भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में गुजरात ने एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। 31 दिसंबर 2025 तक गुजरात देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 16.5% हिस्सेदारी के साथ भारत का सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है। मजबूत नीतिगत समर्थन, विशाल सोलर पार्कों का विकास और रूफटॉप सोलर को तेज़ी से अपनाने जैसी पहलों ने गुजरात को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय नेतृत्व दिलाया है।
यह उपलब्धि न केवल भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मजबूती देती है, बल्कि नेट-ज़ीरो उत्सर्जन की दिशा में देश की प्रगति को भी तेज़ करती है। गुजरात की सफलता इस बात का उदाहरण है कि राज्य-स्तरीय पहलें किस तरह भारत के हरित परिवर्तन (Green Transition) को आगे बढ़ा सकती हैं।
गुजरात की नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी भूमिका
गुजरात आज भारत में कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में 42.583 गीगावाट के साथ पहले स्थान पर है। देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में राज्य की 16.50% हिस्सेदारी उसके मज़बूत नीतिगत ढांचे, तैयार अवसंरचना और निवेश–अनुकूल माहौल को दर्शाती है।
राज्य पवन ऊर्जा क्षमता में पहले स्थान पर है, जबकि सौर ऊर्जा प्रतिष्ठानों में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। यह नेतृत्व भारत की दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा दृष्टि के अनुरूप है, जो जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने पर केंद्रित है।
सौर ऊर्जा: गुजरात की वृद्धि की रीढ़
दिसंबर 2025 तक 25,529.40 मेगावाट स्थापित सौर क्षमता के साथ गुजरात एक प्रमुख सौर ऊर्जा हब के रूप में उभरा है। इसमें ग्राउंड-माउंटेड सोलर परियोजनाएं, रूफटॉप सोलर सिस्टम, सोलर–विंड हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स और पीएम-कुसुम जैसी ऑफ-ग्रिड प्रणालियां शामिल हैं।
राज्य के बड़े सोलर पार्क—चारणका, राधनेशडा और धोलेरा—ने बड़े पैमाने पर स्वच्छ बिजली उत्पादन को गति दी है।
सबसे उल्लेखनीय परियोजना है कच्छ का खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क, जिसकी प्रस्तावित क्षमता 37.35 गीगावाट है। इसमें से 11.33 गीगावाट क्षमता पहले ही चालू हो चुकी है, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क बन गया है। यह परियोजना अकेले ही भारत की वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा छवि को मजबूत करती है।
पवन ऊर्जा और हाइब्रिड परियोजनाएं
गुजरात ने भारत की पहली विंड पावर नीति लागू कर पवन ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई थी। दिसंबर 2025 तक राज्य में 14,820.94 मेगावाट की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता है, जिसमें कच्छ जिला सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।
इसके अलावा जामनगर, देवभूमि द्वारका, अमरेली और राजकोट जैसे जिले भी पवन ऊर्जा उत्पादन में अहम भूमिका निभाते हैं।
साथ ही, गुजरात ने पवन–सौर हाइब्रिड परियोजनाओं को भी तेजी से अपनाया है। आधुनिक ट्रांसमिशन (एवैकुएशन) अवसंरचना और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि के सहयोग से राज्य में 2,398.77 मेगावाट की हाइब्रिड क्षमता सफलतापूर्वक विकसित की गई है। हाइब्रिड मॉडल से बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर होती है, जिससे ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ती है।
रूफटॉप सोलर और कृषि क्षेत्र को समर्थन
गुजरात रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय अग्रणी बन चुका है। राज्य में 11 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन हो चुके हैं, जिनसे 6,412.80 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।
2016 से आवासीय रूफटॉप सोलर को प्रोत्साहित करने के परिणामस्वरूप, भारत की कुल रूफटॉप सोलर क्षमता में गुजरात की 25% से अधिक हिस्सेदारी है।
कृषि क्षेत्र में पीएम-कुसुम योजना के तहत 12,700 से अधिक ऑफ-ग्रिड सोलर वॉटर पंप लगाए गए हैं। इससे किसानों की बिजली लागत घटी है, डीज़ल पर निर्भरता कम हुई है और सिंचाई को अधिक टिकाऊ बनाया गया है।
नीतिगत ढांचा और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस
गुजरात की सफलता के पीछे एक सशक्त नीतिगत ढांचा है—विंड पावर नीति 1993 से लेकर गुजरात एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2025 तक।
इन नीतियों की प्रमुख विशेषताएं हैं:
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क्षमता सीमाओं को हटाना
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ग्रिड कनेक्टिविटी को सरल बनाना
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हाइब्रिड सिस्टम और बैटरी स्टोरेज को प्रोत्साहन
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तेज़ और पारदर्शी मंज़ूरी प्रक्रिया
अक्षय ऊर्जा सेतु जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म निवेशकों के लिए ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को और बेहतर बनाते हैं। साथ ही, राज्य की नीतियां निजी निवेश, नवाचार, नवीकरणीय विनिर्माण और हरित रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देती हैं।
भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्य में गुजरात की भूमिका
भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य की दिशा में गुजरात की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राज्य न केवल स्वच्छ बिजली उत्पादन बढ़ा रहा है, बल्कि ग्रीन हाइड्रोजन, एनर्जी स्टोरेज, और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसी उभरती तकनीकों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है

