, जिनमें लगभग ₹65,000 करोड़ का निवेश शामिल है। ये परियोजनाएं देश के 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित हो रही हैं और खनन, रेलवे, जल संसाधन, औद्योगिक गलियारों तथा ऊर्जा क्षेत्रों को कवर करती हैं।

परियोजनाओं का अवलोकन

  • खनन परियोजनाएं: संसाधन दक्षता और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक सुधार।

  • रेलवे अवसंरचना: बेहतर परिवहन और लॉजिस्टिक्स के लिए ट्रैक अपग्रेडेशन, नए मार्ग और आधुनिक तकनीकों का समावेश।

  • जल संसाधन परियोजनाएं: सिंचाई प्रणालियों का विकास और शहरी जल आपूर्ति में सुधार।

  • औद्योगिक गलियारे: निर्माण गतिविधियों और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार।

  • ऊर्जा क्षेत्र: ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नवीकरणीय और पारंपरिक ऊर्जा परियोजनाओं का कार्यान्वयन।

समीक्षा के मुख्य बिंदु

  • समय पर क्रियान्वयन: सभी परियोजनाओं के लिए स्पष्ट मील के पत्थर निर्धारित करना और उनके पालन की कड़ाई से निगरानी।

  • समन्वित दृष्टिकोण: केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग सुनिश्चित करना।

  • अड़चनों का त्वरित समाधान: भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण स्वीकृति, वित्तीय बाधाओं और अन्य नियामक चुनौतियों का शीघ्र निराकरण।

  • परिणाम-केंद्रित शासन: नौकरशाही प्रक्रिया से हटकर परिणामों पर आधारित कार्यान्वयन को बढ़ावा देना।


विकास की दिशा में PRAGATI की भूमिका

PRAGATI पहल ने भारत में शासन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाया है। इस पहल ने कई तरह के लाभ सुनिश्चित किए हैं:

  • अवसंरचना के विकास में तेजी: रेलवे, ऊर्जा, खनन और औद्योगिक गलियारों जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य हुए हैं, जो रोजगार सृजन और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

  • केंद्र-राज्य सहयोग को मजबूती: PRAGATI मॉडल ने सहयोगात्मक संघवाद (Collaborative Federalism) की एक नई मिसाल पेश की है, जहां निर्णय निर्माताओं के बीच वास्तविक समय संवाद संभव हो पाया है।

  • नागरिक-केंद्रित शासन: समय पर परियोजनाओं के पूरा होने से नागरिकों को बेहतर परिवहन, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, स्वच्छ जल और अन्य सुविधाएं तेजी से उपलब्ध हो रही हैं।

  • नवाचार और डिजिटल शासन: डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शासन की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है, जिससे कार्यों का निष्पादन तेज और कुशल हुआ है।


PRAGATI के महत्व और भविष्य की दिशा

PRAGATI की 49वीं बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि तेज और प्रभावी कार्यान्वयन से ही देश के विकास लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने सभी अधिकारियों और अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाओं को दूर करने के लिए पूरी तत्परता और जिम्मेदारी से कार्य करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि PRAGATI जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजनाओं के पूरा होने का सीधा लाभ देश के आम नागरिकों को मिलता है, इसलिए इनके सफल समापन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


PRAGATI की स्थापना और कामकाज

PRAGATI को 25 मार्च 2015 को लॉन्च किया गया था। यह एक आईसीटी-आधारित बहु-आयामी प्लेटफॉर्म है, जिसे विशेष रूप से सक्रिय शासन और समयबद्ध परियोजना कार्यान्वयन के लिए तैयार किया गया है। यह प्रधानमंत्री कार्यालय के नेतृत्व में संचालित है और इसके जरिए पीएम सीधे राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विभागीय प्रमुखों के साथ संवाद कर सकते हैं।

यह मंच वास्तविक समय में परियोजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन करता है और तुरंत ही यदि कोई अड़चन आती है तो उसके निवारण के लिए संबंधित अधिकारियों को सूचित करता है। इस तरह यह नौकरशाही देरी और अन्य बाधाओं को कम करता है।

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