प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’, जिसे वर्ष 2014 में लॉन्च किया गया था, अब केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सरकार के लिए एक राजस्व सृजन करने वाला प्रभावशाली प्लेटफॉर्म भी बन चुका है। केंद्र सरकार ने 8 अगस्त 2025 को राज्यसभा को सूचित किया कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम ने अपनी शुरुआत से अब तक कुल ₹34.13 करोड़ की कमाई की है। यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन द्वारा प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम की उत्पत्ति और निर्माण
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पहला प्रसारण: 3 अक्टूबर 2014
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निर्माण संस्था: आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो)
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निर्माण लागत: कोई अतिरिक्त खर्च नहीं, इन-हाउस संसाधनों का उपयोग
‘मन की बात’ को प्रधानमंत्री और आम नागरिकों के बीच एक सीधे संवाद के सेतु के रूप में तैयार किया गया था। यह कार्यक्रम उन प्रेरक कहानियों, सामाजिक पहलों और राष्ट्रीय विकास के मुद्दों को सामने लाता है, जिनका सीधा संबंध आम भारतीयों के जीवन से होता है।
34.13 करोड़ रुपये की आय: यह कैसे संभव हुआ?
एल. मुरुगन ने राज्यसभा को बताया कि इस कार्यक्रम की कमाई का प्रमुख स्रोत विज्ञापन, प्रसारण अधिकार और सिंडिकेशन रहा है। हालांकि सरकार ने इसके निर्माण पर कोई अतिरिक्त राशि खर्च नहीं की, लेकिन इसकी व्यापक पहुँच और लोकप्रियता ने इसे व्यावसायिक रूप से भी सफल बना दिया है।
यह आंकड़ा दिखाता है कि कैसे एक सरकारी कार्यक्रम भी सामाजिक संवाद और आर्थिक मूल्य दोनों सृजित कर सकता है।
मल्टी-प्लेटफॉर्म प्रसारण: पहुँच का विस्तार
‘मन की बात’ को केवल रेडियो तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे देश-विदेश में मौजूद श्रोताओं तक पहुँचाने के लिए विभिन्न तकनीकी माध्यमों का सहारा लिया गया।
प्रमुख प्रसारण माध्यम:
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आकाशवाणी (All India Radio)
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राष्ट्रीय और क्षेत्रीय भाषाओं में सीधा प्रसारण
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260 से अधिक रेडियो चैनलों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पहुँच
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दूरदर्शन (Doordarshan)
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DD National और अन्य क्षेत्रीय चैनलों पर टेलीविजन प्रसारण
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दृश्य प्रारूप में कार्यक्रम की प्रस्तुति
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डीडी फ्री डिश और निजी चैनल
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92 से अधिक निजी टीवी चैनल
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48 आकाशवाणी चैनल
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डीडी फ्री डिश के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में भी गहरी पैठ
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डिजिटल और ओटीटी माध्यम
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WAVES OTT और NewsOnAIR ऐप
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लाइव और रिकॉर्डेड दोनों प्रारूप में उपलब्ध
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एंड्रॉइड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म्स पर उपयोग
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सोशल मीडिया
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YouTube (PMO India, AIR चैनल)
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Facebook, Instagram, और X (पूर्व में Twitter)
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PB Shabd (प्रसार भारती की डिजिटल न्यूज़ फीड सेवा)
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डिजिटल युग में संवाद की नई परिभाषा
‘मन की बात’ केवल एक पारंपरिक रेडियो कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक डिजिटल-फ्रेंडली, बहु-प्लेटफॉर्म संवाद मॉडल बन गया है।
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लाइव-स्ट्रीमिंग और ऑडियो-वीडियो संग्रहण के कारण यह कार्यक्रम कभी भी, कहीं भी देखा-सुना जा सकता है।
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सामाजिक मीडिया के माध्यम से जनसामान्य की सहभागिता को बढ़ावा मिलता है।
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सरकार की योजनाओं और अभियानों का प्रचार व्यक्तिगत अनुभवों और कहानियों के माध्यम से किया जाता है, जिससे संदेश अधिक प्रभावशाली बनता है।
सरकार का दृष्टिकोण: ‘मन की बात’ एक सामुदायिक संवाद मंच
एल. मुरुगन ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम अब केवल एक मासिक रेडियो शो नहीं, बल्कि एक सामुदायिक-आधारित संवाद मंच बन गया है। यह मंच:
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राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सामूहिक चिंतन को प्रेरित करता है।
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सामाजिक अभियानों जैसे स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, Vocal for Local जैसे अभियानों को जनभागीदारी के साथ जोड़ता है।
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नवाचार, ग्रामीण विकास, युवा नेतृत्व, और परंपराओं को राष्ट्रीय विमर्श में लाने का कार्य करता है।
‘मन की बात’ क्यों है इतना प्रभावशाली?
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जन-जन की भाषा में संवाद: प्रधानमंत्री कठिन विषयों को भी सरल भाषा में समझाते हैं।
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सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को सम्मान: क्षेत्रीय कहानियाँ, स्थानीय नायक और grassroots इनोवेशन को मुख्यधारा में लाना।
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प्रेरणादायक विषय-वस्तु: श्रोताओं में सकारात्मकता और राष्ट्रभक्ति का संचार।
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जनसहभागिता: लाखों लोग हर माह सुझाव भेजते हैं, जिनमें से कुछ को कार्यक्रम में स्थान मिलता है।
निष्कर्ष: संवाद का यह मॉडल एक आदर्श बन चुका है
‘मन की बात’ न केवल प्रधानमंत्री मोदी की सीधी जन-संवाद शैली को दर्शाता है, बल्कि यह सरकारी संचार, डिजिटल पहुंच और आर्थिक लाभ का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है। ₹34.13 करोड़ की आय यह साबित करती है कि सार्थक और व्यवस्थित संवाद सामाजिक बदलाव के साथ-साथ राजस्व भी उत्पन्न कर सकता है।
भविष्य में यह मॉडल अन्य मंत्रालयों और संस्थाओं के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बन सकता है, जहाँ संवाद, सेवा और स्थायित्व को एक साथ साधा जाए।

