लोकसभा ने 18 दिसंबर 2025 को भारी विरोध, हंगामे और लगभग आठ घंटे की सीमित बहस के बीच विकसित भारत गारंटी रोज़गार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) – VB-G RAM-G विधेयक, 2025 को पारित कर दिया। सरकार का दावा है कि यह विधेयक ग्रामीण भारत में रोज़गार और आजीविका के स्वरूप को आधुनिक बनाएगा, जबकि विपक्ष और कई विशेषज्ञ इसे मनरेगा (MGNREGA) की अधिकार-आधारित प्रकृति को कमजोर करने वाला कदम मान रहे हैं।
यह विधेयक प्रभावी रूप से मनरेगा के मौजूदा प्रावधानों का स्थान लेता है, जिससे ग्रामीण रोज़गार नीति में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
मनरेगा (MGNREGA) की पृष्ठभूमि
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) वर्ष 2005 में लागू किया गया था। यह भारत का एकमात्र अधिकार-आधारित रोज़गार कानून है, जो ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष कम-से-कम 100 दिन के मज़दूरी रोज़गार की कानूनी गारंटी देता है।
मनरेगा की प्रमुख विशेषताएँ:
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मांग-आधारित रोज़गार उपलब्धता
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पंचायतों के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना
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जल संरक्षण, सड़क, तालाब जैसी टिकाऊ परिसंपत्तियाँ
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सामाजिक अंकेक्षण और पारदर्शिता
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महिलाओं और वंचित वर्गों की उच्च भागीदारी
कोविड-19 और ग्रामीण संकट के समय मनरेगा को सामाजिक सुरक्षा जाल के रूप में देखा गया।
नया विधेयक क्यों लाया गया?
सरकार का तर्क है कि मनरेगा ने संकट काल में अहम भूमिका निभाई, लेकिन अब इसकी पुनर्संरचना ज़रूरी है ताकि—
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक उत्पादकता बढ़े
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मज़दूरी कार्यों को अवसंरचना निर्माण से जोड़ा जा सके
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तकनीक के ज़रिये भ्रष्टाचार और लीकेज कम हों
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विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों के अनुरूप ग्रामीण नीति बने
इसी सोच के तहत VB-G RAM-G विधेयक पेश किया गया।
VB-G RAM-G विधेयक के मुख्य उद्देश्य
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ग्रामीण रोज़गार अवसरों का विस्तार
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तात्कालिक राहत से हटकर स्थायी आजीविका परिसंपत्तियों पर फोकस
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प्रौद्योगिकी-आधारित पारदर्शी शासन
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ग्रामीण कार्यों का राष्ट्रीय अवसंरचना योजनाओं से एकीकरण
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वंचित और हाशिये के समूहों को बेहतर लक्ष्यीकरण
विधेयक में प्रस्तावित प्रमुख बदलाव
1️⃣ रोज़गार गारंटी में वृद्धि
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गारंटीकृत कार्यदिवस 100 से बढ़ाकर 125 दिन प्रति परिवार
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रोज़गार अधिकार में लगभग 25% वृद्धि
2️⃣ कृषि अवकाश (Agricultural Pause)
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बुवाई और कटाई के चरम मौसम में 60 दिनों का अवकाश
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राज्यों को स्थानीय फसल चक्र के अनुसार अवकाश अधिसूचित करने का अधिकार
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उद्देश्य: कृषि कार्यों के लिए श्रम की उपलब्धता बनाए रखना
3️⃣ नई लागत-साझेदारी व्यवस्था
VB-G RAM-G को केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) बनाया गया है।
वित्तपोषण पैटर्न:
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90:10 – पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य/केंद्रशासित प्रदेश
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60:40 – अन्य राज्य
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100% केंद्र – बिना विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेश
4️⃣ मानक (कैप्ड) बजट आवंटन
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मांग-आधारित फंडिंग की जगह राज्यवार सीमित आवंटन
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तय सीमा से अधिक खर्च का बोझ राज्यों पर
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मनरेगा की ओपन-एंडेड फंडिंग से बड़ा बदलाव
5️⃣ प्रौद्योगिकी-आधारित शासन
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विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक का निर्माण
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पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान से एकीकरण
प्रमुख तकनीकी प्रावधान:
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बायोमेट्रिक उपस्थिति
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AI-आधारित धोखाधड़ी पहचान
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GPS से कार्यों की ट्रैकिंग
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साप्ताहिक सार्वजनिक डेटा प्रकटीकरण
उठाई गई प्रमुख चिंताएँ
🔴 राज्यों पर बढ़ता वित्तीय बोझ
60:40 मॉडल से गरीब और पिछड़े राज्यों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
🔴 अधिकार बनाम बजट कैप
सीमित बजट आवंटन से मनरेगा की अधिकार-आधारित प्रकृति कमजोर होने की आशंका।
🔴 डिजिटल बहिष्करण का जोखिम
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कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी
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बायोमेट्रिक विफलता
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फिंगरप्रिंट मिसमैच
इन कारणों से मज़दूरों के बाहर होने का खतरा।
🔴 कृषि अवकाश का असर
भूमिहीन और सीमांत मज़दूरों की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
🔴 कार्यान्वयन की चुनौती
इतिहास बताता है कि औसत रोज़गार 45–55 दिन से आगे नहीं बढ़ पाया है।
विधेयक के सकारात्मक पहलू
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जलवायु-सहिष्णु और टिकाऊ परिसंपत्तियों पर ज़ोर
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राष्ट्रीय अवसंरचना योजना से बेहतर समन्वय
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बाज़ार, गोदाम, ग्रामीण लॉजिस्टिक्स जैसी आजीविका परिसंपत्तियाँ
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साप्ताहिक वेतन भुगतान
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उल्लंघन पर ₹10,000 तक दंड
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एकल महिलाएँ, वृद्ध, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों पर विशेष फोकस
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
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VB-G RAM-G विधेयक 18 दिसंबर 2025 को लोकसभा से पारित
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मनरेगा का स्थान नया मिशन लेगा
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रोज़गार गारंटी 125 दिन
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कृषि अवकाश और बजट कैप की व्यवस्था
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तकनीक-आधारित शासन पर ज़ोर
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दीर्घकालिक विकास और ग्रामीण आजीविका के बीच संतुलन का प्रयास

