भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भारत की वित्तीय विनियामक प्रणाली को आधुनिक, प्रभावी और हितधारक–अनुकूल बनाए रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 14 सितम्बर 2025 को RBI ने घोषणा की कि वह एक रेगुलेटरी रिव्यू सेल (Regulatory Review Cell – RRC) की स्थापना कर रहा है। यह पहल 1 अक्तूबर 2025 से लागू होगी। इसके साथ ही, एक स्वतंत्र एडवाइजरी ग्रुप ऑन रेगुलेशन (Advisory Group on Regulation – AGR) भी गठित किया गया है, जिसमें बैंकिंग और वित्त क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञ शामिल होंगे।
यह कदम भारत की वित्तीय प्रणाली को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप ढालने और विनियामक ढांचे को अधिक सरल, पारदर्शी और भविष्य–उन्मुख बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
रेगुलेटरी रिव्यू सेल (RRC) क्या है?
RRC, RBI के विनियमन विभाग (Department of Regulation) के अंतर्गत कार्य करेगा। इसका मुख्य कार्य सभी मौजूदा नियमों और विनियमों की चरणबद्ध एवं व्यवस्थित समीक्षा करना होगा।
प्रमुख उद्देश्य
-
हर 5 से 7 वर्ष में सभी नियमों की पुनर्समीक्षा।
-
बदलते बाज़ार परिदृश्य, तकनीकी प्रगति और वैश्विक मानकों के अनुरूप विनियमों को अद्यतन करना।
-
पुराने और अप्रासंगिक नियमों को समाप्त करके विनियामक अव्यवस्था कम करना।
-
नियमों को सरल, स्पष्ट और एकरूप बनाना ताकि हितधारकों के लिए उन्हें समझना और पालन करना आसान हो।
इस प्रकार RRC का गठन भारतीय वित्तीय प्रणाली को अधिक पूर्वानुमेय (predictable) और निवेश–अनुकूल बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
एडवाइजरी ग्रुप ऑन रेगुलेशन (AGR)
हितधारकों के सुझावों और उद्योग की ज़रूरतों को नीति निर्माण में शामिल करने के लिए RBI ने एक स्वतंत्र एडवाइजरी ग्रुप ऑन रेगुलेशन (AGR) भी गठित किया है।
AGR की विशेषताएँ
-
इसमें बैंकिंग और वित्त क्षेत्र के बाहरी विशेषज्ञ शामिल होंगे।
-
आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सदस्यों को भी जोड़ा जा सकता है।
-
प्रारंभिक कार्यकाल 3 वर्ष का होगा, जिसे प्रदर्शन समीक्षा के बाद 2 वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा।
-
यह समूह RRC के साथ मिलकर काम करेगा और नीतिगत सुधारों के लिए सुझाव देगा।
AGR के प्रमुख सदस्य
-
राणा अशुतोष कुमार सिंह – प्रबंध निदेशक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया → अध्यक्ष
-
टी. टी. श्रीनिवासाराघवन – पूर्व MD एवं निदेशक, सुंदरम फाइनेंस लिमिटेड → सदस्य
-
गौतम ठाकुर – अध्यक्ष, सरस्वत को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड → सदस्य
-
श्याम श्रीनिवासन – पूर्व MD एवं CEO, फेडरल बैंक लिमिटेड → सदस्य
-
रवि दुब्बुरु – पूर्व CCO, जन स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड → सदस्य
-
एन. एस. कन्नन – पूर्व MD एवं CEO, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस → सदस्य
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
-
पुराने नियमों का सरलीकरण
– कई नियम दशकों पुराने हैं और वर्तमान तकनीकी व वैश्विक मानकों से मेल नहीं खाते। RRC इन्हें अद्यतन करेगा। -
Ease of Doing Business में सुधार
– निवेशकों और वित्तीय संस्थानों के लिए स्पष्ट और सरल नियम व्यवसायिक माहौल को बेहतर बनाएँगे। -
वित्तीय स्थिरता और पारदर्शिता
– सुव्यवस्थित और समय पर समीक्षा से वित्तीय क्षेत्र में जनविश्वास और स्थिरता बढ़ेगी। -
वैश्विक प्रतिस्पर्धा
– RBI की नीतियाँ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होंगी, जिससे भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनेगा। -
हितधारक–अनुकूल नीतियाँ
– AGR जैसे निकाय के माध्यम से उद्योग, बैंकों और विशेषज्ञों की राय सीधे नीति निर्माण में शामिल होगी।
वैश्विक संदर्भ
यह पहल केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक समय–समय पर अपने विनियमों की समीक्षा करते हैं:
-
यूके में Financial Conduct Authority (FCA) नियामक समीक्षा करता है।
-
ऑस्ट्रेलिया में Australian Prudential Regulation Authority (APRA) ऐसे सुधार लाती है।
-
अमेरिका में Federal Reserve और SEC (Securities and Exchange Commission) समय–समय पर विनियमों को अपडेट करते हैं।
इस प्रकार, RBI का यह कदम भारत को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ जोड़ता है।
परीक्षाओं की दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण?
UPSC, बैंकिंग, SSC, और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह विषय अत्यंत प्रासंगिक है। संभावित प्रश्न इस प्रकार हो सकते हैं:
-
RRC (Regulatory Review Cell) का गठन किस संस्था ने किया?
-
RRC की समीक्षा कितने वर्षों के अंतराल पर होगी?
-
AGR (Advisory Group on Regulation) का अध्यक्ष कौन है?
-
RRC का मुख्य उद्देश्य क्या है?
स्थिर तथ्य (Quick Facts)
-
पहल का नाम: रेगुलेटरी रिव्यू सेल (RRC)
-
शुरू करने वाला संस्थान: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
-
प्रभावी तिथि: 1 अक्तूबर 2025
-
समीक्षा अंतराल: हर 5–7 वर्ष
-
सलाहकार निकाय: एडवाइजरी ग्रुप ऑन रेगुलेशन (AGR)
-
AGR अध्यक्ष: राणा अशुतोष कुमार सिंह

