भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच व्यापारिक और आर्थिक रिश्ते वर्षों से मजबूत हो रहे हैं। इस साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात–भारत व्यापार परिषद (UAE-India Business Council – UIBC) ने 24 सितंबर 2025 को तीन अहम मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते द्विपक्षीय व्यापार, निवेश सहयोग, और क्षेत्रीय व वैश्विक स्तर पर आर्थिक सहभागिता को और गहरा करने के उद्देश्य से किए गए हैं।
समझौते का पृष्ठभूमि और उद्देश्य
UIBC ने ये समझौते इस सोच के साथ किए हैं कि भारत-यूएई समग्र आर्थिक साझेदारी समझौता (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) को प्रभावी और व्यावहारिक बनाया जाए। CEPA भारत और यूएई के बीच व्यापार और निवेश को सरल बनाने वाली एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो कई क्षेत्रों में सहयोग के द्वार खोलती है।
तीन प्रमुख समझौते मुख्य रूप से तीन बड़े स्तंभों पर केंद्रित हैं:
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संस्थागत सहयोग को मजबूती देना
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सेवा निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच बढ़ाना
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क्षेत्रीय औद्योगिक और व्यापारिक ताकतों का समन्वय और विकास करना
मुख्य समझौते और उनकी भूमिका
1. UIBC और UAE-India CEPA Council (UICC) के बीच MoU
यह समझौता CEPA के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा स्थापित करने पर केंद्रित है।
मुख्य बिंदु:
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CEPA रणनीतियों का समन्वय और लागू करना
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आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए नियमित संवाद और सहयोग के माध्यम बनाना
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व्यापार और निवेश के लिए बाधाओं को दूर करना
यह समझौता भारत-यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार को सुगम और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा और दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा।
2. UIBC और Services Export Promotion Council (SEPC) के बीच MoU
सेवा निर्यात के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए यह समझौता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्य फोकस क्षेत्र हैं:
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लॉजिस्टिक्स
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स्वास्थ्य सेवा
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सूचना प्रौद्योगिकी (IT/ITES)
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शिक्षा
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पर्यटन
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इंजीनियरिंग
इस समझौते के तहत B2B (व्यवसाय से व्यवसाय) और B2G (व्यवसाय से सरकार) जुड़ाव को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही सेवा निर्यातकों को बाजार की बाधाओं से निजात दिलाने के लिए विशेष पहल की जाएगी, जिससे भारत की सेवा निर्यात को यूएई सहित वैश्विक बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी।
3. UIBC और क्षेत्रीय चैम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स के बीच MoU
यह समझौता स्थानीय और राज्य स्तरीय औद्योगिक ताकतों को यूएई-भारत साझेदारी के साथ जोड़ने पर केंद्रित है। इस समझौते में शामिल प्रमुख साझेदार हैं:
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बॉम्बे इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
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कालिकट चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
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गुजरात चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
उद्देश्य:
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CEPA के स्थानीय कार्यान्वयन को सक्षम बनाना
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राज्य-स्तरीय व्यापार और निवेश लिंक को मजबूत करना
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उद्योग की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करना
यह क्षेत्रीय स्तर पर व्यापार वृद्धि और निवेश को बढ़ावा देगा, जिससे MSMEs (लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्यम) सहित छोटे व्यवसायों को भी फायदा होगा।
समझौतों का व्यापक महत्व
इन समझौतों से यूएई-भारत के आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी और व्यापार के कई बाधाओं को दूर किया जाएगा। विशेष रूप से MSMEs को CEPA का अधिकतम लाभ दिलाने में मदद मिलेगी, जो आमतौर पर व्यापार के बड़े नेटवर्क से जुड़ने में कठिनाई महसूस करते हैं।
इन MoUs का प्रभाव:
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CEPA का व्यवहारिक कार्यान्वयन: व्यापारियों और उद्योगपतियों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बढ़ेंगी।
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नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा: दोनों देशों के उद्यमी आपस में सहयोग कर तकनीकी नवाचार और व्यवसाय विस्तार कर सकेंगे।
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नीति और उद्यम के बीच फासला कम करना: व्यापार नियमों और सरकारी नीतियों को व्यवसायिक जरूरतों के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी।
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वैश्विक स्तर पर व्यवसाय विस्तार: भारत के कारोबार यूएई के व्यापक व्यापार नेटवर्क के जरिए अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकेंगे।
प्रमुख क्षेत्र जिनमें सहयोग होगा
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सूचना प्रौद्योगिकी (IT/ITES): डिजिटलाइजेशन और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
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स्वास्थ्य सेवा: फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल टूरिज्म, और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी में सहयोग।
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लॉजिस्टिक्स: बेहतर कनेक्टिविटी और ट्रांसपोर्टेशन सेवाएं।
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पर्यटन और संस्कृति: दोनों देशों के बीच पर्यटन व सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन।
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शिक्षा: उच्च शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग।
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इंजीनियरिंग: तकनीकी सेवाओं और निर्माण क्षेत्र में साझेदारी।
व्यापारिक समुदाय की प्रतिक्रिया
भारत और यूएई के उद्योग विशेषज्ञ इस कदम को अत्यंत सकारात्मक मान रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह पहल CEPA की संभावनाओं को व्यापक रूप से वास्तविकता में बदलने का एक अवसर प्रदान करेगी। छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए यह अवसर नए बाजार खोलने का माध्यम बनेगा, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास को बल मिलेगा।

