भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बुधवार को बैंकिंग प्रणाली में ग्राहकों की सुविधा, पारदर्शिता और वित्तीय समावेशन को और मजबूत करने के लिए तीन बड़े कदमों की घोषणा की। यह ऐलान केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद किया गया। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ये पहलें खास तौर पर आम लोगों, खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के ग्राहकों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने पर केंद्रित हैं।
ये तीन बड़े कदम हैं—
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डोरस्टेप पुनः-केवाईसी और बैंकिंग सेवाओं का विस्तार
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मृत ग्राहकों के खातों के लिए सरल दावा प्रक्रिया
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रिटेल डायरेक्ट प्लेटफ़ॉर्म में नई सुविधाएं
1. डोरस्टेप पुनः-केवाईसी और विस्तारित बैंकिंग सेवाएं
प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के 10 साल पूरे होने पर अब लाखों बैंक खातों का पुनः-केवाईसी यानी ग्राहक जानकारी का अद्यतन जरूरी हो गया है। पहले यह प्रक्रिया कई लोगों के लिए समय लेने वाली और मुश्किल साबित होती थी, खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वालों के लिए।
अब आरबीआई ने निर्देश दिया है कि 1 जुलाई से 30 सितंबर के बीच बैंकों को पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाने होंगे। इन शिविरों का मकसद केवल केवाईसी अपडेट करना नहीं होगा, बल्कि ग्रामीण ग्राहकों के लिए कई अतिरिक्त सेवाएं भी मौके पर ही उपलब्ध कराना है। इनमें शामिल हैं—
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सूक्ष्म बीमा योजनाओं के बारे में जागरूकता और नामांकन।
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पेंशन योजनाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहन।
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मौके पर ही शिकायत निवारण की सुविधा।
इससे ग्रामीण और छोटे कस्बों के खाताधारकों को बैंक शाखा तक आने की जरूरत कम होगी और वे अपने नजदीकी स्थान पर ही सभी औपचारिकताएं पूरी कर पाएंगे।
2. मृत ग्राहकों के लिए सरल दावा प्रक्रिया
किसी बैंक ग्राहक की मृत्यु के बाद उसके परिवार को उसके खाते में जमा धन या लॉकर की सामग्री तक पहुंचने में अक्सर काफी मुश्किलें और देरी का सामना करना पड़ता है। विभिन्न बैंकों के अलग-अलग नियम और कागजी प्रक्रियाएं इस परेशानी को और बढ़ा देती हैं।
इस समस्या को दूर करने के लिए आरबीआई ने दावा निपटान प्रक्रिया को मानकीकृत और सरल बनाने का फैसला लिया है। इसका मतलब है—
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कानूनी उत्तराधिकारी या नामांकित व्यक्ति को बिना ज्यादा देरी के खातों तक पहुंच।
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लॉकर और अन्य संरक्षित व्यवस्थाओं की सामग्री प्राप्त करने के लिए आसान प्रक्रिया।
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दस्तावेज़ों की जरूरत और सत्यापन प्रक्रिया को सरल करना।
यह बदलाव विशेष रूप से उन परिवारों के लिए राहत भरा होगा, जिन्हें अप्रत्याशित परिस्थितियों में आर्थिक जरूरत पड़ती है और जो लंबे बैंकिंग झंझट में फंस जाते हैं।
3. रिटेल डायरेक्ट प्लेटफ़ॉर्म पर उन्नत सुविधाएं
आरबीआई का रिटेल डायरेक्ट प्लेटफ़ॉर्म व्यक्तिगत निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियां (G-Secs) सीधे खरीदने और निवेश करने का एक सुविधाजनक साधन है। अब इस प्लेटफ़ॉर्म में बड़े पैमाने पर सुधार किए जा रहे हैं, जिनमें शामिल होंगे—
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नए निवेश उपकरण: ताकि निवेशक अपनी जरूरत और लक्ष्य के हिसाब से योजनाएं बना सकें।
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बेहतर पोर्टफोलियो प्रबंधन: खुदरा निवेशक आसानी से अपने निवेश का ट्रैक रख सकेंगे और संशोधन कर पाएंगे।
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अधिक लचीलापन: निवेश योजनाओं को बनाना और बदलना पहले से अधिक सरल होगा।
ये सुधार न केवल अनुभवी निवेशकों के लिए बल्कि नए निवेशकों के लिए भी सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश को आकर्षक और आसान बनाएंगे।
इन कदमों का महत्व
RBI के ये तीन फैसले भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में सुगमता, पारदर्शिता और समावेशन को नई दिशा देते हैं। खास बातें—
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ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में पहुंच: पंचायत स्तर पर शिविर और डोरस्टेप सेवाएं सुनिश्चित करेंगी कि बैंकिंग का लाभ देश के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे।
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पारिवारिक सुरक्षा: मृत ग्राहक के खातों और लॉकर तक आसान पहुंच से परिवारों को कठिन समय में त्वरित आर्थिक राहत मिलेगी।
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निवेश प्रोत्साहन: रिटेल डायरेक्ट प्लेटफ़ॉर्म के सुधार से छोटे निवेशकों के बीच सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश की जागरूकता और रुचि दोनों बढ़ेंगी।
भविष्य की दिशा
ये पहलें यह भी दिखाती हैं कि भारतीय रिज़र्व बैंक सिर्फ मौद्रिक नीति निर्धारण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने और वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
डिजिटल अपग्रेड, प्रक्रियाओं का सरलीकरण और “ग्राहक सुविधा” पर जोर—ये तीनों मिलकर भारत में बैंकिंग को और आसान और भरोसेमंद बनाएंगे।

