भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला केंद्रीय बजट (Union Budget) एक बार फिर सुर्खियों में है। 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद के निम्न सदन लोकसभा में सुबह 11 बजे बजट भाषण प्रस्तुत करेंगी। बतौर वित्त मंत्री यह उनका लगातार नौवां बजट भाषण होगा—जो भारतीय संसदीय और वित्तीय इतिहास में अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। यह सिलसिला न केवल उनके लंबे और निरंतर कार्यकाल को दर्शाता है, बल्कि नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान नीति-निरंतरता और आर्थिक स्थिरता का भी संकेत देता है।
ऐतिहासिक उपलब्धि: लगातार नौवां बजट
जब 1 फरवरी 2026 को निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी, तब वे लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट प्रस्तुत करने वाली वित्त मंत्री बन जाएंगी। यह उल्लेखनीय यात्रा 2019 में शुरू हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के बाद उन्हें भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री नियुक्त किया गया।
राजनीतिक बदलावों के बावजूद, 2024 के आम चुनाव में मोदी के लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद भी उन्होंने वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाले रखी। फरवरी 2024 में पेश अंतरिम बजट सहित अब तक वे आठ लगातार बजट पेश कर चुकी हैं। नौवां बजट उन्हें भारतीय वित्तीय इतिहास में रिकॉर्ड बनाने वाली वित्त मंत्री के रूप में और मजबूती से स्थापित करेगा।
आर्थिक विकास पर केंद्रित रहने की संभावना
Union Budget 2026 ऐसे समय आ रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की सख्त नीतियों का असर भारत पर भी पड़ रहा है।
विशेष रूप से, अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए 50% तक के ऊँचे शुल्क और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव भारत के लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसे माहौल में इस बजट से उम्मीद की जा रही है कि सरकार:
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आर्थिक विकास को रफ्तार देने वाले संरचनात्मक सुधारों पर जोर देगी
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निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगी
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एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को राहत दे सकती है
राजकोषीय संतुलन बनाए रखते हुए विकास को गति देना इस बजट की सबसे बड़ी कसौटी होगी।
‘बजट’ शब्द कहां से आया?
“बजट” शब्द की उत्पत्ति रोचक है। इसका मूल लैटिन शब्द ‘बुल्गा’ (Bulga) है, जिसका अर्थ चमड़े का थैला होता है। फ्रांसीसी भाषा में यह ‘बुगेट’ (Bougette) कहलाया। अंग्रेज़ी में आते-आते यह ‘Budget’ बन गया।
इतिहास में, वित्त मंत्री संसद में अपने दस्तावेज़ एक चमड़े के बैग में लेकर आते थे। धीरे-धीरे वही थैला और उसमें रखे वित्तीय दस्तावेज़ “बजट” के नाम से पहचाने जाने लगे। आज यही शब्द दुनिया के लगभग सभी देशों में अपनाया गया है।
सबसे पहले बजट किस देश में पेश हुआ?
दुनिया में सबसे पहले इंग्लैंड ने 1760 में बजट पेश किया। यह कदम आधुनिक आर्थिक नीति और वित्तीय जवाबदेही की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल था। इसके बाद:
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फ्रांस में 1817 से बजट परंपरा शुरू हुई
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अमेरिका में 1921 में बजट पेश करने की औपचारिक शुरुआत हुई
भारत में बजट की परंपरा ब्रिटिश शासन के दौरान आई। 1860 में जेम्स विल्सन ने भारत का पहला बजट प्रस्तुत किया।
स्वतंत्र भारत का पहला अंतरिम बजट 26 नवंबर 1947 को आर. के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया, जिसने नई भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव रखी।
बजट मसौदा कैसे तैयार होता है?
केंद्रीय बजट कोई एक-दिन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि महीनों की तैयारी का परिणाम होता है। वित्त मंत्रालय:
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पिछले वर्षों के राजस्व और व्यय के आंकड़ों का विश्लेषण करता है
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वर्तमान आर्थिक स्थिति, विकास दर और राजकोषीय घाटे का आकलन करता है
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कर ढांचे में संभावित बदलाव, नई नीतियाँ और निवेश योजनाएँ तैयार करता है
इसके बाद प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल बजट मसौदे की समीक्षा करते हैं। अंतिम मंजूरी के बाद बजट को संसद में पेश किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया गोपनीयता और सटीकता के साथ संपन्न होती है।
Union Budget 2026 से क्या उम्मीदें?
Union Budget 2026 से आम जनता और उद्योग जगत दोनों को बड़ी उम्मीदें हैं। संभावित फोकस क्षेत्र हो सकते हैं:
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महंगाई पर नियंत्रण और मध्यम वर्ग को राहत
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कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
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डिजिटल और ग्रीन इकोनॉमी को बढ़ावा
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शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर निवेश
यह बजट न केवल आने वाले वित्तीय वर्ष की दिशा तय करेगा, बल्कि भारत के दीर्घकालिक विकास पथ को भी आकार देगा।

