IUSSP ने जीता संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार
IUSSP ने जीता संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार

IUSSP ने जीता संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार

भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की, जब संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) इंडिया ने 2025 संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार (संस्थागत श्रेणी) इंटरनेशनल यूनियन फॉर द साइंटिफिक स्टडी ऑफ पॉपुलेशन (IUSSP) को प्रदान किया। यह सम्मान कोलकाता में आयोजित भारतीय जनसंख्या अध्ययन संघ (IASP) के 46वें वार्षिक सम्मेलन के दौरान दिया गया। यह पुरस्कार IUSSP की दशकों से चली आ रही जनसांख्यिकीय शोध परंपरा, नीति-निर्माण में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान और वैश्विक जनसंख्या विज्ञान के विकास में उनकी केंद्रीय भूमिका की आधिकारिक मान्यता है।

IUSSP को यह पुरस्कार ऐसे समय मिला है जब विश्व अभूतपूर्व जनसांख्यिकीय चुनौतियों का सामना कर रहा है—वृद्ध होती आबादी, जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाला प्रवासन, असमान विकास और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी नई चुनौतियाँ। इन सभी मुद्दों पर वैज्ञानिक अध्ययन, डेटा और शोध आधारित नीति निर्माण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।


IUSSP: वैश्विक जनसंख्या विज्ञान का प्रमुख स्तंभ

IUSSP एक विशुद्ध अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो जनसांख्यिकी और जनसंख्या विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया भर के शोधकर्ताओं, अकादमिक संस्थानों और नीति-निर्माताओं को जोड़ता है। संगठन की अध्यक्षता 2022–2025 के कार्यकाल में भारत की प्रसिद्ध जनसांख्यिकी विशेषज्ञ डॉ. शिरीन जेजीभॉय ने की। उनके अनुसंधान और नेतृत्व ने IUSSP को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावशाली बनाया।

पुरस्कार ग्रहण करते हुए डॉ. जेजीभॉय ने कहा—
“तेजी से बदलती जनसांख्यिकीय वास्तविकताएँ—जैसे वृद्धावस्था, जलवायु परिवर्तन, प्रवासन, और युवाओं की बदलती भूमिका—स्वतंत्र और सशक्त शोध को पहले से अधिक महत्वपूर्ण बनाती हैं। यह पुरस्कार जनसांख्यिकीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों का सम्मान है।”

IUSSP दुनिया भर में जनसंख्या अध्ययन की सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देता है, युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है, और नीति निर्माण में डेटा के उपयोग को प्रोत्साहित करता है। इसके योगदान का दायरा प्रजनन स्वास्थ्य, लैंगिक अध्ययन, प्रवासन, जनसंख्या अनुमान, सतत विकास और सामाजिक नीतियों तक फैला हुआ है।


IASP के 46वें वार्षिक सम्मेलन का विषय: ‘People, Planet, Prosperity’

भारत के जनसांख्यिकीय भविष्य और सतत विकास की दिशा में यह सम्मेलन अत्यधिक महत्त्वपूर्ण रहा।
इस वर्ष का थीम था—
“People, Planet, Prosperity: Demographic Drivers of India’s Inclusive Growth”

सम्मेलन में ये प्रमुख मुद्दे केंद्र में रहे:

  • भारत की युवा आबादी को जनसांख्यिकीय लाभांश में कैसे बदला जाए

  • जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या के बीच संबंध

  • प्रवासन, शहरीकरण और सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ

  • प्रजनन स्वास्थ्य और यौन शिक्षा

  • वृद्धावस्था की चुनौतियाँ और सामाजिक सुरक्षा

यह आयोजन IASP, राष्ट्रीय एटलस एवं थीमैटिक मैपिंग संगठन (NATMO) और भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण (AnSI) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और युवा जनसांख्यिकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर भारत के जनसांख्यिकीय भविष्य पर सामूहिक दृष्टिकोण विकसित करना था।


सम्मान समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ

पुरस्कार वितरण समारोह में कई प्रमुख व्यक्तित्वों ने भाग लिया, जिनमें शामिल थे:

  • प्रो. के. एन. सिंह, कुलपति, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय — मुख्य अतिथि

  • श्री विजय भारती, IAS, सचिव, पश्चिम बंगाल सरकार — Guest of Honour

  • प्रो. ए. पी. सिंह, महानिदेशक, राष्ट्रीय पुस्तकालय, कोलकाता — विशेष अतिथि

UNFPA इंडिया की प्रतिनिधि एंड्रिया एम. वोजनार ने मुख्य भाषण देते हुए कहा:

“भारत के पास अपनी विशाल युवा आबादी को सतत विकास और समान अवसरों के लिए एक शक्तिशाली इंजन में बदलने का ऐतिहासिक अवसर है। लेकिन इसके लिए विश्वसनीय डेटा, मजबूत शोध और समावेशी नीतियों की ज़रूरत है।”


डेटा और साक्ष्य-आधारित नीतियों पर ज़ोर

सम्मेलन का एक अहम संदेश था—
“सभी के लिए विकास तभी संभव है जब नीतियाँ डेटा पर आधारित हों और किसी भी समुदाय को पीछे न छोड़ा जाए।”

इसके लिए इन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है:

1. प्रजनन स्वास्थ्य और परिवार नियोजन

गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और जागरूकता बढ़ाना।

2. युवाओं की भलाई और रोजगार

स्किल डेवलपमेंट, शिक्षा और अवसरों तक समान पहुंच।

3. लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण

महिलाओं की आर्थिक व सामाजिक भागीदारी को बढ़ाना।

4. जलवायु परिवर्तन और प्रवासन

जलवायु-प्रभावित प्रवास का डेटा-आधारित समाधान।

5. वृद्ध होती आबादी

सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और geriatric services को मजबूत करना।

इन सभी मुद्दों पर IUSSP और IASP जैसे संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है, क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को भारत की नीति प्रणाली से जोड़ते हैं।


UNFPA: दुनिया का प्रमुख प्रजनन स्वास्थ्य संगठन

UNFPA संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी है जो यौन एवं प्रजनन अधिकारों, मातृ स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और युवाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है। इसका मिशन है:

  • हर गर्भावस्था सुरक्षित हो

  • हर प्रसव सुरक्षित हो

  • हर युवा अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सके

UNFPA भारत में समुदाय आधारित कार्यक्रमों, डेटा सिस्टम के विकास और नीति सुधारों में समर्थन प्रदान करता है। IUSSP को पुरस्कार देकर UNFPA ने जनसंख्या विज्ञान में साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण के महत्त्व को और रेखांकित किया है।

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