भारत में डिजिटल व्यापार को गति देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्री ने 'लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) 2.0' का शुभारंभ किया
भारत में डिजिटल व्यापार को गति देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्री ने 'लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) 2.0' का शुभारंभ किया

भारत में डिजिटल व्यापार को गति देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्री ने ‘लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) 2.0’ का शुभारंभ किया

20 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) 2.0 का औपचारिक शुभारंभ किया। यह लॉन्च न केवल ‘मेक इन इंडिया’ के दस वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, बल्कि भारत को एक डिजिटल, प्रतिस्पर्धी और वैश्विक व्यापार केंद्र बनाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम भी है।

LDB 2.0, एक अत्याधुनिक डिजिटल लॉजिस्टिक्स प्लेटफ़ॉर्म है जिसे NICDC Logistics Data Services (NLDSL) द्वारा विकसित किया गया है। यह पहल भारत के आत्मनिर्भरता, औद्योगिक विकास और निर्यात प्रतिस्पर्धा को नई गति प्रदान करेगी।


 भारत की डिजिटल व्यापार यात्रा में एक नया अध्याय

LDB 2.0 के शुभारंभ के साथ, भारत ने लॉजिस्टिक्स प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला में डिजिटल नवाचार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। यह प्लेटफ़ॉर्म रियल-टाइम ट्रैकिंग, मल्टी-मॉडल विज़िबिलिटी और हाई-सीज़ कंटेनर मॉनिटरिंग जैसे फ़ीचर्स से लैस है, जो विशेषकर MSMEs, स्टार्टअप्स और निर्यातकों के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे।

श्री पीयूष गोयल ने इसे केवल एक तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि “रणनीतिक सुधार” (Strategic Reform) बताया, जो भारत को निर्यात महाशक्ति बनाने के सपने की दिशा में अग्रसर करेगा।


 क्या है LDB 2.0?

LDB 2.0 एक ऐसा डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जो पूरे देश में कंटेनरों की यात्रा की निगरानी और विश्लेषण की सुविधा देता है। इसका उद्देश्य है:

  • लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में पारदर्शिता लाना

  • समय और लागत में कमी करना

  • लॉजिस्टिक्स से संबंधित निर्णयों को डेटा-आधारित बनाना

 प्रमुख विशेषताएं

  1. हाई-सीज़ कंटेनर ट्रैकिंग
    अब निर्यातक अपने कंटेनरों को भारतीय बंदरगाह छोड़ने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय जल में ट्रैक कर सकेंगे। इससे निर्यातकों की भरोसेमंद डिलीवरी और ग्राहक संतुष्टि में सुधार होगा।

  2. मल्टी-मॉडल शिपमेंट विज़िबिलिटी
    LDB 2.0 एक एकीकृत लॉजिस्टिक्स सिस्टम प्रदान करता है जो सड़क, रेल और समुद्र – तीनों माध्यमों को जोड़ता है।

  3. ULIP APIs का इंटीग्रेशन
    यह प्लेटफ़ॉर्म यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) से एकीकृत है, जिससे विभिन्न स्रोतों से डेटा का तेज़ और सहज आदान-प्रदान संभव होता है।

  4. लाइव कंटेनर हीटमैप
    यह फ़ीचर भारतभर में कंटेनरों के वितरण और मूवमेंट की विज़ुअल मैपिंग दिखाता है, जिससे नीति-निर्माता क्षेत्रीय बाधाओं को पहचान कर टारगेटेड सुधार कर सकते हैं।


 क्यों महत्वपूर्ण है LDB 2.0?

1. निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा

भारत की लॉजिस्टिक्स लागत अभी भी वैश्विक मानकों की तुलना में अधिक है। LDB 2.0 से इस लागत में कमी आएगी और भारत की वैश्विक साख मजबूत होगी।

2. MSMEs और स्टार्टअप्स को ताकत

अब छोटे उद्यम भी बड़े कॉर्पोरेट्स जैसी ट्रैकिंग और डेटा-आधारित फैसलों का लाभ उठा सकेंगे, जिससे उनकी निर्यात क्षमता और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ेगी।

3. ‘विकसित भारत @2047’ के सपने की ओर एक कदम

LDB 2.0 जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म भारत की डिजिटल लॉजिस्टिक्स रीढ़ को सशक्त करते हैं। यह भारत को औद्योगिक सुपरपावर बनाने की दिशा में अनिवार्य कदम है।


 श्री पीयूष गोयल का वक्तव्य

“LDB 2.0 केवल तकनीक नहीं, यह डेटा + पारदर्शिता + डिजिटलीकरण का एक शक्तिशाली संयोजन है, जो भारत को आत्मनिर्भर और निर्यात केंद्रित अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य है:

  • मेक इन इंडिया को और मजबूत करना

  • ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को अगले स्तर पर ले जाना

  • निर्बाध लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम तैयार करना


 सरकार की रणनीतिक प्राथमिकताएं और LDB 2.0 का मेल

रणनीतिक प्राथमिकता LDB 2.0 से कैसे जुड़े
मेक इन इंडिया निर्यातकों को अधिक कुशलता से सप्लाई चेन प्रबंधन की सुविधा
आत्मनिर्भर भारत MSMEs को डेटा-आधारित लॉजिस्टिक्स सेवाओं की उपलब्धता
डिजिटल इंडिया रियल-टाइम डेटा ट्रैकिंग और API आधारित इंटीग्रेशन
विकसित भारत @2047 लॉजिस्टिक्स की संरचना को वैश्विक मानकों पर लाना

 मुख्य तथ्य (Quick Facts)

बिंदु विवरण
 लॉन्च तिथि 20 सितंबर 2025
 स्थान नई दिल्ली
 शुभारंभ किया श्री पीयूष गोयल, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री
 विकसित किया NICDC Logistics Data Services (NLDSL)
प्रमुख फीचर्स हाई-सीज़ ट्रैकिंग, मल्टी-मॉडल विज़िबिलिटी, ULIP इंटीग्रेशन, लाइव हीटमैप
 संबद्ध योजनाएं मेक इन इंडिया (10 वर्ष), आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत @2047

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