भारतीय सिनेमा के गौरवशाली इतिहास में एक और अध्याय जुड़ गया जब 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन 23 सितंबर 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुआ। इस भव्य अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वर्ष 2023 की फिल्मों के विजेताओं को सम्मानित किया। समारोह ने न केवल भारतीय फिल्म जगत की उत्कृष्ट उपलब्धियों का जश्न मनाया, बल्कि दिग्गज कलाकारों और नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को एक ही मंच पर एकत्र कर दिया।
इस समारोह का सबसे यादगार क्षण तब आया जब मलयालम सुपरस्टार मोहलाल को भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पूरे हॉल ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट से उनका अभिनंदन किया, जो भारतीय सिनेमा में उनके चार दशकों से अधिक के योगदान का प्रतीक था।
प्रमुख विजेता और विशेष आकर्षण
श्रेष्ठ फीचर फिल्म – 12th फेल
विधु विनोद चोपड़ा द्वारा निर्देशित “12th फेल” को श्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला। यह फिल्म आईएएस अधिकारी मनोज कुमार शर्मा के संघर्षों और दृढ़ संकल्प की सच्ची कहानी पर आधारित है। विक्रांत मैसी के बेहतरीन अभिनय और फिल्म की यथार्थवादी प्रस्तुति ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों को गहराई से प्रभावित किया।
श्रेष्ठ अभिनेता – शाहरुख़ खान और विक्रांत मैसी
इस बार श्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान संयुक्त रूप से दो कलाकारों को मिला—
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शाहरुख़ खान को उनकी फिल्म “जवान” में दोहरी भूमिका और सामाजिक मुद्दों से जुड़े दमदार एक्शन-ड्रामा के लिए।
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विक्रांत मैसी को “12th फेल” में उनके भावनात्मक और संवेदनशील अभिनय के लिए।
दोनों का चयन इस बात का प्रमाण है कि बॉलीवुड में बड़े सितारे और नई प्रतिभाएँ समान रूप से सशक्त कहानियों को जीवंत कर सकती हैं।
श्रेष्ठ अभिनेत्री – रानी मुखर्जी
अनुभवी अभिनेत्री रानी मुखर्जी को “मिसेज़ चैटर्जी वर्सेस नॉर्वे” में उनके दमदार अभिनय के लिए श्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। फिल्म में एक माँ की संवेदनशील कहानी है जो नॉर्वे में अन्यायपूर्ण अभिरक्षा मामले से जूझती है। रानी की गहन भावनात्मक प्रस्तुति ने दर्शकों के दिलों को छू लिया।
श्रेष्ठ हिंदी फिल्म – कटहल: ए जैकफ्रूट मिस्ट्री
सामाजिक व्यंग्य और हल्के-फुल्के अंदाज़ में गढ़ी गई “कटहल – ए जैकफ्रूट मिस्ट्री” को श्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला। सान्या मल्होत्रा अभिनीत यह फिल्म बताती है कि कैसे सिनेमा में अब पारंपरिक बड़े बजट की कहानियों से परे नई और प्रयोगात्मक कहानियों को भी पहचान मिल रही है।
तकनीकी और रचनात्मक पुरस्कार
भारतीय फिल्मों की ताकत केवल कहानी और अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी कौशल भी इसका अहम हिस्सा है। इस बार कई तकनीकी श्रेणियों में शानदार फिल्मों और कलाकारों को सम्मानित किया गया—
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श्रेष्ठ एक्शन निर्देशन – हनुमान
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श्रेष्ठ नृत्य निर्देशन – वैभवी मर्चेंट (रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)
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श्रेष्ठ गीत (लिरिक्स) – कसरला श्याम (ऊरु पललेटुरु – बलगम)
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श्रेष्ठ मेकअप – श्रीकांत देसाई (सैम बहादुर)
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श्रेष्ठ वेशभूषा (कॉस्ट्यूम डिज़ाइन) – सचिन, दिव्या, निधि (सैम बहादुर)
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श्रेष्ठ छायांकन (सिनेमैटोग्राफी) – प्रसंथा मोहापात्र (द केरला स्टोरी)
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श्रेष्ठ संपादन – मिधुन मुरली (पूक्कालम)
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श्रेष्ठ संवाद – दीपक किंगरानी (सिर्फ एक बंधा काफी है)
ये पुरस्कार इस बात को दर्शाते हैं कि भारतीय फिल्म उद्योग तकनीकी दृष्टि से भी विश्वस्तर पर अपनी पहचान बना रहा है।
क्षेत्रीय फिल्मों की उपलब्धियाँ
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को भी समान मंच पर सम्मान मिलता है।
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श्रेष्ठ तेलुगु फिल्म – भगवंत केशरी
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श्रेष्ठ तमिल फिल्म – पार्किंग
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श्रेष्ठ मलयालम फिल्म – उल्लोझुक्कु
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श्रेष्ठ मराठी फिल्म – श्यामची आई
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श्रेष्ठ पंजाबी फिल्म – गॉड्डे गॉड्डे चा
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श्रेष्ठ गुजराती फिल्म – वश
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श्रेष्ठ असमिया फिल्म – रोंगतापु 1982
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श्रेष्ठ कन्नड़ फिल्म – कंदीलु
इन फिल्मों ने क्षेत्रीय समाज, संस्कृति और लोककथाओं को उजागर किया, जिससे भारतीय सिनेमा की विविधता और समृद्धि का शानदार प्रदर्शन हुआ।
गैर-फीचर फिल्म वर्ग
गैर-फीचर फिल्मों में भी इस बार कई उत्कृष्ट कृतियों को सम्मान मिला, जिन्होंने सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ी।
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श्रेष्ठ वृत्तचित्र फिल्म – गॉड वल्चर एंड ह्यूमन
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श्रेष्ठ लघु फिल्म – गिद्ध – द स्कैवेंजर
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श्रेष्ठ गैर-कथा फिल्म – फ्लॉवरिंग मैन
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सामाजिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाली श्रेष्ठ फिल्म – द साइलेंट एपिडेमिक
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श्रेष्ठ डेब्यू गैर-फीचर फिल्म – द स्पिरिट ड्रीम्स ऑफ चेराव
ये फिल्में इस बात की मिसाल हैं कि भारतीय फिल्म उद्योग केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और परिवर्तन का भी माध्यम है।
समारोह की खासियत
71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय सिनेमा में पारंपरिक और आधुनिक दोनों दृष्टिकोणों का संगम है।
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मोहलाल जैसे दिग्गजों का सम्मान हमें सिनेमा की विरासत की याद दिलाता है।
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12th फेल और मिसेज़ चैटर्जी वर्सेस नॉर्वे जैसी कहानियाँ बताती हैं कि आज का सिनेमा सामाजिक सरोकार से गहराई से जुड़ा हुआ है।
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कटहल जैसी फिल्मों को पुरस्कार मिलना प्रयोगात्मक और असामान्य कथाओं को प्रोत्साहन का संकेत है।

