भारत और ब्रिटेन के रिश्ते हमेशा से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक साझेदारी से जुड़े रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। इसी कड़ी में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर को भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने और द्विपक्षीय संबंधों को गहराई देने में उनकी अहम भूमिका के लिए प्रतिष्ठित ‘लिविंग ब्रिज’ अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान 23 सितंबर 2025 को लंदन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया। हालांकि प्रधानमंत्री स्टारमर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पाए, उनकी ओर से यह पुरस्कार ब्रिटेन की भारतीय मूल की मंत्री सीमा मल्होत्रा (विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय – FCDO, इंडो-पैसिफिक मामलों की प्रभारी) ने ग्रहण किया।
‘लिविंग ब्रिज’ सम्मान क्या है?
‘लिविंग ब्रिज अवॉर्ड्स’ का आयोजन हर वर्ष इंडिया बिज़नेस ग्रुप (IBG) द्वारा किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य उन व्यक्तियों और संस्थाओं को पहचान देना है, जो भारत और ब्रिटेन के बीच पुल का कार्य करते हुए व्यापार, शिक्षा, संस्कृति और कूटनीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देते हैं।
‘लिविंग ब्रिज’ का विचार इस धारणा पर आधारित है कि प्रवासी भारतीय समुदाय और सहयोगी संस्थाएँ दोनों देशों को जोड़ने वाले एक जीवंत सेतु की तरह हैं। वर्ष 2025 में इस अवॉर्ड का चौथा संस्करण आयोजित किया गया।
2025 के अन्य सम्मानित हस्तियाँ और संस्थान
इस वर्ष ‘लिविंग ब्रिज अवॉर्ड्स’ में केवल प्रधानमंत्री स्टारमर ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों और संस्थानों को भी सम्मानित किया गया। इनमें शामिल हैं:
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जीएमआर ग्रुप (भारत-आधारित बहुराष्ट्रीय समूह)
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जीपी हिंदुजा (ब्रिटिश-भारतीय उद्योगपति)
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बीना मेहता (चेयर, केपीएमजी यूके)
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यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन
इन सभी को भारत-यूके साझेदारी को मजबूत करने और नए अवसरों का सृजन करने में उनके योगदान के लिए सराहा गया।
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA)
भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से चर्चा में रहा मुक्त व्यापार समझौता आखिरकार वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री स्टारमर के नेतृत्व में अंतिम रूप तक पहुँचा। इस समझौते को आधिकारिक रूप से कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) कहा जाता है।
कई वर्षों तक चली जटिल वार्ताओं और नीतिगत चर्चाओं के बाद यह समझौता संभव हो सका। अब यह ब्रिटेन की संसद से 2026 में अंतिम स्वीकृति पाएगा।
समझौते की मुख्य विशेषताएँ
इस ऐतिहासिक समझौते में कई ऐसे बिंदु शामिल किए गए हैं, जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए दूरगामी प्रभाव डालेंगे। इनमें प्रमुख हैं:
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लक्ष्य: वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक दोगुना करना।
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व्यापारिक अवरोधों में कमी: शुल्क और अन्य बाधाओं को कम कर व्यवसायों को आसान पहुँच प्रदान करना।
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मुख्य क्षेत्र: फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, फिनटेक, शिक्षा, विधिक सेवाएँ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सतत विकास।
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मानकों की परस्पर मान्यता: दोनों देशों के बीच गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को सरल बनाने से कंपनियों को स्थिरता और भरोसा मिलेगा।
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निवेश प्रवाह में वृद्धि: समझौते से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा मिलेगा और नए रोजगार अवसर पैदा होंगे।
डाउनिंग स्ट्रीट के प्रवक्ता के अनुसार, यह समझौता ब्रिटिश व्यवसायों को भारत जैसे विशाल और तेजी से बढ़ते बाज़ार में आत्मविश्वास और सुरक्षा के साथ निवेश करने का अवसर देगा। वहीं, हरजिंदर कांग (यूके के ट्रेड कमिश्नर, दक्षिण एशिया और अवॉर्ड्स के प्रमुख निर्णायक) ने इसे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए “नए अवसरों के द्वार खोलने वाला ऐतिहासिक कदम” बताया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मान?
कीयर स्टारमर को मिला यह सम्मान केवल एक औपचारिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह कई स्तरों पर भारत-यूके रिश्तों की अहमियत को रेखांकित करता है:
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कूटनीतिक उपलब्धि – यह दिखाता है कि दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक साझेदार हैं।
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आर्थिक साझेदारी – व्यापार और निवेश को प्रोत्साहन देकर यह समझौता आने वाले दशक में दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नई मजबूती देगा।
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प्रवासी भारतीयों की भूमिका – भारतीय मूल के लोग ब्रिटेन में एक बड़े समुदाय के रूप में रहते हैं और यही समुदाय दोनों देशों को जोड़ने वाले वास्तविक “लिविंग ब्रिज” की तरह कार्य करता है।
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ब्रेक्सिट के बाद की रणनीति – ब्रिटेन, यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद, नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश में है। ऐसे में भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश के साथ समझौता ब्रिटेन के लिए बेहद अहम है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर को भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता अंतिम रूप देने के लिए 2025 का लिविंग ब्रिज अवॉर्ड मिला।
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पुरस्कार लंदन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में प्रदान किया गया।
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उनकी ओर से यह पुरस्कार सीमा मल्होत्रा (भारतीय मूल की मंत्री, इंडो-पैसिफिक, FCDO) ने ग्रहण किया।
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FTA का नाम: कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA)।
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लक्ष्य: वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाना।
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आयोजक: इंडिया बिज़नेस ग्रुप (IBG)।

