नाम: शिबू सोरेन
जन्म: 11 जनवरी 1944
जन्म स्थान: नेमरा गांव, रामगढ़ जिला (अब झारखंड), भारत
पिता का नाम: सोभा सोरेन
पत्नी: रूपी सोरेन
पार्टी: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
निधन: 4 अगस्त 2025
प्रारंभिक जीवन
शिबू सोरेन का जन्म एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था। उन्होंने बहुत ही साधारण परिस्थितियों में अपना बचपन बिताया। उनके पिता की एक जमींदार द्वारा हत्या कर दिए जाने की घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने आदिवासी अधिकारों की लड़ाई को अपना लक्ष्य बना लिया।
राजनीतिक सफर
शिबू सोरेन ने 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य झारखंड को बिहार से अलग एक स्वतंत्र राज्य बनाना था। वह झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक रहे हैं।
उन्होंने कई बार संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और केंद्र सरकार में भी मंत्री पद पर रहे। वे कोयला मंत्री, रेल राज्य मंत्री, और वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री भी रह चुके हैं।
झारखंड आंदोलन के अगुआ
शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक रहे। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया। उनकी मेहनत और जनसमर्थन का ही परिणाम था कि साल 2000 में झारखंड एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। उन्हें आदरपूर्वक “दिशोम गुरु” (जनजातीय गुरु) कहा जाता है।
संसदीय और मुख्यमंत्री पद का सफर
शिबू सोरेन 1980 में पहली बार दुमका लोकसभा सीट से सांसद बने और यह सीट लंबे समय तक JMM का गढ़ बनी रही। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के नलिन सोरेन से हार का सामना करना पड़ा।
उन्होंने तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली:
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मार्च 2005 – पहली बार मुख्यमंत्री बने लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाने के कारण 9 दिन में इस्तीफा देना पड़ा।
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अगस्त 2008 – जनवरी 2009 – दूसरी बार मुख्यमंत्री बने लेकिन यह कार्यकाल भी छोटा रहा।
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दिसंबर 2009 – मई 2010 – तीसरी बार मुख्यमंत्री बने लेकिन कार्यकाल फिर अधूरा रहा।
इन तीनों कार्यकालों में वे आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों को प्राथमिकता देने वाले नेता के रूप में उभरे।
केंद्रीय राजनीति में भी रहे सक्रिय
शिबू सोरेन ने केंद्र सरकार में भी मंत्री पद संभाले। 2004 में मनमोहन सिंह सरकार में वे कोयला मंत्री बने। लेकिन 1974 के चिरूडीह कांड से जुड़ी कानूनी परेशानियों के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद वे दोबारा कोयला मंत्री बने लेकिन 2006 में अपने सचिव शशिनाथ झा हत्याकांड में दोषी ठहराए जाने पर उन्हें फिर से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।
झारखंड की राजनीति के सबसे प्रभावशाली और सम्मानित चेहरों में से एक, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक सदस्यों में शामिल शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
निष्कर्ष
शिबू सोरेन का जीवन एक आंदोलन की कहानी है — एक आदिवासी युवक से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय नेता बनने तक की यात्रा प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने संघर्षों से न केवल झारखंड राज्य की स्थापना में योगदान दिया, बल्कि आदिवासी समाज को एक नई पहचान दी।
उनकी विरासत, उनके विचार और उनका संघर्ष झारखंड के इतिहास में हमेशा अमिट रहेगा। दिशोम गुरुजी अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों को दिशा दिखाती रहेगी।

