फरवरी 2026 में हुई भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम साबित हुई। इस बैठक में भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने और मौद्रिक नीति का तटस्थ (Neutral) रुख बनाए रखने का फैसला किया।
यह निर्णय 4 से 6 फरवरी 2026 के बीच आयोजित MPC की 59वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। इस नीति का उद्देश्य महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को समर्थन देना है।
क्यों चर्चा में रही RBI MPC फरवरी 2026 की बैठक?
फरवरी 2026 की बैठक इसलिए सुर्खियों में रही क्योंकि इसमें:
-
रेपो रेट को स्थिर रखा गया
-
तटस्थ मौद्रिक रुख जारी रखा गया
-
विकास और महंगाई के नए अनुमान पेश किए गए
इन फैसलों का सीधा असर लोन की ईएमआई, बैंक ब्याज दरों, फिक्स्ड डिपॉजिट और उपभोक्ता खर्च पर पड़ता है। यही वजह है कि यह नीति आम लोगों से लेकर बड़े निवेशकों तक सभी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
RBI मौद्रिक नीति फरवरी 2026 के प्रमुख फैसले
वैश्विक और घरेलू आर्थिक हालात का आकलन करने के बाद MPC ने सर्वसम्मति से नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया।
वर्तमान नीतिगत दरें:
-
रेपो दर: 5.25%
-
स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF): 5.00%
-
मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF): 5.50%
-
बैंक दर: 5.50%
इसके साथ ही RBI ने मौद्रिक नीति का तटस्थ रुख बनाए रखने का फैसला किया।
“तटस्थ रुख” का असली मतलब क्या है?
तटस्थ नीति का अर्थ है कि RBI फिलहाल न तो ब्याज दरें बढ़ाने की दिशा में प्रतिबद्ध है और न ही उन्हें घटाने के लिए तैयार।
सरल शब्दों में, केंद्रीय बैंक:
आर्थिक आंकड़ों पर नज़र रखेगा
महंगाई और विकास दोनों को संतुलित करेगा
वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार फैसला लेगा
इससे नीति में लचीलापन बना रहता है और अचानक फैसलों से बचाव होता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था का परिदृश्य
RBI के अनुसार 2025 में वैश्विक अर्थव्यवस्था ने अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई। इसका आधार रहा:
✔ सरकारी खर्च में वृद्धि
✔ व्यापार गतिविधियों में सुधार
✔ सहयोगी मौद्रिक नीतियां
हालांकि जोखिम बने रहे:
भू-राजनीतिक तनाव
वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव
विकसित देशों में ऊँची ब्याज दरें
इसके बावजूद तकनीकी क्षेत्रों में निवेश से शेयर बाजारों को समर्थन मिला।
भारत की विकास संभावनाएं मजबूत
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने अच्छा प्रदर्शन किया है।
GDP वृद्धि अनुमान:
-
2025–26: 7.4%
इस वृद्धि को समर्थन मिला:
मजबूत निजी उपभोग
बढ़ते निवेश
सशक्त सेवा क्षेत्र
बेहतर कृषि उत्पादन
आगे के अनुमान:
-
Q1 2026–27: 6.9%
-
Q2 2026–27: 7.0%
RBI के अनुसार विकास से जुड़े जोखिम फिलहाल संतुलित हैं।
महंगाई पर RBI का आकलन
2025 के अंत तक महंगाई काफी नीचे रही:
-
नवंबर 2025 CPI: 0.7%
-
दिसंबर 2025 CPI: 1.3%
खाद्य कीमतें अपस्फीति में रहीं और कोर महंगाई नियंत्रण में रही।
महंगाई अनुमान:
-
2025–26: 2.1%
-
Q4 2025–26: 3.2%
-
Q1 2026–27: 4.0%
-
Q2 2026–27: 4.2%
RBI ने कहा कि महंगाई से जुड़े जोखिम भी फिलहाल संतुलित हैं।
लोन और EMI पर क्या असर पड़ेगा?
रेपो दर स्थिर रहने से:
होम लोन की EMI नहीं बढ़ेगी
कार और पर्सनल लोन स्थिर रहेंगे
बैंक तुरंत दरें नहीं बदलेंगे
यानी कर्ज लेने वालों को बड़ी राहत मिली है।
FD और बैंकों पर प्रभाव
जमाकर्ताओं के लिए:
-
FD दरें फिलहाल स्थिर
-
बड़े रिटर्न की तुरंत उम्मीद नहीं
बैंकों के लिए:
-
स्थिर ब्याज दर माहौल
-
क्रेडिट ग्रोथ की बेहतर योजना
आम जनता के लिए इसका मतलब
लोन बोझ में अचानक बढ़ोतरी नहीं
महंगाई नियंत्रण में
आर्थिक विकास जारी
यह नीति वित्तीय स्थिरता बनाए रखते हुए उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करती है।
आगे क्या?
MPC बैठक के मिनट्स: 20 फरवरी 2026
अगली RBI MPC बैठक: 6–8 अप्रैल 2026
अगले फैसले GDP और महंगाई के नए आंकड़ों पर आधारित होंगे।

