केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 12 अगस्त 2025 को SHRESTH – स्टेट हेल्थ रेगुलेटरी एक्सीलेंस इंडेक्स लॉन्च किया, जो भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन में एक ऐतिहासिक कदम है। यह अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य एक पारदर्शी और डाटा-आधारित ढांचे के माध्यम से राज्य स्तरीय दवा नियामक प्रणालियों का मूल्यांकन और सुदृढ़ीकरण करना है।
यह कार्यक्रम भारत में दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है और यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है कि हर नागरिक को—चाहे वह देश के किसी भी कोने में हो—सुरक्षित और प्रभावी दवाएं मिलें।
SHRESTH की आवश्यकता क्यों पड़ी?
भारत का औषधि उद्योग दुनिया के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। किफायती दवाएं उपलब्ध कराने के कारण भारत को “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाता है।
फिर भी, राज्य स्तर पर नियामक क्षमता और कार्यप्रणाली में काफी असमानता देखी गई है। दवा निर्माण, निगरानी, लाइसेंसिंग और वितरण में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की अग्रणी भूमिका होने के बावजूद, मानकीकृत मूल्यांकन प्रणाली का अभाव था।
टीकों के लिए भारत को WHO ML3 स्टेटस मिलने जैसी अंतरराष्ट्रीय सफलताओं ने यह साबित किया है कि सही दिशा और मानकों के साथ भारत वैश्विक मानकों पर खरा उतर सकता है। इसी सोच के तहत SHRESTH की नींव रखी गई।
SHRESTH क्या है?
SHRESTH का पूरा नाम है — State Health Regulatory Excellence Index।
यह एक वर्चुअल गैप असेसमेंट टूल है, जो राज्यों के दवा नियामक प्राधिकरणों के प्रदर्शन का बेंचमार्क तैयार करेगा और सुधार के अवसरों की पहचान करेगा।
इसके मुख्य कार्यों में शामिल हैं:
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राज्यों के दवा नियामक प्रदर्शन का तुलनात्मक मूल्यांकन।
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मानव संसाधन, बुनियादी ढांचा, लाइसेंसिंग, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में कमियों की पहचान।
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राज्यों को वैश्विक मॅच्योरिटी सर्टिफिकेशन की ओर मार्गदर्शन।
ढांचा एवं क्रियान्वयन
SHRESTH की निगरानी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) करेगा।
राज्यों को उनकी भूमिका के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा जाएगा:
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मैन्युफैक्चरिंग स्टेट्स – इनका मूल्यांकन 5 थीम्स के तहत 27 सूचकांकों पर किया जाएगा:
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मानव संसाधन
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बुनियादी ढांचा
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लाइसेंसिंग गतिविधियां
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निगरानी गतिविधियां
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त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता
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मुख्यतः वितरण वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश – इनका मूल्यांकन समान मानकों पर 23 सूचकांकों के आधार पर होगा।
डेटा और रैंकिंग प्रक्रिया
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डेटा सबमिशन: हर माह की 25 तारीख तक राज्य अपना डेटा जमा करेंगे।
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स्कोर तैयार करना: अगले माह की 1 तारीख को सभी मेट्रिक्स का स्कोर बनाया जाएगा।
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रैंकिंग: पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए रैंकिंग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा की जाएगी।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्व
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव स्मिता पुन्या सलिला श्रीवास्तव के अनुसार, “दवाओं की गुणवत्ता सार्वजनिक स्वास्थ्य की पहली सुरक्षा पंक्ति है। SHRESTH का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में बनी दवाओं पर दुनिया भरोसा करे—और यह भरोसा देश के नागरिकों से शुरू हो।”
यह सूचकांक—
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नियामक प्रणालियों को मजबूत करेगा।
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दवाओं में उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाएगा।
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ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के समान क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेगा।
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राज्यों के बीच बेस्ट प्रैक्टिस शेयरिंग को बढ़ावा देगा।
SHRESTH से जुड़ी अन्य पहलें
SHRESTH लॉन्च के साथ ही, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ और कदमों की घोषणा की:
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Not of Standard Quality (NSQ) डैशबोर्ड का विस्तार सभी राज्यों तक।
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राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन, विषय – दवा नियामक प्रणाली।
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संयुक्त प्रशिक्षण और ऑडिट कार्यक्रम, नियामक कर्मचारियों के लिए।
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क्षमता-विकास कार्यशालाएं, ताकि राज्यों की प्रणालियां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों।
निष्कर्ष
SHRESTH सिर्फ एक रैंकिंग टूल नहीं, बल्कि राज्यों के लिए एक सुधारात्मक रोडमैप है।
यह पहल भारत के दवा नियामक ढांचे को पारदर्शी, जवाबदेह और वैश्विक मानकों पर खरा बनाने में मदद करेगी।
अगर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह न केवल देश में दवा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि भारत की फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड की प्रतिष्ठा को और ऊंचा करेगा।

