उत्तर प्रदेश सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹9.13 लाख करोड़ का बजट पेश किया है, जिसे वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में प्रस्तुत किया। यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में 12.2% अधिक है और इसे राज्य की विकासोन्मुखी, समावेशी और रोजगार-उन्मुख नीति के अनुरूप तैयार किया गया है। वित्त मंत्री ने बजट पेश करते समय अनुशासित वित्तीय प्रबंधन, ऋण नियंत्रण और राजकोषीय स्थिरता पर विशेष जोर दिया।
महत्वपूर्ण रूप से, बजट में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3% तक सीमित रखने की घोषणा की गई है। यह नीति 2030-31 तक प्रभावी रहेगी और राज्य को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता प्रदान करेगी। बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आधारभूत संरचना, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
यूपी बजट 2026-27: आकार, वृद्धि और वित्तीय अनुशासन
उत्तर प्रदेश का यह बजट भारत के सबसे बड़े राज्य बजटों में से एक माना जा रहा है। कुल बजट ₹9.13 लाख करोड़ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.2% अधिक है। यह वृद्धि विस्तारवादी नीतियों को दर्शाती है, लेकिन वित्तीय अनुशासन के साथ संतुलित व्यय की नीति भी स्पष्ट रूप से सामने आती है।
राजकोषीय घाटे को GSDP के 3% तक सीमित रखने की प्रतिबद्धता राज्य की वित्तीय स्थिरता को सुनिश्चित करती है। इस दिशा में कदम उठाने से निवेशकों और वित्तीय संस्थानों में विश्वास बढ़ेगा और राज्य की आर्थिक वृद्धि स्थिर आधार पर संचालित होगी।
क्षेत्रवार बजट आवंटन: शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि
बजट में विभिन्न क्षेत्रों को स्पष्ट प्राथमिकता दी गई है:
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शिक्षा: कुल बजट का 12.4% शिक्षा पर आवंटित किया गया है। यह निवेश मानव पूंजी के विकास और युवा वर्ग को रोजगार के योग्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों के डिजिटलाइजेशन, स्मार्ट क्लासरूम और गुणवत्ता शिक्षा पर जोर दिया गया है।
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स्वास्थ्य: स्वास्थ्य क्षेत्र को 6% का हिस्सा दिया गया है। इस धनराशि का उपयोग नए अस्पतालों, हेल्थकेयर सेंटरों और डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफ़ॉर्मों के निर्माण में किया जाएगा।
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कृषि और ग्रामीण विकास: कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को 9% का आवंटन दिया गया है। इससे किसानों को उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं और फसल बीमा जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इसके साथ ही ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, जो राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिरता को बढ़ाएगा।
बुनियादी ढांचा और पूंजीगत निवेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने बजट में पूंजीगत व्यय और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को विशेष महत्व दिया है। पूंजीगत व्यय के माध्यम से:
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सड़कों और एक्सप्रेसवे का निर्माण
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बिजली और लॉजिस्टिक्स हब का विकास
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स्मार्ट सिटी और डिजिटल शहरों का निर्माण
किया जाएगा। इन पहलुओं से न केवल आर्थिक उत्पादकता बढ़ेगी बल्कि नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। यह राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप कदम है।
कौशल विकास और रोजगार रणनीति
बजट में कौशल विकास पर भी विशेष जोर है। वित्त मंत्री ने कहा कि तकनीकी या ट्रेड कौशल रखने वाले व्यक्तियों के बेरोजगार रहने की संभावना बहुत कम होती है। इसके लिए बजट में कई पहलें शामिल हैं:
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मौजूदा कौशल प्रशिक्षण केंद्रों की क्षमता का विस्तार
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नए प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना
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पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) आधारित स्किल और प्लेसमेंट सेंटर की स्थापना
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निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुनिश्चित कर उद्योग और कौशल के बीच की खाई को पाटना
इन पहलों से युवाओं को रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा और राज्य की कौशल संपन्न कार्यबल विकसित होगी।
महिला केंद्रित रोजगार और सशक्तिकरण
यूपी बजट 2026-27 में महिला सशक्तिकरण और आर्थिक भागीदारी को भी प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक जिले में महिलाओं के लिए अलग कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य है:
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महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाना
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समावेशी विकास को बढ़ावा देना
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महिला श्रमबल भागीदारी को सुधारना
यह पहल राज्य की समग्र विकास नीति को और अधिक संतुलित और समावेशी बनाएगी।

