इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) ने इतिहास रचते हुए प्रोफेसर उमा कांजीलाल को अपना नया कुलपति नियुक्त किया है। इसके साथ ही वे विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति बनने का गौरव प्राप्त करने वाली शख्सियत बन गई हैं। यह नियुक्ति भारत में समावेशी, तकनीक-संचालित और दूरस्थ शिक्षा की दिशा में बढ़ते कदम को भी दर्शाती है।
IGNOU का संक्षिप्त परिचय
1985 में स्थापित, IGNOU दुनिया का सबसे बड़ा ओपन विश्वविद्यालय है, जो लाखों छात्रों को लचीली और समावेशी शिक्षा प्रदान करता है। यह संस्थान भारत में ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) का अग्रदूत रहा है और शिक्षा के क्षेत्र में अनेक नवाचारों का साक्षी रहा है।
प्रो. उमा कांजीलाल: एक संक्षिप्त यात्रा
-
2003 में इग्नू में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्यभार संभाला।
-
मार्च 2021 से जुलाई 2024 तक प्रो-वाइस चांसलर रहीं।
-
जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक कार्यकारी कुलपति के रूप में सेवा दी।
-
जुलाई 2025 में उन्हें औपचारिक रूप से कुलपति नियुक्त किया गया।
नियुक्ति का महत्व
-
लैंगिक समानता की दिशा में मील का पत्थर: प्रो. कांजीलाल की नियुक्ति इग्नू की पहली महिला कुलपति के रूप में शैक्षणिक क्षेत्र में महिला नेतृत्व की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
-
ODL की विशेषज्ञता: 36 वर्षों से अधिक अनुभव के साथ उनका नेतृत्व इग्नू को वैश्विक मंच पर और मजबूत करेगा।
-
डिजिटल शिक्षा की अग्रणी: ऑनलाइन शिक्षा और ई-कंटेंट डिलीवरी में उनकी विशेषज्ञता इग्नू के डिजिटल विस्तार को गति देगी।
प्रमुख योगदान
-
राष्ट्रीय समन्वयक, SWAYAM और SWAYAM PRABHA: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को डिजिटल और टेलीविज़न माध्यम से देशभर में पहुँचाने का कार्य।
-
प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों का नेतृत्व:
-
सेंटर फॉर ऑनलाइन एजुकेशन
-
इंटर-यूनिवर्सिटी कंसोर्टियम फॉर टेक्नोलॉजी-एनेबल्ड एजुकेशन
-
एडवांस्ड सेंटर फॉर इनफॉर्मेटिक्स एंड इनोवेटिव लर्निंग
-
-
फुलब्राइट फेलोशिप (1999–2000): अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय, अर्बाना-शैंपेन में शिक्षण व अनुसंधान अनुभव।
-
अंतरराष्ट्रीय अनुभव: संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA), जॉर्डन के साथ सहयोग।
🎯 भविष्य की दिशा और दृष्टिकोण
समावेशी शिक्षा:
हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए ओपन लर्निंग के माध्यम से शिक्षा को सुलभ बनाना।
प्रौद्योगिकी का एकीकरण:
ई-लर्निंग, ICT-सक्षम पुस्तकालय, MOOCs जैसी पहलों के ज़रिए डिजिटल शिक्षा को विस्तार देना।
वैश्विक भागीदारी:
अंतरराष्ट्रीय सहयोग के ज़रिए ओपन एजुकेशन को नई ऊँचाइयों तक ले जाना।
क्षमता निर्माण:
शिक्षकों के प्रशिक्षण और शिक्षार्थियों के समर्थन तंत्र को सुदृढ़ करना।
निष्कर्ष
प्रोफेसर उमा कांजीलाल की नियुक्ति केवल इग्नू के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्पद उपलब्धि है। उनकी नेतृत्व क्षमता, शैक्षणिक दूरदर्शिता और डिजिटल शिक्षा के प्रति समर्पण इग्नू को 21वीं सदी की शिक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
