न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB), जिसे ब्रिक्स देशों (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) ने मिलकर स्थापित किया था, ने भारत को एक और बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी है। बैंक ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के पूर्व सदस्य डॉ. राजीव रंजन को उपाध्यक्ष (Vice President) एवं मुख्य जोखिम अधिकारी (Chief Risk Officer – CRO) नियुक्त किया है। यह घोषणा 23 अगस्त 2025 को की गई और उनका कार्यकाल पाँच वर्षों का होगा। इस नियुक्ति से न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय क्षेत्र में साख और मजबूत होगी, बल्कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में NDB की क्षमता भी बढ़ेगी।
डॉ. राजीव रंजन का करियर सफर
डॉ. राजीव रंजन एक अनुभवी अर्थशास्त्री और वरिष्ठ केंद्रीय बैंकर हैं। उन्हें 35 से अधिक वर्षों का अनुभव है और उन्होंने भारत तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।
RBI से करियर की शुरुआत
उन्होंने 1989 में भारतीय रिज़र्व बैंक में अपने करियर की शुरुआत की। धीरे-धीरे विभिन्न ज़िम्मेदारियों के साथ वे केंद्रीय बैंकिंग के क्षेत्र में एक प्रमुख चेहरा बन गए।
RBI में प्रमुख भूमिकाएँ
RBI में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया, जिनमें शामिल हैं:
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कार्यकारी निदेशक (Executive Director)
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मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सदस्य (मई 2022 से)
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मौद्रिक नीति विभाग के प्रमुख
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MPC के सचिव
इन भूमिकाओं में उन्होंने नीतिगत फैसलों को सटीक बनाने, तरलता संचालन की निगरानी और आँकड़ा-आधारित रणनीतियों को लागू करने में अहम योगदान दिया। उनकी नीतिगत समझ ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मुद्रास्फीति नियंत्रण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद की।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव और शोध कार्य
डॉ. रंजन ने केवल भारत तक सीमित न रहते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशेषज्ञता साबित की।
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2012 से 2015 के बीच वे ओमान के केंद्रीय बैंक में आर्थिक नीति विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत रहे, जहाँ उन्होंने खाड़ी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से जुड़े नीतिगत परामर्श दिए।
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RBI में रहते हुए उन्होंने आर्थिक एवं नीति अनुसंधान विभाग का नेतृत्व किया। इस दौरान उनका फोकस आर्थिक मॉडलिंग, नीतिगत ढाँचे का निर्माण और वैश्विक-घरेलू मुद्दों पर शोध प्रकाशन रहा।
उनके शोध और विश्लेषण ने न केवल RBI को मजबूत बनाया बल्कि अंतरराष्ट्रीय नीति निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
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स्नातकोत्तर (M.A.) – दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकनॉमिक्स, दिल्ली विश्वविद्यालय
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पीएचडी – अर्थशास्त्र, मुंबई विश्वविद्यालय
उनकी शैक्षणिक और पेशेवर यात्रा ने उन्हें भारत और वैश्विक वित्तीय जगत दोनों में एक विश्वसनीय विशेषज्ञ के रूप में स्थापित किया।
न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) – क्या है और क्यों अहम है?
NDB की स्थापना 2015 में ब्रिक्स देशों ने मिलकर की थी। इसका उद्देश्य है –
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उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी ढाँचा विकास को प्रोत्साहित करना।
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सतत विकास परियोजनाओं को वित्तपोषण उपलब्ध कराना।
NDB का मुख्यालय शंघाई, चीन में स्थित है और यह अब तक ब्रिक्स देशों के अलावा अन्य उभरते देशों में भी विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दे चुका है।
नए पद पर डॉ. रंजन की जिम्मेदारियाँ
उपाध्यक्ष एवं मुख्य जोखिम अधिकारी (CRO) के रूप में डॉ. राजीव रंजन NDB की रणनीतिक और परिचालन स्थिरता सुनिश्चित करेंगे। उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होंगी:
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बैंक की जोखिम प्रबंधन रूपरेखा (Risk Management Framework) की निगरानी।
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वित्तीय और परिचालन स्थिरता को बनाए रखना।
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सदस्य देशों को दिए जाने वाले ऋण और परियोजनाओं में बाज़ार और क्रेडिट जोखिम का आकलन।
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वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए सुरक्षित और दीर्घकालिक निवेश रणनीतियाँ तैयार करना।
भारत के लिए महत्व
डॉ. रंजन की यह नियुक्ति भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है।
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इससे भारत की विशेषज्ञता और अनुभव को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है।
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NDB में भारत की भागीदारी और प्रभाव और भी बढ़ेगा।
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भारतीय दृष्टिकोण से, यह नियुक्ति उभरती अर्थव्यवस्थाओं की वित्तीय स्थिरता और विकास परियोजनाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करेगी।
निष्कर्ष
डॉ. राजीव रंजन की नियुक्ति यह दर्शाती है कि भारत न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में भी एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है। NDB जैसे बहुपक्षीय बैंक में उनका अनुभव और नेतृत्व निश्चित रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक नई दिशा देगा। आने वाले पाँच वर्षों में उनके नेतृत्व से NDB के लिए सतत विकास और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

