भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राजस्थान में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण–2026 (Special Intensive Revision – SIR) का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस प्रक्रिया में राज्य ने सटीकता, पारदर्शिता और डिजिटल दक्षता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो देशभर के लिए मानक बनता जा रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन के अनुसार, निर्धारित समय-सीमा से पहले ही लगभग 100 प्रतिशत गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया गया है—जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
राज्य में कुल 5 करोड़ 46 लाख 56 हजार 215 गणना प्रपत्रों में से 5 करोड़ 46 लाख 24 हजार से अधिक दस्तावेज़ ECI-Net पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपलोड किए जा चुके हैं। इस तरह 99.94 प्रतिशत डिजिटाइजेशन समय से पहले पूरा होना यह दर्शाता है कि राजस्थान ने चुनाव सुधारों को लेकर उच्च स्तर की प्रशासनिक क्षमता और तकनीकी तैयारी दिखाई है।
SIR-2026 में राजस्थान की ऐतिहासिक उपलब्धि
6 दिसंबर 2025 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने घोषणा की कि राजस्थान ने SIR कार्यक्रम के तहत मतदाता सूचियों का 100% डिजिटलीकरण पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब देशभर में मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वासनीयता को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राजस्थान इस प्रदर्शन के साथ देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने SIR-2026 के अंतर्गत संपूर्ण मतदाता सूची को पूरी तरह डिजिटल रूप में परिवर्तित कर लिया है। इससे न केवल चुनावी प्रबंधन सुगम होगा, बल्कि मतदाताओं को भी अपने रिकॉर्ड जांचने में सुविधा मिलेगी।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) क्या है?
SIR, भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियमित अंतराल पर संचालित एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूर्णतः अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना होता है। इसके अंतर्गत—
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मतदाता की पहचान का भौतिक और डिजिटल सत्यापन
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पते और निर्वाचन क्षेत्र का मिलान
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डुप्लीकेट, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना
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नए पात्र मतदाताओं को सूची में जोड़ना
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नाम, आयु या अन्य विवरण में सुधार
डिजिटाइजेशन के ज़रिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक प्रविष्टि इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज, मैप और सत्यापित हो, जिससे मैनुअल त्रुटियाँ लगभग समाप्त हो जाती हैं।
राजस्थान के प्रमुख आँकड़े जो इसे सबसे आगे रखते हैं
राजस्थान का प्रदर्शन कई मानकों पर राष्ट्रीय औसत से बेहतर रहा है—
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100% मतदाता सूची का डिजिटलीकरण पूर्ण
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97% मतदाता मैपिंग, जो देश में सर्वाधिक है
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केवल 3% मतदाताओं को दावे-आपत्तियाँ चरण में अतिरिक्त दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की आवश्यकता
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औसतन प्रति बूथ मात्र 30 मतदाता ऐसे जिनका सत्यापन शेष है
मतदाता मैपिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक मतदाता अपने सही बूथ और वार्ड से जुड़ा हो, जिससे मतदान प्रक्रिया में भ्रम और विवाद की संभावना बेहद कम हो जाती है।
डिजिटल मतदाता सूची के प्रमुख लाभ
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन के अनुसार, डिजिटलीकरण से पूरी सत्यापन प्रक्रिया में बड़ा परिवर्तन आया है। इसके प्रमुख लाभ हैं—
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सरल प्रक्रिया: काग़ज़ी कार्यवाही में भारी कमी
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पारदर्शिता: रीयल-टाइम अपडेट और स्वतः त्रुटि पहचान
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दक्षता: बार-बार दस्तावेज़ जमा करने की ज़रूरत नहीं
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सुलभता: मतदाता ऑनलाइन अपने विवरण की जांच कर सकते हैं
इस प्रणाली से न केवल चुनावी धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी, बल्कि मतदाताओं का भरोसा भी मजबूत होगा और मतदान प्रतिशत में वृद्धि की संभावना बनेगी।
ज़मीनी स्तर के कर्मचारियों का अहम योगदान
राजस्थान में SIR-2026 की इस सफलता के पीछे बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs), पंचायत कर्मियों, सहायक अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की निर्णायक भूमिका रही।
ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग, समयबद्ध प्रशिक्षण और सतत निगरानी ने इस अभियान को सफल बनाया।
नवीन महाजन ने इस अवसर पर कहा कि यह उपलब्धि टीमवर्क, समर्पण और तकनीक के सही इस्तेमाल का नतीजा है, जो पूरे देश के लिए प्रेरक उदाहरण बन सकता है।
राजस्थान में SIR-2026 की आगामी समय-सारणी
मतदाता सूची पुनरीक्षण की आगे की प्रक्रिया स्पष्ट और समयबद्ध रखी गई है—
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ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी: 16 दिसंबर 2025
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दावे और आपत्तियाँ: 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026
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सुनवाई एवं सत्यापन: 16 दिसंबर 2025 से 7 फरवरी 2026
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अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन: 14 फरवरी 2026

