भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) समय-समय पर परिपत्रों, नीतिगत अद्यतनों और विनियामक अधिसूचनाओं के माध्यम से देश की वित्तीय स्थिरता और बैंकिंग पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। ये आधिकारिक दिशानिर्देश बैंकों, वित्तीय संस्थानों और आम नागरिकों को मौद्रिक नीति, डिजिटल भुगतान, ऋण व्यवस्था और आर्थिक नियमन से जुड़ी ताज़ा जानकारियाँ प्रदान करते हैं।
अक्टूबर 2025 में आरबीआई ने कई महत्वपूर्ण सर्कुलर और अधिसूचनाएँ जारी कीं, जिनका असर बैंकिंग, विदेशी निवेश और उपभोक्ता अधिकारों पर व्यापक रूप से पड़ेगा। यह लेख उन सभी प्रमुख अपडेट्स का सार प्रस्तुत करता है, जो न केवल बैंकिंग क्षेत्र के पेशेवरों बल्कि यूपीएससी और बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी हैं।
1️⃣ एसआरवीए आधारित कॉरपोरेट ऋण निवेश (SRVA-Based Investment in Corporate Debt)
अक्टूबर 2025 में आरबीआई ने “स्पेशल रुपया वोस्ट्रो अकाउंट” (SRVA) रखने वाले विदेशी निवेशकों को भारत में कॉरपोरेट ऋण साधनों में निवेश की अनुमति दी। अब विदेशी संस्थाएँ अपने भारतीय रुपये (INR) शेष को निम्न साधनों में लगा सकती हैं —
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गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (NCDs)
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भारतीय कंपनियों द्वारा जारी बॉन्ड
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कमर्शियल पेपर्स (CPs)
प्रमुख प्रावधान:
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इन निवेशों पर FPI (Foreign Portfolio Investor) के न्यूनतम परिपक्वता मानदंड और सीमा लागू नहीं होगी।
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एसआरवीए खाताधारकों को सभी नियामकीय अनुपालनों का पालन करना होगा।
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भारतीय बैंक विदेशी निवेशकों के लिए नया डिमैट खाता खोल सकेंगे और सभी लेनदेन SEBI-अधिकृत डिपॉजिटरीज़ को रिपोर्ट करेंगे।
महत्व:
यह कदम भारत को वैश्विक वित्तीय प्रणाली में और अधिक एकीकृत करता है तथा विदेशी निवेश को प्रोत्साहन देता है।
2️⃣ भारतीय रुपये में व्यापार निपटान का विस्तारित दायरा
आरबीआई ने अधिकृत डीलर (AD) श्रेणी-I बैंकों को अनुमति दी है कि वे विदेशी एसआरवीए धारकों — जैसे विदेशी बैंक या व्यापारिक साझेदार — को कॉरपोरेट ऋण साधनों में निवेश की सुविधा दें। यह भारत-केंद्रित व्यापार निपटान प्रणाली को डॉलर-आधारित भुगतान प्रणाली पर निर्भरता से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
3️⃣ एकीकृत लोकपाल योजना (Integrated Ombudsman Scheme – RB-IOS 2021)
आरबीआई ने उपभोक्ता शिकायत निवारण को और सशक्त बनाते हुए लोकपाल योजना का दायरा बढ़ाया है।
अब यह योजना लागू होगी:
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सभी वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) और ₹50 करोड़ से अधिक जमा वाले शहरी सहकारी बैंक पर।
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₹100 करोड़ से अधिक परिसंपत्ति आकार वाली एनबीएफसी पर।
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भुगतान प्रणाली संचालकों और क्रेडिट सूचना कंपनियों पर।
उद्देश्य:
उपभोक्ताओं को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज करने की सुविधा देना, जिससे पारदर्शिता, समयबद्ध समाधान और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
4️⃣ उधार और ऋण प्रावधानों में सुधार (Borrowing & Lending Amendments 2025)
भारतीय अधिकृत डीलर बैंक अब भूटान, नेपाल और श्रीलंका के निवासियों और बैंकों को भारतीय रुपये में व्यापारिक ऋण प्रदान कर सकेंगे।
उद्देश्य:
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उपमहाद्वीपीय व्यापारिक संबंधों को स्थानीय मुद्रा के माध्यम से मज़बूत करना।
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क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग बढ़ाना।
प्रभाव:
इस कदम से भारतीय रुपये का क्षेत्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीयकरण (internationalisation) तेज़ होगा, जिससे भारत की मुद्रा-स्थिति और मजबूत बनेगी।
5️⃣ निर्यातकों के लिए विदेशी मुद्रा खाते में लचीलापन
आरबीआई ने निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए अब उन्हें दो स्थानों पर विदेशी मुद्रा खाते खोलने की अनुमति दी है —
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भारत के बाहर किसी मान्यता प्राप्त विदेशी बैंक में।
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भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) में, जिसे नियामकीय दृष्टि से “भारत के बाहर” माना जाएगा।
इन खातों में अनुमत कार्य:
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निर्यात आय या अग्रिम भुगतान प्राप्त करना।
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भारत में आयात बिलों का निपटान करना।
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विदेशी मुद्रा को भारत में पुनः लाना।
समयसीमा:
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IFSC खाते में प्राप्त धनराशि भारत लाने की सीमा: 3 माह।
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अन्य विदेशी बैंक खाते में प्राप्त धनराशि के लिए सीमा: 1 माह।
महत्व:
यह प्रावधान निर्यातकों की तरलता (liquidity) बढ़ाता है और वैश्विक व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करता है।
6️⃣ नामांकन सुविधा पर नई दिशा-निर्देश (Nomination Facility Directions 2025)
1 नवंबर 2025 से लागू होने वाले इन दिशानिर्देशों के तहत सभी बैंक — वाणिज्यिक, सहकारी, RRBs और SBI — को निम्न खातों में नामांकन सुविधा को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा:
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बचत, चालू, सावधि, आवर्ती और अन्य जमा खाते
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सुरक्षित लॉकर
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सुरक्षित अभिरक्षा में रखी वस्तुएँ
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व्यक्तिगत स्वामित्व वाले प्रोप्राइटरशिप खाते
मुख्य बिंदु:
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ग्राहक यदि नामांकन से इनकार करते हैं, तो बैंक को इसके लाभ समझाने और लिखित रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी होगी।
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किसी नामांकित व्यक्ति की मृत्यु पर उसका नामांकन स्वतः समाप्त हो जाएगा।
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बैंक को नामांकन या संशोधन आवेदन पर तीन कार्य दिवसों के भीतर उत्तर देना होगा।
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पासबुक या स्टेटमेंट में “Nomination Registered” तथा नामांकित व्यक्ति का नाम अनिवार्य रूप से प्रदर्शित होगा।
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बैंकों को नामांकन अधिकारों के बारे में जन-जागरूकता अभियान चलाना होगा।
महत्व:
यह व्यवस्था बैंकिंग प्रणाली में उपभोक्ता सुरक्षा और पारिवारिक वित्तीय अधिकारों को और अधिक मज़बूती प्रदान करेगी।

