रेडियो आज भी करोड़ों लोगों तक बिना इंटरनेट के सूचना, शिक्षा और मनोरंजन पहुँचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बना हुआ है।
वर्ल्ड रेडियो डे 2026 की थीम: AI एक टूल है, आवाज़ नहीं
इस साल की थीम है —
“Radio and Artificial Intelligence: AI is a tool, not a voice”
यह थीम इस बात पर ज़ोर देती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ब्रॉडकास्टिंग को बेहतर बना सकता है, लेकिन इंसानी सोच, भरोसे और संपादकीय ज़िम्मेदारी की जगह नहीं ले सकता।
AI रेडियो में मदद कर रहा है:
कंटेंट एडिटिंग और आर्काइविंग
ट्रांसलेशन और एक्सेसिबिलिटी
ऑडियंस एनालिटिक्स
ऑटोमेशन सिस्टम
लेकिन असली ताकत आज भी इंसानी आवाज़ और विश्वसनीय पत्रकारिता में ही है — यही संदेश इस थीम का केंद्र है।
वर्ल्ड रेडियो डे की शुरुआत कैसे हुई?
वर्ल्ड रेडियो डे को आधिकारिक रूप से UNESCO ने 2011 में अपने 36वें जनरल कॉन्फ्रेंस में घोषित किया था।
इसके बाद 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मान्यता दी।
13 फरवरी क्यों चुना गया?
क्योंकि इसी दिन 1946 में यूनाइटेड नेशंस रेडियो की शुरुआत हुई थी — जिसने वैश्विक संवाद और शांति को बढ़ावा दिया।
भारत में रेडियो: आज भी करोड़ों लोगों की जीवनरेखा
डिजिटल मीडिया के तूफान के बावजूद भारत में रेडियो की पकड़ आज भी बेहद मजबूत है।
ग्रामीण इलाकों से लेकर महानगरों तक रेडियो:
सरकारी योजनाओं की जानकारी देता है
किसानों को मौसम और खेती से जुड़ी सलाह देता है
स्वास्थ्य जागरूकता फैलाता है
शिक्षा कार्यक्रम प्रसारित करता है
ऑल इंडिया रेडियो: भारत की पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग की रीढ़
भारत में रेडियो का सबसे मजबूत स्तंभ है All India Radio (आकाशवाणी)।
AIR की बड़ी उपलब्धियां:
1936 में स्थापना
देश की लगभग 99% आबादी तक पहुंच
591 ब्रॉडकास्टिंग सेंटर
23 भाषाओं और 182 बोलियों में प्रसारण
इसके कार्यक्रमों में समाचार, कृषि सलाह, शिक्षा, आपदा चेतावनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं।
चक्रवात फानी और कोविड-19 महामारी के दौरान AIR ने दूर-दराज़ क्षेत्रों तक जीवनरक्षक जानकारी पहुँचाकर अपनी अहमियत साबित की।
कम्युनिटी रेडियो: स्थानीय आवाज़ों की असली ताकत
भारत में कम्युनिटी रेडियो ब्रॉडकास्टिंग का तीसरा स्तंभ है।
आज देश में 500+ कम्युनिटी रेडियो स्टेशन सक्रिय हैं जो:
स्वास्थ्य जागरूकता
शिक्षा
कृषि सलाह
सामाजिक मुद्दों
पर स्थानीय भाषा में कार्यक्रम चलाते हैं।
ये स्टेशन पहाड़ी, सीमावर्ती और दूरस्थ इलाकों में लोगों की आवाज़ बन चुके हैं।
‘मन की बात’: डिजिटल युग में रेडियो की नई ताकत
रेडियो की निरंतर प्रासंगिकता का बड़ा उदाहरण है मन की बात, जिसकी शुरुआत नरेंद्र मोदी ने 2014 में की थी।
आज यह कार्यक्रम:
रेडियो पर प्रसारित होता है
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सुना जाता है
दूर-दराज़ इलाकों तक पहुँच बनाता है
यह दिखाता है कि रेडियो डिजिटल मीडिया के साथ मिलकर और मजबूत बन सकता है।
क्यों आज भी रेडियो है अनमोल?
रेडियो आज भी इसलिए अहम है क्योंकि:
बिना इंटरनेट चलता है
सस्ता और सुलभ है
आपदा में सबसे भरोसेमंद है
ग्रामीण भारत की आवाज़ है
लोकतंत्र में सूचना की आज़ादी को मज़बूत करता है
AI और सोशल मीडिया के दौर में भी रेडियो भरोसे का माध्यम बना हुआ है।
निष्कर्ष: तकनीक बदलेगी, लेकिन रेडियो रहेगा
वर्ल्ड रेडियो डे 2026 हमें याद दिलाता है कि टेक्नोलॉजी चाहे कितनी भी आगे बढ़ जाए, इंसानी आवाज़, भरोसा और सामुदायिक जुड़ाव कभी पुराना नहीं होगा।
AI रेडियो को बेहतर बनाएगा — लेकिन उसकी आत्मा आज भी इंसान ही रहेंगे।
रेडियो कल भी ज़रूरी था, आज भी है, और भविष्य में भी रहेगा।
परीक्षा आधारित सवाल
प्रश्न: वर्ल्ड रेडियो डे किस तारीख को मनाया जाता है?
A) 15 फरवरी
B) 13 फरवरी
C) 12 फरवरी
D) 14 फरवरी
सही उत्तर: B) 13 फरवरी

