भारत की न्यायिक प्रणाली में लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है – मामलों का बढ़ता बोझ और न्यायाधीशों की भारी कमी। विशेषकर देश के सबसे बड़े उच्च न्यायालयों में से एक, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में यह स्थिति और भी गंभीर रही है।
इसी पृष्ठभूमि में, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाल ही में एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम उठाया है। 1 सितंबर 2025 को हुई बैठक में कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के लिए 26 नए न्यायाधीशों की सिफारिश की। यह हाल के वर्षों में किसी भी उच्च न्यायालय के लिए की गई सबसे बड़ी सिफारिशों में से एक है।
पृष्ठभूमि: इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिक्तियाँ और चुनौतियाँ
इलाहाबाद हाईकोर्ट न केवल भारत का सबसे पुराना (स्थापना: 1866) बल्कि सबसे बड़ा उच्च न्यायालय भी है — न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 160 है।
लेकिन 1 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार:
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कार्यरत न्यायाधीश: केवल 84
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रिक्त पद: 76 (करीब 47.5% पद खाली)
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि लगभग आधी न्यायिक क्षमता खाली है। नतीजतन, लाखों मामलों का निपटारा विलंबित है और आम जनता को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा।
कॉलेजियम की सिफारिश: न्यायिक अनुभव और विविधता का मिश्रण
1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में जो 26 नामों की सिफारिश की गई, उसमें शामिल हैं:
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14 न्यायिक अधिकारी (Judicial Officers)
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12 अधिवक्ता (Advocates) – जिनमें कुछ वरिष्ठ महिला वकील भी शामिल हैं, जैसे:
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गरिमा परशद
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स्वरुपमा चतुर्वेदी (सुप्रीम कोर्ट बार से)
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यह सिफारिश दर्शाती है कि कॉलेजियम अब विविध पृष्ठभूमियों, लैंगिक प्रतिनिधित्व, और मेरिट को प्राथमिकता दे रहा है।
इस कदम का महत्व
1. मामलों के बोझ में कमी (Pendency Reduction)
इलाहाबाद हाईकोर्ट में लाखों मामले लंबित हैं। इतने बड़े पैमाने पर नई नियुक्तियाँ:
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न्यायिक प्रक्रिया को गति देंगी
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मामलों के त्वरित निपटारे में सहायक होंगी
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“न्याय में देरी, न्याय से इनकार” के सिद्धांत को चुनौती देंगी
2. महिला प्रतिनिधित्व और लैंगिक विविधता
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वरिष्ठ महिला अधिवक्ताओं की सिफारिश एक सकारात्मक संकेत है
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इससे महिलाओं की भागीदारी उच्च न्यायपालिका में बढ़ेगी
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युवा महिला वकीलों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी ये नियुक्तियाँ
3. न्यायपालिका की मजबूती और विश्वास
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न्यायालय में भरोसे को मजबूती
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आम जनता को न्यायिक व्यवस्था पर अधिक विश्वास
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संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और कानून के शासन का पालन
अन्य उच्च न्यायालयों में भी रिक्तियाँ एक बड़ी समस्या
इलाहाबाद के अतिरिक्त, बॉम्बे, कलकत्ता, पंजाब-हरियाणा जैसे प्रमुख उच्च न्यायालयों में भी न्यायाधीशों के कई पद रिक्त हैं। ऐसे में यह सिफारिश न केवल इलाहाबाद हाईकोर्ट, बल्कि देशभर की न्यायिक प्रणाली को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विषय | विवरण |
|---|---|
| संवैधानिक प्रावधान | अनुच्छेद 217, भारतीय संविधान |
| नियुक्ति प्राधिकारी | भारत के राष्ट्रपति |
| परामर्श लिया जाता है | – भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) – राज्यपाल – संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश |
| कॉलेजियम प्रणाली | सुप्रीम कोर्ट के CJI और चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों की समिति |
| इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना | वर्ष 1866 |
| न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या | 160 |
| कार्यरत (सितंबर 2025) | 84 |
| रिक्तियाँ | 76 |
क्या है कॉलेजियम प्रणाली?
कॉलेजियम प्रणाली भारत की न्यायपालिका में उच्च न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने तीन ऐतिहासिक फैसलों (Three Judges Cases) के माध्यम से विकसित किया। यह प्रणाली कार्यपालिका से न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के उद्देश्य से अस्तित्व में आई।
हालाँकि इस पर पारदर्शिता की कमी को लेकर आलोचनाएँ भी हुई हैं, लेकिन यह अब भी न्यायपालिका की स्वायत्तता का महत्वपूर्ण स्तंभ बनी हुई है।

