भारत सरकार ने देश के डेयरी क्षेत्र को और अधिक संगठित, सशक्त और प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से श्वेत क्रांति 2.0 की शुरुआत की है। सहकारिता मंत्रालय द्वारा घोषित यह महत्वाकांक्षी पहल आने वाले वर्षों में दुग्ध उत्पादन, संग्रहण और विपणन प्रणाली में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में डेयरी सहकारी समितियों द्वारा दूध खरीद में 50% की वृद्धि करना है। सरकार ने 2028–29 तक प्रतिदिन दूध संग्रहण को 1,007 लाख किलोग्राम तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य भारत की विश्व के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देश के रूप में स्थिति को और अधिक मजबूत करेगा।
ऐतिहासिक विरासत से भविष्य की ओर
श्वेत क्रांति 2.0, 1970 के दशक की ऐतिहासिक दुग्ध क्रांति की विरासत को आगे बढ़ाती है। पहली श्वेत क्रांति ने ‘ऑपरेशन फ्लड’ के माध्यम से भारत को दूध की कमी वाले देश से आत्मनिर्भर राष्ट्र में बदल दिया था। सहकारी मॉडल के जरिए लाखों छोटे किसानों को बाजार से जोड़ा गया और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली।
अब, बदलती आर्थिक आवश्यकताओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में, श्वेत क्रांति 2.0 का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि सहकारी नेटवर्क का विस्तार, डेयरी अवसंरचना का आधुनिकीकरण, महिला भागीदारी को औपचारिक स्वरूप देना और संगठित डेयरी क्षेत्र में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाना है।
श्वेत क्रांति 2.0 के प्रमुख उद्देश्य
इस पहल के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:
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बिना कवर किए गए गांवों में डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार
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दूध संग्रहण और बाजार तक पहुंच में वृद्धि
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मौजूदा डेयरी सहकारी समितियों (DCS) को मजबूत करना
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लघु एवं सीमांत दुग्ध उत्पादक किसानों की आय बढ़ाना
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महिला-नेतृत्व वाले डेयरी उद्यमों को प्रोत्साहित करना
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दूध की उपलब्धता बढ़ाकर पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करना
सरकार डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण आजीविका का एक स्थिर और भरोसेमंद स्रोत मानती है, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए। इस पहल का उद्देश्य किसानों को संगठित ढांचे में लाकर उनकी आय और सुरक्षा दोनों को बढ़ाना है।
द्वि-आयामी विस्तार रणनीति
श्वेत क्रांति 2.0 एक स्पष्ट और व्यावहारिक दोहरी रणनीति पर आधारित है:
1. नई डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना
लगभग 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियां (DCS) उन पंचायतों और गांवों में स्थापित की जाएंगी जहां अभी तक सहकारी ढांचा उपलब्ध नहीं है। इससे अधिक किसानों को संगठित नेटवर्क से जोड़ा जाएगा और उन्हें पारदर्शी खरीद प्रणाली का लाभ मिलेगा।
2. मौजूदा समितियों का सुदृढ़ीकरण
लगभग 46,422 मौजूदा DCS को उन्नत किया जाएगा, ताकि उनकी कार्यक्षमता, बाजार से जुड़ाव और आय सृजन क्षमता में सुधार हो सके।
इन समितियों को दूध संग्रहण मार्गों से जोड़ा जाएगा—या तो मौजूदा मार्गों का विस्तार करके या नए मार्ग विकसित करके। इससे नियमित दूध संग्रहण सुनिश्चित होगा, दूध की बर्बादी कम होगी और किसानों का भरोसा बढ़ेगा।
अवसंरचना और तकनीकी सहयोग
डेयरी क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए आवश्यक अवसंरचना पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। कार्यक्रम के तहत निम्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी:
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ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन यूनिट (AMCU)
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डेटा प्रोसेसिंग मिल्क कलेक्शन यूनिट
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उन्नत दूध परीक्षण उपकरण
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बल्क मिल्क कूलर (BMC)
इन सुविधाओं से दूध की गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता आएगी, भुगतान प्रणाली अधिक सटीक होगी और किसानों को समय पर उचित मूल्य मिलेगा।
इस योजना के लिए वित्तीय सहायता राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम 2.0 (NPDD 2.0) के अंतर्गत पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा प्रदान की जा रही है। राज्यों में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए समान दिशा-निर्देश लागू किए जाएंगे, ताकि देशभर में एक समान प्रणाली विकसित हो सके।
महिलाओं की भागीदारी: सशक्तिकरण की दिशा में कदम
भारत के डेयरी क्षेत्र में लगभग 70% कार्यबल महिलाएं हैं। पशुपालन, दुग्ध दुहन, पशु देखभाल और चारा प्रबंधन में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। फिर भी, उनका योगदान अक्सर अनौपचारिक और अप्रत्यक्ष माना जाता रहा है।
श्वेत क्रांति 2.0 का एक प्रमुख उद्देश्य महिला-नेतृत्व वाली सहकारी समितियों को बढ़ावा देना और डेयरी संस्थानों में उनकी औपचारिक भागीदारी सुनिश्चित करना है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक सशक्तिकरण को मजबूती मिलेगी।
पोषण सुरक्षा और ग्रामीण विकास
दूध प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण स्रोत है। दूध उत्पादन और वितरण प्रणाली को मजबूत करके सरकार राष्ट्रीय स्तर पर पोषण सुरक्षा को भी सुदृढ़ करना चाहती है।
इसके साथ ही डेयरी क्षेत्र में निवेश और सहकारी विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

