भारत ने अपने स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत देश की पहली हरित अमोनिया खरीद नीलामी सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस नीलामी ने न केवल रिकॉर्ड-कम कीमत दर्ज की, बल्कि यह भी दिखा दिया कि भारत वैश्विक हरित ईंधन बाजार में एक निर्णायक खिलाड़ी बनने को तैयार है।
रिकॉर्ड कीमत, बड़ी जीत
SIGHT योजना (Mode-2A) के तहत आयोजित इस नीलामी में, ₹55.75 प्रति किलोग्राम की अभूतपूर्व कम कीमत हासिल की गई है, जो 2024 की अंतरराष्ट्रीय H2Global नीलामी में तय ₹100.28 प्रति किलोग्राम के मुकाबले लगभग आधा है। मार्च 2025 में ग्रे अमोनिया की कीमत USD 515 प्रति मीट्रिक टन थी, जबकि SECI की इस नीलामी में USD 641/MT पर कीमत तय हुई — यह अंतर मूल्य स्थिरता और दीर्घकालिक अनुबंधों के संदर्भ में उद्योग के लिए आकर्षक सौदा बनाता है।
क्यों अहम है हरित अमोनिया?
हरित अमोनिया, हरित हाइड्रोजन से तैयार किया गया उत्पाद है, जो पारंपरिक अमोनिया की तुलना में शून्य कार्बन उत्सर्जन करता है। यह उर्वरक उद्योग, समुद्री परिवहन और भारी उद्योगों के लिए ईंधन के रूप में उपयोगी है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में, जहां उर्वरकों की भारी मांग रहती है, हरित अमोनिया आयात पर निर्भरता कम करने और देश में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पराद्वीप फॉस्फेट्स लिमिटेड को आपूर्ति
SECI द्वारा आयोजित इस नीलामी के अंतर्गत ओडिशा स्थित पराद्वीप फॉस्फेट्स लिमिटेड को प्रति वर्ष 75,000 मीट्रिक टन हरित अमोनिया की आपूर्ति की जाएगी। यह नीलामी कुल 13 नियोजित नीलामियों में से पहली थी, जिनका संयुक्त लक्ष्य 7.24 लाख मीट्रिक टन हरित अमोनिया की वार्षिक खरीद सुनिश्चित करना है।
यह संख्या सिर्फ एक सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि भारत भविष्य के लिए ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन दोनों को साथ लेकर चल रहा है।
निवेशकों में बढ़ा विश्वास
इस नीलामी में भारी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जो भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों के भरोसे को दर्शाती है। डेवलपर्स को आकर्षित करने के लिए SECI ने भुगतान सुरक्षा तंत्र, स्थिर मूल्य अनुबंध और सरकारी सहयोग जैसे मजबूत उपाय अपनाए हैं, जिससे दीर्घकालिक निवेश और परियोजनाओं की स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
सरकार की बड़ी योजना
भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक हरित हाइड्रोजन उत्पादन में 50 लाख टन वार्षिक क्षमता तक पहुंचना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए आवश्यक है कि अमोनिया जैसे डेरिवेटिव उत्पादों का उत्पादन भी बढ़ाया जाए। हरित अमोनिया का उत्पादन न केवल कार्बन उत्सर्जन को घटाएगा, बल्कि भारत को वैश्विक हरित ईंधन निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
आगे क्या?
SECI की यह पहल केवल एक शुरुआत है। आने वाले महीनों में 12 और नीलामियां आयोजित होंगी, जिससे हरित अमोनिया की कीमतों में और गिरावट, स्थिरता और वैश्विक खिलाड़ियों की भागीदारी की उम्मीद है। इसके अलावा, घरेलू विनिर्माण और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रोत्साहन योजनाएं भी तैयार की हैं।
इस दिशा में किया गया हर कदम भारत के 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के संकल्प को मजबूती प्रदान करता है। बड़े पैमाने पर उत्पादन, दीर्घकालिक मूल्य स्थिरता और सरकारी सहयोग के साथ, हरित ईंधन को मुख्यधारा में लाने की राह अब अधिक स्पष्ट हो गई है।
निष्कर्ष
SECI की पहली हरित अमोनिया नीलामी भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव का प्रतीक बन गई है। यह केवल नीलामी नहीं, बल्कि एक हरित भविष्य की ओर बढ़ते आत्मविश्वास का प्रमाण है। जैसे-जैसे भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, ऐसे प्रयास उसे जलवायु परिवर्तन की चुनौती से लड़ने में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करेंगे।

