वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और प्रसारक मार्क टली का 26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे कुछ समय से एक निजी अस्पताल में भर्ती थे, जहाँ स्ट्रोक के बाद मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण उनका देहांत हुआ। उनके निधन के साथ ही भारत और दक्षिण एशिया में विदेशी पत्रकारिता के एक ऐसे युग का अंत हो गया, जिसने संवेदनशीलता, गहराई और ज़मीनी समझ को पत्रकारिता की पहचान बनाया।
मार्क टली को भारत से रिपोर्टिंग करने वाले सबसे प्रभावशाली विदेशी संवाददाताओं में गिना जाता है। पाँच दशकों से अधिक समय तक उन्होंने भारत की जटिल राजनीति, समाज, धर्म और आम जनजीवन को वैश्विक मंच पर संतुलित और मानवीय दृष्टि से प्रस्तुत किया।
क्यों चर्चा में है मार्क टली का निधन?
बीबीसी नई दिल्ली ब्यूरो के पूर्व प्रमुख और भारत पर लिखी गई कई चर्चित पुस्तकों के लेखक मार्क टली का निधन केवल एक वरिष्ठ पत्रकार का जाना नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में निष्पक्ष और गहन विदेशी पत्रकारिता के दौर के समापन के रूप में देखा जा रहा है।
वे उन विरले विदेशी पत्रकारों में थे, जिन्होंने भारत को केवल सत्ता के गलियारों से नहीं, बल्कि गांवों, कस्बों और आम लोगों की ज़िंदगी से समझा।
मार्क टली कौन थे?
मार्क टली का पूरा नाम सर विलियम मार्क टली था। उनका जन्म वर्ष 1935 में कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ था। वे ब्रिटिश नागरिक थे, लेकिन उन्होंने अपना अधिकांश जीवन भारत में बिताया।
भारतीय समाज, संस्कृति और भाषाओं से उनके गहरे जुड़ाव के कारण उन्हें स्नेहपूर्वक “टली साहब” कहा जाता था।
वे हिंदी भाषा में दक्ष थे, जिसने उन्हें भारत को बाहरी पर्यवेक्षक की तरह नहीं, बल्कि अंदर से समझने की दुर्लभ क्षमता दी।
प्रारंभिक करियर और BBC से जुड़ाव
मार्क टली ने 1960 के दशक में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) में अपने करियर की शुरुआत की।
1965 में भारत में उनकी पोस्टिंग हुई। शुरुआत में उन्होंने प्रशासनिक भूमिकाएँ निभाईं, लेकिन जल्द ही रिपोर्टिंग की ओर रुख किया।
उनकी:
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सूक्ष्म दृष्टि
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संवेदनशील भाषा
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ज़मीनी रिपोर्टिंग
ने उन्हें जल्दी ही अलग पहचान दिला दी। वे 22 वर्षों तक BBC के नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख रहे और भारत के साथ-साथ पूरे दक्षिण एशिया की रिपोर्टिंग की। इस तरह वे भारत में कार्य करने वाले सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले विदेशी संवाददाताओं में शामिल हो गए।
भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाओं के साक्षी
मार्क टली ने स्वतंत्रता के बाद के भारत की कई निर्णायक और ऐतिहासिक घटनाओं की रिपोर्टिंग की। इनमें प्रमुख हैं:
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1971 का बांग्लादेश मुक्ति संग्राम
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आपातकाल (1975–77)
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
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1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और सिख विरोधी दंगे
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1991 में राजीव गांधी की हत्या
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1992 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस
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भोपाल गैस त्रासदी
इन घटनाओं पर उनकी रिपोर्टिंग में सनसनी नहीं, बल्कि मानवीय पीड़ा और सामाजिक प्रभाव की गहरी समझ दिखाई देती थी।
भारत पर लिखीं कई चर्चित किताबें
पत्रकारिता के साथ-साथ मार्क टली एक प्रख्यात लेखक भी थे। उन्होंने भारत के समाज और राजनीति पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं, जिनमें शामिल हैं:
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No Full Stops in India
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India in Slow Motion
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The Heart of India
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Amritsar: Mrs Gandhi’s Last Battle (1985)
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India’s Unending Journey (2008)
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The Road Ahead (2011)
उनकी अंतिम चर्चित पुस्तक Upcountry Tales: Once Upon a Time in the Heart of India (2017) ग्रामीण उत्तर भारत की मार्मिक और सजीव कहानियों का संग्रह है।
BBC के बाद का जीवन
1990 के दशक के मध्य में संगठन के नेतृत्व से मतभेदों के कारण उन्होंने BBC से इस्तीफा दे दिया। इसके बावजूद वे बौद्धिक रूप से सक्रिय रहे।
उन्होंने BBC Radio 4 के लोकप्रिय कार्यक्रम “Something Understood” का प्रस्तुतीकरण किया, जो धर्म, आस्था और नैतिक प्रश्नों पर केंद्रित था।
जीवन के उत्तरार्ध में भी वे लोकतंत्र, धर्म और भारतीय राजनीति पर विमर्श में सक्रिय रहे।
भारत से गहरा व्यक्तिगत जुड़ाव
मार्क टली का भारत से रिश्ता केवल पेशेवर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और भावनात्मक था।
वे दक्षिण दिल्ली में सादगीपूर्ण जीवन जीते थे और देशभर में व्यापक यात्राएँ करते थे—अक्सर रेल यात्रा के माध्यम से।
उनकी रिपोर्टिंग में:
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आम भारतीयों की आवाज़
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ग्रामीण भारत की समस्याएँ
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सामाजिक बदलाव की कहानियाँ
हमेशा प्रमुख रहीं। यही कारण था कि उन्हें विभिन्न पीढ़ियों का स्नेह और भरोसा मिला।
सम्मान और पुरस्कार
मार्क टली को उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले:
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2002 में ब्रिटिश सरकार द्वारा नाइटहुड
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भारत सरकार द्वारा पद्म श्री और बाद में पद्म भूषण
वे उन गिने-चुने विदेशी नागरिकों में थे, जिन्हें भारत के दोनों प्रमुख नागरिक सम्मान प्राप्त हुए। यह भारत की ओर से उनके ईमानदार और संवेदनशील योगदान की स्वीकृति थी।

