पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाते हुए 7 अधिकार प्राप्त समितियों (Empowered Groups) का गठन किया है। इन समूहों का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को प्रभावी ढंग से संभालना है।
ये सभी समितियाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के तहत कार्य करेंगी और इनमें विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी तथा शीर्ष नौकरशाह शामिल हैं।
भारत ने 7 समितियाँ क्यों बनाई?
पश्चिम एशिया में जारी संकट ने वैश्विक स्तर पर कई चिंताएँ बढ़ा दी हैं, जैसे:
- कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
- ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाएँ
- महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) में अस्थिरता
भारत, जो ऊर्जा आयात पर काफी हद तक निर्भर है, इस संकट से सीधे प्रभावित हो सकता है। इसलिए सरकार ने मल्टी-सेक्टर और समन्वित दृष्टिकोण अपनाया है ताकि तत्काल और दीर्घकालिक दोनों तरह की रणनीतियाँ तैयार की जा सकें।
पैनल 1: रक्षा, विदेश नीति और आंतरिक सुरक्षा
इस महत्वपूर्ण पैनल का नेतृत्व विदेश सचिव विक्रम मिसरी कर रहे हैं।
मुख्य कार्य:
- भू-राजनीतिक जोखिमों का आकलन
- आंतरिक सुरक्षा की तैयारी
- कूटनीतिक रणनीतियाँ
- जरूरत पड़ने पर निकासी अभियान
पैनल 2: अर्थव्यवस्था, वित्त और सप्लाई चेन
इस पैनल की अध्यक्षता आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर कर रही हैं।
मुख्य फोकस:
- निर्यात-आयात में व्यवधान
- सप्लाई चेन बाधाएँ
- वित्तीय बाजार की स्थिरता
पैनल 3: ऊर्जा सुरक्षा (तेल, गैस और बिजली)
इस पैनल का नेतृत्व पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल कर रहे हैं।
मुख्य उद्देश्य:
- ईंधन की निरंतर आपूर्ति
- मूल्य अस्थिरता पर नियंत्रण
- रणनीतिक भंडार को मजबूत करना
पैनल 4 और 5: कृषि, उर्वरक और आवश्यक वस्तुएं
- पैनल 4: उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा
- पैनल 5: उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे
मुख्य कार्य:
- खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना
- उर्वरक आपूर्ति बनाए रखना
- आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करना
पैनल 6: परिवहन, लॉजिस्टिक्स और व्यापार मार्ग
इस पैनल का नेतृत्व बंदरगाह एवं जलमार्ग सचिव विजय कुमार कर रहे हैं।
मुख्य फोकस:
- शिपिंग और एयर कार्गो नेटवर्क
- आयात-निर्यात की निरंतरता
- वैश्विक व्यापार मार्गों की निगरानी
पैनल 7: सूचना, संचार और जन सहभागिता
इस पैनल की अध्यक्षता सूचना एवं प्रसारण सचिव संजय जाजू कर रहे हैं।
मुख्य भूमिका:
- सही और समय पर सूचना का प्रसार
- फेक न्यूज़ पर नियंत्रण
- जनता और सरकार के बीच समन्वय
रणनीतिक महत्व: भारत की तैयारी कितनी मजबूत?
इन सातों समूहों को व्यापक जिम्मेदारियाँ दी गई हैं, जैसे:
- ऊर्जा और कीमतों के जोखिम का आकलन
- वैकल्पिक आयात स्रोतों की पहचान
- मुद्रास्फीति नियंत्रण
- आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना
- वैश्विक घटनाक्रमों की रियल-टाइम निगरानी
यह पहल भारत के प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल को दर्शाती है, जिसमें तेजी से निर्णय लेने और इंटर-मिनिस्ट्री कोऑर्डिनेशन को प्राथमिकता दी गई है।
निष्कर्ष
West Asia संकट के बीच भारत सरकार का यह कदम देश को संभावित आर्थिक और रणनीतिक झटकों से बचाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है। 7 सशक्त समूहों के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के हर पहलू पर सतर्क नजर बनाए हुए है।
MCQ (प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए)
प्रश्न: भारत सरकार ने 2026 में पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए कितनी अधिकार प्राप्त समितियों का गठन किया?
A. पाँच
B. छह
C. सात ✅
D. आठ

