बेंगलुरु का पुराना नाम क्या है? जानिए इसका इतिहास
बेंगलुरु का पुराना नाम क्या है? जानिए इसका इतिहास

बेंगलुरु का पुराना नाम क्या है? जानिए इसका इतिहास

हर शहर के नाम के पीछे कोई न कोई कहानी छिपी होती है। इतिहास, संस्कृति और भाषा के बदलाव के कारण समय-समय पर कई शहरों के नाम बदलते रहे हैं। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु, जिसे आज पूरी दुनिया “आईटी हब” के रूप में जानती है, का भी एक पुराना नाम है। यह नाम स्थानीय परंपराओं और एक अनोखी दंतकथा से जुड़ा हुआ है, जो दर्शाता है कि कभी-कभी छोटी-सी घटना भी एक बड़े शहर की पहचान तय कर सकती है।

बेंगलुरु का संक्षिप्त परिचय

बेंगलुरु, जिसे पहले बैंगलोर (Bangalore) कहा जाता था, कर्नाटक की राजधानी है और भारत के सबसे बड़े शहरों में से एक है। इस शहर की नींव 1537 में केंपे गौड़ा प्रथम ने रखी थी। समय के साथ यह न सिर्फ दक्षिण भारत का एक बड़ा व्यावसायिक और सांस्कृतिक केंद्र बना, बल्कि देश का सबसे बड़ा आईटी हब भी बन गया। इसी वजह से इसे “भारत की सिलिकॉन वैली” कहा जाता है।

यह शहर आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, विविध संस्कृति और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि बेंगलुरु आज देश और विदेश के लाखों लोगों और कंपनियों को आकर्षित करता है।

बेंगलुरु का पुराना नाम

बेंगलुरु का पुराना नाम था “बेंदाकलूरु (Bendakaluru)”, जिसका अर्थ है “उबली हुई फलियों का नगर”। यह नाम एक दिलचस्प दंतकथा से जुड़ा हुआ है, जिसमें एक गरीब महिला और उसकी सरल मेहमाननवाज़ी की अहम भूमिका है।

नाम के पीछे की कहानी

कहा जाता है कि होयसला वंश के राजा वीरा बल्लाला द्वितीय एक बार शिकार पर निकले थे और जंगल में रास्ता भटक गए। भूख और थकान से परेशान होकर वह एक बुजुर्ग महिला के घर पहुंचे। महिला के पास उन्हें खिलाने के लिए कुछ खास नहीं था, इसलिए उसने सादगी से उन्हें सिर्फ उबली हुई फलियां (Boiled Beans) खाने को दीं।

राजा इस महिला की मेहमाननवाज़ी और उसके भाव से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने इस जगह का नाम “बेंदाकलूरु” यानी “उबली हुई फलियों का नगर” रख दिया। समय के साथ यह नाम बेंगलुरु में बदल गया।

ऐतिहासिक प्रमाण

हालाँकि यह दंतकथा बहुत प्रसिद्ध है, लेकिन बेंगलुरु नाम का ज़िक्र इससे भी पहले मिलता है।

  • बेंगलुरु का नाम 9वीं शताब्दी की शिलालेखों में भी पाया गया है।

  • बेंगलुरु के पास स्थित बेगुर गाँव की एक प्राचीन शिला-लेख में “बेंगलुरु” शब्द पहले से ही मौजूद था।

  • इसका मतलब है कि यह नाम राजा बल्लाला की कहानी से भी पुराना है और सदियों से प्रयोग में है।

समय के साथ नाम में बदलाव

समय और शासकों के बदलने के साथ बेंगलुरु के नाम में भी परिवर्तन होते गए।

  1. बेंदाकलूरु → बेंगलुरु: स्थानीय भाषा में उच्चारण के चलते नाम सरल होकर बेंगलुरु हो गया।

  2. बेंगलुरु → बैंगलोर: ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेज़ी बोलने वालों के लिए उच्चारण आसान बनाने के लिए इसका नाम “Bangalore” कर दिया गया।

  3. बैंगलोर → बेंगलुरु: आज़ादी के बाद लंबे समय तक इसे बैंगलोर कहा गया, लेकिन 2014 में कर्नाटक सरकार ने आधिकारिक रूप से इसका नाम बदलकर फिर से बेंगलुरु कर दिया।

नाम कब बदला गया?

1 नवंबर 2014 को कर्नाटक सरकार ने बैंगलोर का नाम बदलकर बेंगलुरु कर दिया। यही नहीं, उसी दिन राज्य के कई और शहरों के नाम भी उनके पारंपरिक कन्नड़ रूपों में बदले गए।

  • मैसूर → मैसुरु

  • मैंगलोर → मंगळुरु

  • बेलगाम → बेलगावी

यह कदम कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने के उद्देश्य से उठाया गया था।

बेंगलुरु के पुराने नाम से जुड़ी रोचक बातें

  • “बेंदाकलूरु” नाम एक राजा और एक गरीब महिला की कहानी से जुड़ा हुआ है।

  • 9वीं शताब्दी के शिलालेख इस नाम की ऐतिहासिक उपस्थिति को साबित करते हैं।

  • अंग्रेज़ों ने इसे अपने उच्चारण की सुविधा के लिए “Bangalore” बना दिया।

  • 2014 में आधिकारिक रूप से इसे “Bengaluru” नाम दिया गया, ताकि इसका मूल कन्नड़ स्वरूप बरकरार रहे।

  • यह नाम दर्शाता है कि कैसे बेंगलुरु की पहचान उसकी जड़ों और आधुनिक प्रगति दोनों का मिश्रण है।

निष्कर्ष

बेंगलुरु का पुराना नाम बेंदाकलूरु न सिर्फ एक दंतकथा बल्कि इसकी ऐतिहासिक गहराई को भी दर्शाता है। यह कहानी दिखाती है कि कभी-कभी एक साधारण घटना, जैसे किसी गरीब महिला द्वारा खिलाए गए उबले हुए बीन्स, भी इतिहास और संस्कृति पर गहरा असर छोड़ सकती है।

आज बेंगलुरु एक आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध शहर है, लेकिन इसका पुराना नाम हमें याद दिलाता है कि इस महानगर की जड़ें कितनी गहरी और अनोखी हैं।

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